Asian Games Boxing: Parveen Hooda और Ankush Panghal फाइनल में, Narender को Bronze

एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल और परवीन हुड्डा ने अपने-अपने वर्गों के फाइनल में जगह बना ली है। अंकुश ने उज्बेकिस्तान के विश्व चैंपियन को हराकर आठ साल का इंतजार खत्म किया, जबकि परवीन ने चीनी प्रतिद्वंद्वी को मात दी। दूसरी ओर, सेमीफाइनल में हार के बाद अनुभवी मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
अंकुश पंघाल ने एशियाई खेलों में पुरुष मुक्केबाजी के फाइनल में पहुंचकर भारत का आठ साल का इंतजार खत्म किया, वहीं परवीन हुड्डा ने शानदार जीत के साथ महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में खिताबी मुकाबले में जगह बनाई लेकिन नरेंद्र बेरवाल को 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग के सेमीफाइनल में बाहर होने के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। परवीन ने 65 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में चीन के ली शू को 5-0 से हराया। इसके बाद अंकुश ने 80 किलोग्राम वर्ग पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए उज्बेकिस्तान के फजलुद्दीन एरकिनबोएव को 4-1 से हराया।
एरकिनबोएव 75 किलोग्राम भार वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन हैं। अनुभवी मुक्केबाज बेरवाल को सेमीफाइनल में कजाखस्तान के मौजूदा सुपर हैवीवेट विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबाय के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा। बेरवाल ने इसके साथ ही एशियाई खेलों में एक और कांस्य पदक अपने नाम किया। वह 2023 में चीन में हुए पिछले एशियाई खेलों में भी सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। अंकुश आठ साल में एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बन गए हैं। अमित पंघाल ने 2018 में 49 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर आखिरी बार यह उपलब्धि हासिल की थी।
राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अंकुश ने एरकिनबोएव के खिलाफ जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। उन्होंने धीमी शुरुआत से उबरते हुए अंतिम दौर में दबदबा बनाया और यादगार जीत हासिल की। अंकुश ने बाद में ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘मैं एशियाई जूनियर चैंपियनशिप के दौरान भी इस प्रतिद्वंदी के खिलाफ खेल चुका था और मैं वह मुकाबला हार गया था। हमने उसके मुकाबलों के वीडियो देखे और अपनी रणनीति बनाई। मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है।’’ अंकुश को अपनी लय पाने में समय लगा क्योंकि एरकिनबोएव ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। भारतीय मुक्केबाज ने कुछ जवाबी हमले किए, लेकिन उज्बेक मुक्केबाज यह राउंड 4-1 से जीत गया। अंकुश ने दूसरे राउंड में अपनी रणनीति बदल दी।
उन्होंने अधिक आक्रामक रवैया अपनाया और 3-2 से जीत हासिल की। अंकुश ने अंतिम राउंड में जोरदार शुरुआत की और मुकाबले का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करते हुए 4-1 से जीत दर्ज की। परवीन दिग्गज एमसी मैरी कॉम (जिन्होंने 2014 में खिताब जीता था) और लवलीना बोरगोहेन (जिन्होंने पिछले खेलों में रजत पदक जीता था) के बाद एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज भी बन गई हैं। परवीन का पिछले एशियाई खेलों में जीता गया कांस्य पदक अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (आईटीए) द्वारा 22 महीने के निलंबन के बाद छीन लिया गया था।
परवीन पर यह कार्रवाई अपने ठिकाने की जानकारी (व्हेयरअबाउट्स) से जुड़ी विफलता के कारण हुई थी। अब उन्होंने हांगझोउ में अपने प्रदर्शन से आगे निकलते हुए एशियाई खेलों में कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है। रोहतक की रहने वाली इस मुक्केबाज ने ली के खिलाफ संयमित शुरुआत की लेकिन जल्द ही मुकाबला रोमांचक हो गया क्योंकि दोनों मुक्केबाज करीब से एक-दूसरे पर हमला करने लगे, और परवीन ने तीखे जवाबी मुक्कों के दम पर पांच में से तीन जजों का फैसला अपने पक्ष में किया। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा।
जब ली ने आक्रमण शुरू करने की कोशिश की, तो परवीन ने सही समय पर पलटवार किया और दूसरा राउंड सर्वसम्मति से अपने नाम किया। ली ने तीसरे राउंड में दबदबा बनाने की कोशिश की, वहीं परवीन ने मौकों का फायदा उठाया और यह राउंड 4-1 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया जहां उनका मुकाबला शुक्रवार को चीनी ताइपे की पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता चेन निएन चिन से होगा। भारत के अग्रणी सुपर हेवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र को ओरलबाय के खिलाफ शुरू से ही संघर्ष करना पड़ा।
भारत के 31 वर्षीय खिलाड़ी ने जवाबी हमलों पर भरोसा किया लेकिन इससे उन्हें खास फायदा नहीं मिला। तीसरे राउंड में नरेंद्र को भी स्टैंडिंग काउंट का सामना भी करना पड़ा। नरेंद्र ने कहा, ‘‘मैं पहली बार उसके खिलाफ खेल रहा था। हमने उसके पिछले मुकाबलों का विश्लेषण किया और कोच ने बताया कि क्या करना है। कोच ने मुझे अपने प्रतिद्वंदी पर अधिक बॉडी पंच मारने के लिए कहा, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया।
वह विश्व का नंबर एक खिलाड़ी है। यह मेरा एशियाई खेलों में दूसरा पदक है, इसलिए मैं इसे स्वीकार करूंगा।’’ भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले एशियाई खेलों की तुलना में अपना बेहतर प्रदर्शन कर लिया है। पिछली बार उसने चार पदक जीते थे लेकिन यहां छह मुक्केबाजों ने पदक राउंड में प्रवेश किया है।
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