Asian Games में Satnam Singh और Salman Khan ने नौकायन में जीता कांस्य पदक

Asian Games में Satnam Singh और Salman Khan ने नौकायन में जीता कांस्य पदक
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नागोया में आयोजित एशियाई खेलों की रोइंग स्पर्धा में भारत के सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुष युगल स्कल्स में कांस्य पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी ने छह मिनट 13.25 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस स्पर्धा में चीन ने स्वर्ण और उज्बेकिस्तान ने रजत पदक जीता।

... फिलेम दीपक सिंह ... नागोया, 24 सितंबर (भाषा)। सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुष युगल स्कल्स में कांस्य पदक जीतकर भारत को एशियाई खेलों की रोइंग (नौकायन) स्पर्धा में पहला पदक दिलाया। भारतीय टीम का प्रदर्शन हालांकि महाद्वीपीय खेलों के इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक रहा।

इस बार भारत का प्रदर्शन 1982, 1994 और 2002 के एशियाई खेलों के बराबर रहा। हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत ने रोइंग में पांच पदक जीते थे, जिनमें दो रजत और तीन कांस्य शामिल थे। भारत ने 2010 में चार पदक जीते थे, जिसमें एक स्वर्ण, जबकि 2018 में तीन पदक हासिल किए थे, जिनमें एक स्वर्ण शामिल था।

सतनाम और सलमान की जोड़ी 1,500 मीटर तक दूसरे स्थान पर थी, लेकिन अंतिम 500 मीटर में तीसरे स्थान पर खिसक गई। उसने नागारागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स पर छह मिनट 13.25 सेकंड का समय निकाला। चीन के यी शूडी और यीदे नी ने छह मिनट 09.37 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता।

उज्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव ने छह मिनट 10.49 सेकंड में रेस पूरी कर रजत पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी स्वर्ण पदक विजेताओं से 3.88 सेकंड पीछे रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांस्य पदक जीतने पर दोनों खिलाड़ियों की सराहना की।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘पुरुष युगल स्कल्स में सतनाम सिंह और सलमान खान का शानदार प्रदर्शन कर भारत के लिए कांस्य पदक जीता। उनका संयम और तालमेल सराहनीय रहा। उम्मीद है कि यह उपलब्धि उन्हें आने वाले वर्षों में और बड़ी ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।’’ सतनाम ने हांगझोउ एशियाई खेलों में पुरुष क्वाड्रपल स्कल्स में भी कांस्य पदक जीता था।

इस पदक के साथ उनके एशियाई खेलों के पदकों की संख्या दो हो गई है। सतनाम ने कहा, ‘‘मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है, क्योंकि भारत ने पुरुष युगल स्कल्स में कभी एशियाई खेलों का पदक नहीं जीता था और अब मैं उस पहले पदक को जीतने वाली टीम का हिस्सा हूं।’’ रोइंग टीम से जुड़े विवाद पर उन्होंने कहा, ‘‘मेरे साथियों के साथ जो हुआ उससे मैं दुखी हूं। हमारे पास बेहतर पदक जीतने का मौका था, लेकिन फैसला हो चुका है और अब इसे बदला नहीं जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ी पुरुष युगल स्कल्स में सिर्फ पांच दिन पहले ही साथ आए थे।

सतनाम ने कहा, ‘‘मुझे गर्व है कि केवल पांच दिन साथ रहने के बाद हम इस स्पर्धा में एशियाई खेलों का पदक जीतने में सफल रहे।’’ बुधवार से शुरू हुई रोइंग प्रतियोगिताओं से दो दिन पहले भारतीय टीम में असंतोष के स्वर उठने लगे थे। कुछ खिलाड़ियों ने दावा किया था कि उन्हें उन स्पर्धाओं से हटा दिया गया, जिनमें उनका पहले चयन हुआ था, जबकि रिजर्व खिलाड़ियों को मुख्य टीम में शामिल कर लिया गया। ये बदलाव सोमवार को विभिन्न देशों के टीम मैनेजरों की बैठक के बाद किए गए थे।

