विश्व तंबाकू निषेध दिवसः सावधान! तंबाकू एक भयंकर विष है

विश्व तंबाकू निषेध दिवसः सावधान! तंबाकू एक भयंकर विष है

अकेले भारत में ही प्रतिवर्ष 6 लाख से ज्यादा मौतें तंबाकू के सेवन से होती हैं। तंबाकू के सेवन से मुख का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, लिवर का कैंसर इत्यादि के मरीजों में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। एक सर्वे के अनुसार 40 फीसदी कैंसर का कारण मात्र तंबाकू का प्रयोग है।

तंबाकू एक ऐसा नशा है जिसे कई रूपों में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे बीड़ी, सिगरेट, जर्दा, हुक्का, खैनी, तलब, पान मसाला, चुटकी, गुटका इत्यादि अनेकों रूपों व नामों से यह जानलेवा विष बिकता है। तंबाकू विष इसलिए हैं, क्योंकि इसके अंदर एक महाभयंकर विष पाया जाता है, जिसे निकोटीन कहा जाता है। निकोटीन संख्याँ (एक प्रकार का तीव्र ज़हर) से भी तीव्र विष है, जो मनुष्य पर धीमे-धीमे असर करते हुए, उसका प्राणांत करता है। अगर निकोटीन की एक बूंद खरगोश की त्वचा पर डाल दी जाए, तो उसकी तत्काल मृत्यु हो जाती है। कुछ समय पहले निकोटीन, चीन में आत्महत्या करने का सुगम साधन बन गया था। वहाँ के लोग जीवन से तंग आकर, हुक्के का सड़ा हुआ पानी पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लिया करते थे।  इसको अमेरीकन हर्ब के नाम से भी बुलाया जाता है। विश्व सेहत संगठन की ओर से तंबाकू रोधक दिवस 31 मई को मनाया जाता है। इस दिन तंबाकू से होने वाले नुकसान व रोकथाम हेतु जागरुकता के रूप में मनाया जाता है।

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अकेले भारत में ही प्रतिवर्ष 6 लाख से ज्यादा मौतें तंबाकू के सेवन से होती हैं। तंबाकू के सेवन से मुख का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, लिवर का कैंसर इत्यादि के मरीजों में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। एक सर्वे के अनुसार 40 फीसदी कैंसर का कारण मात्र तंबाकू का प्रयोग है। तंबाकू के अंदर 4000 से भी ज्यादा घातक रासायण पाए जाते हैं। निकोटीन, नाइट्रोज़न योगिकों को मनुष्य की सेहत के लिए, सबसे ज्यादा हानिकारक बताया गया है। इसके ज़हरीले अंश दिल, दिमाग, गुर्दे, लिवर, श्वांस तंत्र, प्रजनन तंत्र पर बुरा असर डालते हैं। निकोटीन दिल की गति व ब्लड प्रैशर को बढ़ाता है। इसके प्रयोग से दिल के दौरे की संभावना बढ़ जाती है। यही नहीं तंबाकू के प्रयोग से नस-नाडि़यां सिकुड़ जाती हैं। जिसके परिणामस्वरूप दिमाग की नाड़ी फटने का खतरा बढ़ जाता है।

यही पर इसके अंदर पाए जाने वाले विषाक्त पदार्थों का अंत नहीं हो जाता अपितु इसके धुएँ में तारकोल जैसा केमीकल ‘टार’ भी पाया जाता है, जिसमें बैंजोपाईरीन शामिल है। बैंजोपाईरीन कैंसर के घातक एजेंटों में एक है। इसके अलावा यह मनुष्य के फेफड़ों में जमकर दमा, खांसी (स्मोकरस कफ), श्वसन संबंधी जटिल रोगों की उत्पत्ति करता है। पेट के माहिर डाक्टर बताते हैं कि तंबाकू पीने वालों की पेट की भीतरी कोमल त्वचा पर अंदरुनी गोल-गोल दाग पड़ जाते हैं। रक्त पतला होकर कमजोर हो जाता है। तंबाकू के विष के प्रभाव से हृदय की आवरणात्मक त्वचा सुन्न हो जाती है। व हृदय की स्वाभाविक धड़कन में विकार उत्पन्न होकर एक प्रकार का प्रकंपन शुरू हो जाता है। इस प्रकार हृदय रोग तंबाकू की विशेष देन है।

अधिक धूम्रपान करने वालों के फेफड़े सड़ जाते हैं। तंबाकू मस्तिष्क को निष्क्रिय करता है। इसका विष नशेड़ी के फेफड़ो व दिल पर धावा बोल देता है। एक सिगरेट में जितना तंबाकू होता है, उससे दो मनुष्यों की जान ली जा सकती है। भयंकर विषधर सर्प तंबाकू के विष से, इस प्रकार मारे गए मानो उन पर भयंकर गाज गिर गई हो। तंबाकू का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव मनुष्य के रक्त पर पड़ता है। तंबाकू के विषैले कण फेफड़ों और हृदय में पहुँचकर, मानव के रक्त को विषाक्त, विकारयुक्त व निर्बल बना देता है। जब यह विषैला रक्त निरंतर रक्त वहनियों में प्रवाहित होता रहता है, तो धीरे-धीरे पूरे नाड़ी तन्त्र को विकारयुक्त कर मनुष्य को रोगी बना देता है। 

