Gayatri Gopichand ने जीता पदक और Arjuna Award, मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने जताया गर्व

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भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद ने त्रीसा जॉली के साथ मिलकर विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया और इसी सप्ताह उन्हें अर्जुन पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई। इस दोहरी सफलता पर मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद ने खुशी जाहिर करते हुए इसे परिवार के लिए बेहद दुर्लभ और गर्व का क्षण बताया। उन्होंने टूर्नामेंट में भारतीय टीम के समग्र प्रदर्शन को संतोषजनक बताते हुए एशियाई खेलों में बेहतर नतीजों की उम्मीद जताई।

... अमित कुमार दास ... नयी दिल्ली, 22 अगस्त गायत्री गोपीचंद के लिए विश्व चैंपियनशिप का कांस्य पदक और अर्जुन पुरस्कार से सम्मान एक ही सप्ताह में आया जिससे उनके पिता और मुख्य राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद की खुशी दोगुनी हो गई। गायत्री ने त्रीसा जॉली के साथ विश्व चैंपियनशिप में अपना पहला कांस्य पदक जीता और इसी सप्ताह उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा भी हुई। बेटी की इन उपलब्धियों ने गोपीचंद को गौरवान्वित किया।

ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन के इस पूर्व चैंपियन ने कहा कि गायत्री को खेलते हुए देखकर उनकी भावनाएं अन्य खिलाड़ियों से अलग नहीं थीं। उन्होंने कहा कि अपने सभी खिलाड़ियों की सफलता को देखते समय उनके भीतर एक जैसा ही भाव रहता है। विश्व चैंपियनशिप में शनिवार को यहां भारत का अभियान समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में गोपीचंद ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं पता कि मैं इसे उस तरह शब्दों में बयां कर पाऊंगा या नहीं।

लेकिन जब भी मेरे खिलाड़ियों ने खेला है, मुझे हमेशा ऐसा ही महसूस हुआ है। गायत्री के लिए मेरे मन में किसी अन्य खिलाड़ी से ज्यादा अलग भावना नहीं रही है।” उनके शब्दों में एक कोच की निष्पक्षता साफ झलकी, लेकिन इसके बाद उन्होंने जिस तरह बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताया, उसमें पिता का भाव छिपा नहीं रहा। गोपीचंद ने कहा, “जिस तरह उसने खेला है, उस पर मुझे बहुत गर्व है।

भगवान की कृपा से हमारे परिवार में दो अर्जुन पुरस्कार विजेता हैं। दो खिलाड़ी, दो अर्जुन पुरस्कार विजेता, यह दुर्लभ है।” गोपीचंद को 1999 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं इसके लिए भगवान का आभारी हूं।

हां, मुझे उसके प्रदर्शन और नतीजों पर बहुत गर्व है। जिस तरह उसने खुद को पेश किया, वह भी गर्व करने वाली बात है।” त्रीसा और गायत्री के युगल में कांस्य पदक जीतने के साथ भारत ने 2011 के बाद से हर विश्व चैंपियनशिप में कम से कम एक पदक जीतने का अपना रिकॉर्ड कायम रखा। भारतीय बैडमिंटन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद ने कुछ करीबी मुकाबलों में मिली हार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और विश्व चैंपियनशिप में भारत के प्रदर्शन को कुल मिलाकर संतोषजनक करार दिया।

उन्होंने आगामी एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई। गोपीचंद ने कहा, “कुल मिलाकर कुछ करीबी मुकाबलों में हमारी हार दुर्भाग्यपूर्ण रही। महिला एकल में हमने दोनों मुकाबले बेहद करीबी अंतर से गंवाए।

पुरुष एकल में आयुष का पहला दिन बहुत अच्छा रहा, लेकिन दूसरे दिन का प्रदर्शन थोड़ा निराशाजनक रहा।” उन्होंने कहा, “लेकिन कुल मिलाकर मुझे लगता है कि हमारा प्रदर्शन ठीक रहा। मैं इसे लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हूं। कभी-कभी ऐसा होता है।

हालांकि, अगली बार एशियाई खेलों में मुझे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।” उन्होंने करीबी हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर हुई दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू की तारीफ की जबकि लक्ष्य सेन के प्रदर्शन को निराशाजनक करार देते हुए भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘‘ सिंधू का मुकाबला बहुत करीबी था। जिस तरह वह हारीं, वह थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण रहा।

लेकिन अगर जापान ओपन में उनकी जीत और यहां के प्रदर्शन को देखें तो वह निश्चित रूप से अच्छा कर रही हैं।” गोपीचंद ने कहा, “लक्ष्य के लिए दुर्भाग्य से यह टूर्नामेंट अच्छा नहीं रहा। इसके पीछे के खास कारण मुझे नहीं पता। लेकिन लक्ष्य लंबे समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में रहे हैं।

इसलिए वह वापसी करेंगे।

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