एक खिलाड़ी ने बताया कि टीम से बाहर किए गए या दूसरी स्पर्धाओं में भेजे गए खिलाड़ी ‘‘बहुत परेशान’’ हैं और दिन में हुए घटनाक्रम के बाद उन्होंने खाना तक नहीं खाया। कुछ खिलाड़ियों ने कहा कि वे खेल मंत्री के सामने अपनी शिकायत रखने पर विचार कर रहे हैं। भारतीय नौकायन महासंघ के अध्यक्ष बालाजी मरदापा ने एक पूर्व कोच पर खिलाड़ियों को ‘‘प्रभावित करने’’ का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि तूफान के कारण मौसम खराब होने से रोइंग प्रतियोगिता की अवधि चार दिन से घटाकर दो दिन किए जाने के बाद कोचों ने टीम के हित में क्रू के सदस्यों में बदलाव किया था। भारत रोइंग में एक और पदक से मामूली अंतर से चूक गया। बलराज पंवार पुरुष एकल स्कल्स के फाइनल में छह मिनट 54.80 सेकंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे।

पंवार 500, 1,000 और 1,500 मीटर तक दूसरे स्थान पर थे, लेकिन अंतिम 500 मीटर में वह फिसलकर चौथे स्थान पर पहुंच गए। चीन के देंग झीवेई ने छह मिनट 38.98 सेकंड में स्वर्ण पदक जीता। पंवार उनसे 15.82 सेकंड पीछे रहे।

लाइटवेट पुरुष युगल स्कल्स में रोहित और उज्ज्वल कुमार सिंह की जोड़ी भी चौथे स्थान पर रही, जबकि पुरुष क्वाड्रपल स्कल्स टीम ने पांचवां स्थान हासिल किया। पुरुष एकल स्कल्स में भारत का पिछला एशियाई खेल पदक 2014 के इंचियोन खेलों में आया था, जब सवर्ण सिंह ने कांस्य पदक जीता था। इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग लाल ठक्कर अब तक के इकलौते भारतीय हैं।

उन्होंने 2010 के ग्वांगझोउ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। महिला फोर के फाइनल में भारत की गुरबानी कौर, अलीना एंटो, टेंडेंथोई देवी हाओबिजाम और पूनम की टीम छह मिनट 55.32 सेकंड के समय के साथ छठे स्थान पर रही। वह स्वर्ण पदक जीतने वाली चीन की टीम से 20.45 सेकंड पीछे रही।

लाइटवेट पुरुष एकल स्कल्स के फाइनल बी में अजय त्यागी ने सातवें से 12वें स्थान के वर्गीकरण मुकाबले में सात मिनट 01.54 सेकंड के समय के साथ पहला स्थान हासिल किया। छब्बीस वर्षीय सतनाम का एशियाई खेलों के पोडियम तक पहुंचने का सफर नौकायन से नहीं, बल्कि हैंडबॉल से शुरू हुआ था। वह पहले राष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी थे।

करीब आठ साल पहले उन्होंने ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क से प्रेरित होकर रोइंग शुरू की। विर्क ने 2018 के एशियाई खेलों में पुरुष लाइटवेट युगल स्कल्स में स्वर्ण पदक जीता था। पंजाब के मानसा जिले के रहने वाले सतनाम ने जल्द ही भारत के उभरते रोवर के रूप में अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने 2018 युवा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और आठवें स्थान पर रहे। इसके बाद सतनाम ने 40वीं सीनियर राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप में पुरुष एकल स्कल्स का खिताब जीता। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारतीय नौसेना के पहले रोवर बने।

सतनाम पिछले साल सीनियर एशियाई रोइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पुरुष क्वाड्रपल स्कल्स टीम का भी हिस्सा थे। सलमान ने पहली बार एशियाई खेलों का पदक जीता है। 28 वर्षीय सलमान 2018 में भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप में शामिल हुए और इसी दौरान रोइंग से जुड़े।

कोच सत्यवान, सतीश सिराट और प्रभात मिश्रा की मदद से उनके खेल में सुधार आया और उन्हें केंद्र की टीम के लिए चुना गया। इसके बाद उन्होंने अपनी बटालियन का प्रतिनिधित्व किया और इंटर-सेंटर चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। सलमान ने दो बार रोइंग छोड़ने के बारे में सोचा, लेकिन उनके कोचों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने 2022 के गुजरात राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीता। इसी साल उन्होंने इंडोर राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब भी अपने नाम किया। इसके बाद उन्हें सेना रोइंग नोड (एआरएन) में शामिल किया गया, जहां उन्होंने वरिष्ठ कोच कुदरत अली के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया।

सलमान ने 2023 में सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप और ओपन स्प्रिंट राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) कार्यक्रम में जगह मिली।

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