इसलिए हमारे धार्मिक शास्त्र भी हमें इन मादक पदार्थों के सेवन से वर्जित करते हैं। विष्णु पुराण में बताया गया है कि तंबाकू पीने से गरीबी, दुःख, तामसवृत्तियों में बढ़ोतरी होती है- ‘तमाल भक्षितयेन संगच्छेनरकार्णवे’। पद्म पुराण में भी मनुष्य को जागरूक करते हुए कहा गया है-

धूम्रपानरतं विप्र दानं कुर्वन्ति ये नराः। 

दातारो नरकं यान्ति ब्राह्मणो ग्रामशूकरः।। 

जो मनुष्य धूम्रपान करने वाले ब्राह्मण को दान देते हैं, वे नरक के भागी बनते हैं एवं लोगों से दान ग्रहण करने वाला, वह ब्राह्मण शूकर की योनि को प्राप्त होता है। 

COTPA -Cigarettes and Other Tobacco Products Act, 2003 एकट के अधीन तंबाकूनोशी रोकने हेतु विभिन्न धाराएँ अस्तित्व में लाईं गईं हैं। जिनके तहत धारा 4 के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने की सख्त मनाही है, जैसे शापिंग माल, रैस्ट्रोरेंट, बस, रेल, हवाई अड्डा लाऊंज, सिनेमा हॉल, आफिस, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल इत्यादि। जो इस कानून का उल्लंघन करता है, उसे 200 रुपए तक के जुर्माने का प्रावाधान है।

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धारा 5 के अधीन किसी भी तंबाकू उत्पाद के प्रचार, प्रायोजन, इश्तिहारबाज़ी, आडियो, वीडियो एवं प्रिंट मीडिया सभी प्लेटफार्मो पर इश्तिहारबाज़ी करने की मनाही है। जो इस विधान का अतिक्रमण करता है, उसे जुर्माना व सज़ा का प्रावाधान है। 

धारा 6ए के अधीन 18 साल से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू बेचने व खरीदने की मनाही है। धारा 6बी के अनुसार शैक्षणिक संस्थाओं के 100 गज़ के घेरे में तंबाकू उत्पादों को बेचना संगीन अपराध है। हुक्का बार के लिए 50 हज़ार का जुर्माना व 3 साल की सज़ा, ई-सिगरेट के लिए 50 हज़ार का जुर्माना व 6 साल की सज़ा हो सकती है। 

तंबाकूनोशी रोकने के लिए भारतीय दंड विधान की धारा 278 के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर इसका प्रयोग करना वर्जिन व सज़ा योग्य अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 1 मई 2004 को सार्वजनिक स्थानों पर सिगरटनोशी करने पर प्रतिबंध लगाया है। लेकिन फिर भी इस कानून की शरेआम धज्जि़यां उड़ाई जा रही हैं। 

WHO के आंकड़ों के अनुसार हर साल तकरीबन 6 मिलीयन से ज्यादा लोगों की मौत का कारण तंबाकू सेवन बनता है। अगर यही हाल रहा तो 2030 तक यह संख्या 8 मिलीयन तक बढ़ जाएगी। तंबाकू सेवन के कारण हर 6 सैंकिड में एक मौत होती है। ग्लोबल तंबाकू सेवन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में तंबाकू उपभोगताओं की गिनती 274.9 मिलीयन है यद्यपि 163.8 मिलीयन धुआं रहित तंबाकू उपभोगी हैं। 68.9 लाख लोग सिर्फ सिगरेटनोशी करते हैं एवं 42.4 उपभोगी स्मोकिंग व गैर-स्मोकिंग दोनों तरह के पदार्थों का प्रयोग करते हैं। जिसके चलते भारत की स्थिति बहुत बुरी है। इसके अनुसार भारत में 35% बालिग (47-9% पुरुष व 20-3% महिलाएँ) तंबाकू का विभिन्न माध्यमों से सेवन करते हैं। गैर स्मोकिंग तंबाकू का प्रयोग (21%) भारत में बहुत ही प्रचलित है। 

सेहत विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू उत्पादों को सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है। जिसके चलते इसके व्यसनी कोरोना वायरस से ज्यादा जल्दी पीडि़त हो जाते हैं। इसलिए आएँ तंबाकू निरोधी दिवस पर इस घातक व्यसन को छोड़ने का शुभ संकल्प धारण करें व कोरोना महामारी से बचने के योग्य बनें।

- सुखी भारती