Asian Games में चौथी बार उतरेंगी Pranati Nayak, पहले पदक पर टिकी निगाहें

भारतीय जिम्नास्ट प्रणति नायक चोट से उबरने के बाद चौथी बार एशियाई खेलों में भाग लेने जापान पहुंची हैं। एशियाई चैंपियनशिप में तीन पदक जीत चुकीं प्रणति की नजर अब अपने पहले एशियाई खेल पदक पर है। कोच अशोक मिश्रा के अनुसार टीम पहले क्वालीफिकेशन और फिर कठिन वॉल्ट पर फैसला लेगी।
एशियाई खेलों में चौथी बार उतरने जा रहीं भारत की जिम्नास्ट प्रणति नायक इस बार अपने प्रदर्शन को लेकर ज्यादा संभलकर आगे बढ़ रही हैं। 31 साल की प्रणति के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास है, क्योंकि एशियाई खेलों में अब तक उनके खाते में पदक नहीं आया है। चोट और उससे उबरने की लंबी प्रक्रिया के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी है और अब जापान के आइची-नागोया में अपने पहले एशियाई खेल पदक के लिए चुनौती पेश करने को तैयार हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रणति बुधवार रात जापान के लिए रवाना हुई। इस बार वह भारतीय दल की एकमात्र जिम्नास्ट हैं। एशियाई खेलों की शुरुआत 19 सितंबर से हो रही है। प्रतियोगिता से पहले प्रणति को पैर के तलवे में होने वाली सूजन की परेशानी से गुजरना पड़ा था। इसी वजह से वह राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की वॉल्ट फाइनल में भी हिस्सा नहीं ले सकी थीं।
प्रणति का कहना है कि अब वह पूरी तरह फिट हैं और चोट जिम्नास्ट के जीवन का हिस्सा है। उनके मुताबिक, जिम्नास्टिक में लगातार शरीर पर काफी दबाव पड़ता है और छोटी-बड़ी चोटों से निपटना इस खेल का हिस्सा है। राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी परेशानी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय दौड़ के दौरान उनसे गलती हुई थी और वह गलती चोट की वजह से नहीं हुई थी।
राष्ट्रमंडल खेलों के बाद प्रणति ने तुरंत कठिन अभ्यास शुरू करने के बजाय खुद को पूरी तरह आराम दिया। उनके प्रशिक्षक अशोक मिश्रा ने बताया कि पैर में हल्की चोट को देखते हुए उन्हें करीब तीन सप्ताह का पूरा आराम दिया गया। इस दौरान वह घर जाकर परिवार के साथ भी रहीं। इसके बाद उन्हें सीधे वॉल्ट का अभ्यास कराने के बजाय बुनियादी और तैयारी वाले अभ्यासों पर ध्यान दिया गया।
जब पैर ठीक होने लगा और प्रणति शरीर के घूमने तथा मोड़ लेने वाले अभ्यासों के साथ सहज होने लगीं, तब धीरे-धीरे वॉल्ट का अभ्यास दोबारा शुरू कराया गया। यह तरीका इसलिए भी जरूरी था, क्योंकि प्रणति पहले 2025 में टखने के दूसरे स्तर के लिगामेंट में चोट का सामना कर चुकी थीं। इसके बावजूद उन्होंने वापसी करते हुए इस साल मई में ताशकंद में अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक महासंघ की विश्व चुनौती कप प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।
चोट से वापसी केवल शारीरिक नहीं होती। प्रणति के लिए अपने शरीर की गतिविधियों पर दोबारा पूरा भरोसा हासिल करना भी बड़ी चुनौती रहा है। उन्होंने बताया कि चोट के बाद वापसी का दौर काफी मुश्किल था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इस दौरान उन्होंने मन को मजबूत रखने के लिए मनोवैज्ञानिकों से भी सलाह ली है।
प्रणति के मुताबिक, उन्हें यह समझने में मदद मिली कि प्रतियोगिता के दबाव के बारे में सोचने के बजाय उस समय किए जा रहे अभ्यास पर ध्यान देना चाहिए। अगर शारीरिक अभ्यास किसी दिन कम भी हो पाए तो वह मन में उसी अभ्यास को दोहराने की कोशिश करती हैं। उनका मानना है कि इस तरह मानसिक तैयारी भी प्रदर्शन का हिस्सा बनती है।
आइची-नागोया में हालांकि प्रणति के सामने आसान चुनौती नहीं होगी। उनके मुताबिक, एशियाई खेलों में एशिया की शीर्ष जिम्नास्ट हिस्सा लेने वाली हैं और इनमें कई ओलंपिक पदक विजेता भी शामिल होंगी। ऐसे मजबूत खिलाड़ियों के बीच एक छोटी गलती भी परिणाम पर असर डाल सकती है।
प्रणति के पास ऊंची कठिनाई वाला त्सुकाहारा 720 वॉल्ट भी है, लेकिन कोच अशोक मिश्रा इसे शुरुआत से ही आजमाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका पहला टारगेट प्रणति को क्वालीफिकेशन के जरिए फाइनल तक पहुंचाना है। इसके लिए साफ और सही उतरने वाले वॉल्ट को प्राथमिकता दी जाएगी।
बता दें कि प्रणति नायक एशियाई कलात्मक जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट हैं। उन्होंने 2019 में उलानबटोर, 2022 में दोहा और 2025 में दक्षिण कोरिया के जेचॉन में पदक जीते हैं। इसके अलावा वह 2024 में काहिरा और 2025 में अंताल्या में विश्व कप की कांस्य पदक विजेता भी रह चुकी हैं। हालांकि, एशियाई खेलों का पदक अभी उनकी उपलब्धियों में शामिल नहीं है।
प्रणति इस बार किसी दूसरी खिलाड़ी से तुलना करने के बजाय खुद के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहती हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगिता में उतरने के बाद वह अपने उतरने, छलांग और शरीर के संतुलन को देखकर तय करेंगी कि किस स्तर का वॉल्ट करना सही रहेगा।
ओलंपिक भी प्रणति के लिए खास महत्व रखता है। 2020 के ओलंपिक में हिस्सा लेना उनके करियर का भावनात्मक पड़ाव रहा है। उन्होंने ओलंपिक के छल्लों का निशान अपने दाहिने हाथ पर गुदवाया हुआ है। 31 साल की उम्र में वह जानती हैं कि जिम्नास्टिक में शीर्ष स्तर पर करियर का समय सीमित होता है, लेकिन उनका लक्ष्य अभी खत्म नहीं हुआ है। प्रणति लॉस एंजिल्स ओलंपिक में एक और बार भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं और उनका कहना है कि जब तक वह फिट रहेंगी, तब तक कोशिश छोड़ने वाली नहीं हैं।
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