आखिर आमने-सामने क्यो हैं Apple और Facebook? User privacy या फिर कुछ और वजह है?

आखिर आमने-सामने क्यो हैं Apple और Facebook? User privacy या फिर कुछ और वजह है?

देखने में तो सिर्फ यह लग रहा है कि एप्पल और फेसबुक एक दूसरे को यह बताने के लिए लड़ रहे हैं कि उपयोगकर्ता उनकी सेवाओं का इस्तेमाल कैसे करें। हालांकि यह लड़ाई कोई नई नहीं है। दोनों तकनीक कंपनियों के बीच विवाद लगभग एक दशक से ज्यादा से चल रहा है।

दुनिया की दो बहुराष्ट्रीय कंपनियां आमने-सामने हैं। यह कंपनियां हैं एप्पल और फेसबुक। आलम यह है कि उपभोक्ता की गोपनीयता को लेकर दोनों कानूनी लड़ाई लड़ने जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके पीछे सिर्फ उपभोक्ता की गोपनीयता ही है या फिर कोई और कारण है? फिलहाल यूजर प्राइवेसी सिर्फ कहने के लिए है, असली मुद्दा तो बाजार और पैसा है।

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इन दोनों कंपनियों के बीच विवाद सिर्फ इनका ही भविष्य तय करेंगे। ऐसा नहीं है, बल्कि तकनीक के भी भविष्य पर असर पड़ेगा। हम इन्हें कैसे उपयोग करेंगे, यह भी तय होगा क्योंकि फिलहाल गैजेट्स और एप्स पर पूरी दुनिया फिलहाल निर्भर है। देखने में तो सिर्फ यह लग रहा है कि एप्पल और फेसबुक एक दूसरे को यह बताने के लिए लड़ रहे हैं कि उपयोगकर्ता उनकी सेवाओं का इस्तेमाल कैसे करें। हालांकि यह लड़ाई कोई नई नहीं है। दोनों तकनीक कंपनियों के बीच विवाद लगभग एक दशक से ज्यादा से चल रहा है।

आप यह सोच रहे होंगे कि आखिर हम इसकी बात आज क्यों कर रहे हैं? दरअसल, अब इस मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। एप्पल ने अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करने की घोषणा कर दी है जिसके बाद यह मामला और भी बढ़ गया है। एप्पल अपने आईफोन और आईपॉड जैसे उपकरणों को अपग्रेड करेगा।

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माना जा रहा है कि आईफोन यह अपग्रेडेशन आने वाले दिनों में कर सकता है। इसमें नई सुविधाओं को जोड़ा जाएगा जो उपयोगकर्ताओं को यह बताएगा कि कौन सा एप डाटा इकट्ठा कर रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो एप्पल अपने इस अपग्रेडेशन के जरिए उपभोक्ताओं के डेटा संग्रह करने वाले एप्स को उजागर करेगा। एप्पल ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि आखिर अपग्रेडेशन कैसे काम करेगा। एप्पल के अनुसार यदि कोई ऐप आपकी संपर्क जानकारी, आपका स्थान, आपका वित्तीय विवरण, आपकी खरीदारी, आपकी ब्राउजिंग डीटेल्स जो आप सर्च करते हैं... को ट्रैक कर रहा है तो इसकी जानकारी आपको मिल सकेगी। एप्पल आपको यह भी बताएगा कि कौन सा ऐप आपको ट्रैक कर रहा है और कैसे कर रहा है। कुल मिलाकर कहें तो यह उपयोगकर्ताओं के लिए अच्छी खबर होगी। 

