हिमाचल प्रदेश में नाहन और रेणुका की सैर करके खुश हो जाएंगे

By संतोष उत्सुक | Publish Date: Jul 13 2018 11:49AM
हिमाचल प्रदेश में नाहन और रेणुका की सैर करके खुश हो जाएंगे

अस्त व्यस्त जीवन से कभी भाग निकलो तो प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों पर गाड़ियों से लदी सड़कें, लोगों के झुंड मिलते हैं। आज ऐसी जगह चलते हैं जहां इतने लोग आते हैं कि सहजता से मज़ा ले सकें।

अस्त व्यस्त जीवन से कभी भाग निकलो तो प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों पर गाड़ियों से लदी सड़कें, लोगों के झुंड मिलते हैं। आज ऐसी जगह चलते हैं जहां इतने लोग आते हैं कि सहजता से मज़ा ले सकें। हिमाचल प्रदेश के ज़िला सिरमौर के मुख्यालय नाहन से शिमला रोड़ पर नौ किमी दूर दोसड़का से सड़क दाएं तरफ रेणुका ले जाती है। चढ़ती सड़क से नाहन शहर व अड़ोस-पड़ोस का विहंगम नज़ारा आनंद देता है। बादलों के हुजूम पहाड़ियों की तलहटी से निकल कर मीलों तक उगे रहते हैं। थोड़ा आगे जमटा है जहां महंगे रिर्सोटस और दूसरी आरामगाहें भी हैं जहां सप्ताहांत में दूर से आने वालों की एडवांस बुकिंग रहती है। रूकेंगे तो भूलेंगे नहीं। 
 
सर्पीला रास्ता दिलकश कुदरत और झील 
जमटा से सड़क उतरती है। सर्पीले रास्ते पर पहाड़ी गांव, सीढ़ीनुमा खेत, स्वास्थ्य वर्धक चीड़ के वृक्षों की ताज़ा हवा, खूब पेड़ पौधे लुभाते हैं। कई जगह हिमाचल पर्यटन विभाग की होम स्टे योजना के तहत रुकने के लिए कमरे व टैंट उपलब्ध हैं। बाबा बडोलिया आकर्षक स्टॉपेज है। पुराने पुल के एक तरफ मंदिर, ऊपर पहाड़ी से गिरता मौसमी झरना, दूसरी तरफ बहती पहाड़ी नदी, पड़ोस में छोटे छोटे खेत। आगे फिर एक पुल है। स्वादिष्ट आम का बाग है। लीजिए ददाहू आ गया। यहां ठहरने के लिए किसान भवन, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, प्राइवेट गेस्ट हाउस, रेस्तरां व होटल उपलब्ध हैं। ददाहू से निकल पुराना पुल पार कर परंपराओं व रीति रिवाज़ों के इलाके गिरीपार में बसी रेणुका झील पहुंचते हैं। हिमाचल की सबसे बड़ी, एशिया की प्राकृतिक झीलों में इस दो किलोमीटर से ज़्यादा बड़ी ओवल आकार झील की विशेष पहचान रही है। समुद्र तल से 672 मीटर ऊंचाई पर पसरी झील में उछलती फुदकती महाशीर मछलियां सभी के साथ दिल का रिश्ता कायम कर लेती हैं। यहां मछली पकड़ना और मांसाहार करना वर्जित है।
 


खुशनुमा लम्हे 
ठहरने के लिए हिमाचल पर्यटन निगम का होटल रेणुका (शाकाहारी) व पुराना खूबसूरत विश्राम गृह है। नज़ारा लाजवाब है। झील के सानिध्य में रात बिताई जाए और रात चांदनी में लिपटी हो तो प्रियजनों के साथ बिताया वक़्त यादगार बन जाता है। अपने आप से भी खुलकर मिल सकते हैं। पक्षियों का कलरव जब आपकी सुबह को नींद से बाहर लाएगा और लान में बैठकर झील के ठहरे पानी को अपनी उनींदी आँखों से छूते हुए चाय का स्वाद लेंगे तो आप यहां के एकाकीपन में फिर आने का वादा अपने आप से करेंगे।  
 
ऐतिहासिक, धार्मिक व पौराणिक रेणुका
झील किनारे मंदिरों की श्रृंखला है। रेणुका जमदग्नि ऋषि की पत्नी थीं और महा पराक्रमी परशुराम की माता। उन्हें किसी कारण पिता के आदेश पर माता रेणुका का सिर काटना पड़ा, फिर वर मांगकर जीवनदान भी प्राप्त कर लिया। झील को त्रेतायुग में राम सरोवर कहते थे, फिर रेणुका स्मृति में रेणुका कहा जाने लगा। ऊंचाई से देखने पर कभी यह झील महिला आकार की लगती थी मगर बढ़ रही गाद ने इसे सिकोड़ दिया है हालांकि मां प्रकृति ने इसकी सुंदरता को काफी हद तक बरकरार रखा है। मनोरम झील के पड़ोस में अनेक किस्म के प्रवासी परिंदे सर्दी के मौसम में हर बरस आते हैं। उनके यहां ठहरने से पर्यावरण और गुलजार हो उठता है। विशेषकर बाल पर्यटकों व वाइल्ड लाइफ प्रेमियों के लिए मेहमान पक्षी आकर्षण का केन्द्र बन जाया करते हैं। झील परिक्रमा पैदल करें तो उन्मुक्त प्राकृतिक आनंद मिलता है वैसे अब बैटरी चालित वाहन भी उपलब्ध हैं। रेणुका से पांच किमी दूर जामू कोटी पर्वत पर जमदग्नि ऋषि का मंदिर, पुराना हवन कुंड, तपस्या स्थल व गुफांए वगैरा आस्थाप्रेमियों के लिए आर्कषण हैं। यहीं से हर बरस कार्तिक एकादशी को चांदी की पालकी में, मूर्ति रूप भगवान परशुराम, माता रेणुका से मिलने, कई दिन चलने वाले मेले में पधारते हैं। 
 


रेणुका वैट लैंड व दिलकश पड़ोस 
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने राष्ट्रीय वैटलैंड प्रबन्धन समिति की सिफारिशों पर रेणुका झील को सन 1998 में देश के चयनित 16 वैटलैंडस में शामिल किया है। झील के आसपास का 402 हैक्टेयर क्षेत्र घोषित वन्यप्राणी शरण्य है। रेणुका संगड़ाह सड़क पर धनोई में मनोरम झरना है। इठला कर गिरते, सभी को रोकते जल प्रपात का पानी खनिजयुक्त, मीठा, स्वादिष्ट, कहिए असली मिनरल वाटर है। फर्न, रंग बिरंगे फूल झरने को और दिलकश बनाते हैं। इसी क्षेत्र में रेणुका डैम भी प्रस्तावित है जहां से दिल्ली को पानी भेजा जाएगा। 
 
कैसे पहुंचें 
रेणुका दिल्ली से 285, चंडीगढ़ से 127, शिमला से 162, नाहन से 37 किलोमीटर है। रेणुका बस, कार या टैक्सी से जा सकते हैं।  


 
नई जगह जाकर नए अनुभव, नया आनंद जीवन में आता है। तो आइए, रेणुका आपकी प्रतीक्षा में है।
 
-संतोष उत्सुक

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