लेकिन यह फेसबुक के लिए अच्छी खबर बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि अब उपयोगकर्ताओं को यह पता चल जाएगा कि फेसबुक क्या ट्रैक कर रहा है। अब फेसबुक को जानकारी हासिल करने के लिए पहले आपकी अनुमति लेनी होगी जो कि इस सोशल साइट के लिए काफी बुरा है। लेकिन इससे भी बुरा यह है कि एप्पल लगातार इसका उदाहरण बना रहा है। दरअसल, एप्पल फेसबुक के नाम का इस्तेमाल कर रहा है जिसमें वह यह बताने की कोशिश कर रहा है कि उसकी नई सुविधाएं कैसे उपयोगकर्ताओं के डाटा चोरी होने को रोक सकती हैं। उपयोगकर्ताओं को अपने स्क्रीन पर यह जानकारी आसानी से मिल जाएगी कि फेसबुक या कोई अन्य एप या वेबसाइट उसकी गतिविधियों को ट्रैक कर रहा है। उपयोगकर्ताओं को इनमें दो विकल्प दिए जाएंगे पहला है ट्रेकिंग की अनुमति दें या उसे अस्वीकार करें। 

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इसका मतलब साफ है कि एप्पल फेसबुक के डेटा संग्रह के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर चुका है। लेकिन ऐसा नहीं है कि एप्पल उपयोगकर्ताओं की सेवा कर रहा है। वास्तव में एप्पल इसी बहाने बिजनेस प्लान तैयार कर रहा है जो कि उसकी मदद कर सकता है। एप्पल के सीईओ टिम कुक ने भी इसके बारे में जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने फेसबुक का उल्लेख नहीं किया। लेकिन उन बिजनेस  प्लान्स की आलोचना जरूर की जिसे वर्षों से फेसबुक आगे बढ़ा रहा है। एप्पल फिलहाल कॉरपोरेट लड़ाई लड़ रहा है। 

फेसबुक पलटवार कर रहा है। हालांकि यह बात भी है कि जो भी इस लड़ाई को जीतेगा वह उपयोगकर्ताओं के लिए शर्तें तय करेगा। पिछले दिनों फेसबुक ने अमेरिकी अखबारों में एप्पल के खिलाफ विज्ञापन छपवाए थे। पहले तो फेसबुक ने अखबारों के पहले पन्ने के जरिए एप्पल की आलोचना की और अब वह उसे अदालत में घसीटना चाहता है। 

फेसबुक फिलहाल मुकदमे की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक ने इसके लिए बाहर से कानूनी परामर्शदाता भी बुला लिया है। माना जा रहा है कि यह मुकदमा एप्स्टोर के बारे में हो सकता है। इसे फेसबुक की प्रतिस्पर्धा विरोधी कार्रवाई कहा जा सकता है। फेसबुक ने एप्पल पर यह भी आरोप लगाया है कि वह अपने एप्स को ज्यादा महत्व देता है। एप्पल फेसबुक जैसे बाहर के डेवलपर्स को प्रतिबंधित कर रहा है। हालांकि मामला अदालत में पहुंचने से पहले फेसबुक ने इंटरनेट पर एप्पल के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी है। 

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फेसबुक ने इसके लिए एक वेबसाइट बनाई है जिसका नाम उसने एप्पल रखा है। उसे छोटे व्यवसायियों का समर्थन हासिल हो रहा है जो एप्पल के सॉफ्टवेयर अपडेट होने की वजह से चिंता व्यक्त कर रहे हैं। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने खुद एप्पल के खिलाफ लड़ाई में आगे आए हैं। हाल में ही जुकरबर्ग ने वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह एप्पल को फेसबुक का सबसे बड़े प्रतियोगी के रूप में देखते हैं। एप्पल की आई मैसेज, आईफोन स्पेसिफिक टेस्टिंग सर्विस को जुकरबर्ग ने फेसबुक की सोशल नेटवर्किंग सेवाओं के लिए खतरा माना है। फेसबुक और एप्पल अमेरिका के दो मूल्यवान बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं। एक सोशल नेटवर्किंग साइट में अव्वल है तो दूसरी इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाती है। प्रत्यक्ष रूप से देखे तो दोनों प्रतिस्पर्धी तो नजर नहीं आते हैं लेकिन वर्तमान में इनके बीच जो कुछ भी हुआ है उससे अब यह आपस में दुश्मन नजर आते हैं।