तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करता है ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’

तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करता है ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’

तंबाकू एक प्रकार की फसल है, दुनियाभर की कई जगहों पर इसकी खेती की जाती है। इसके पत्तों पर उच्च मात्रा में नशीला पदार्थ पाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तंबाकू का नशा मौत का खतरा भी बन सकता है, ऐसे में आपका इससे दूर रहना ही भला है।

स्वास्थ्य है तो जीवन है और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी है अच्छा खान-पान, आदर्श दिनचर्या, उचित व्यायाम और अच्छी समझ। गलत खान-पान और गलत दिनचर्या तो मानव सेहत की दुश्मन है ही इसके अलावा एक गलत आदत भी जो आजकल बहुत लोगों में देखी जा रही है सेहत के लिए काफी खतरनाक है वह है तंबाकू की आदत जो धीरे-धीरे एक नशे का रूप ले लेती है और फिर इससे स्वास्थ्य को होता है भारी नुकसान।

तंबाकू एक प्रकार की फसल है, दुनियाभर की कई जगहों पर इसकी खेती की जाती है। इसके पत्तों पर उच्च मात्रा में नशीला पदार्थ पाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तंबाकू का नशा मौत का खतरा भी बन सकता है, ऐसे में आपका इससे दूर रहना ही भला है। तंबाकू को आमतौर पर लोग पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटके के जरिए या कोरा भी खाते हैं।

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सेहत पर तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दुनिया भर में हर वर्ष 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) द्वारा 1987 की गई थी। पहली बार इसे 7 अप्रैल 1988 को WHO की वर्षगांठ पर मनाया गया था। ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ पर कई अभियानों  के जरिए सेहत पर तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभावों और इसके जानलेवा खतरों के प्रति लोगों को सचेत किया जाता है। 

‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ हर साल एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। पिछले वर्ष 2020 में इसकी थीम ‘युवाओं को इंडस्ट्री के हथकंडे से बचाना और उन्हें तंबाकू और निकोटिन के सेवन से रोकना है’ रखी गई थी वही वर्ष 2021 में ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’  तंबाकू ‘छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध’ (Commit to Quit) थीम पर मनाया जाएगा। 

सवाल उठता है जिन्हें तंबाकू की आदत पड़ चुकी है, तंबाकू छोड़ने के लिए वह क्या करें ? विशेषज्ञों के अनुसार कुछ तरीके है जिनसे यह आदत छोड़ी जा सकती है। 

- तंबाकू छोड़ने के लिए स्वयं की इच्छाशक्ति बहुत मजबूत होनी चाहिए। अपना निर्णय पर हर हाल में कायम रहें।

- देखने में आया है कि तंबाकू खाने वालों को हमेशा कुछ चबाते रहने की आदत हो जाती है, इसके लिए वह तंबाकू की जगह सोंफ या इलायची चबा सकते हैं। 

- तंबाकू छोड़ने का निर्णय लिया है तो यह बात अपने मित्रों या परिवार के लोगों को बता दें ताकि तंबाकू की आदत छोड़ने में वे आपकी मदद कर सकें, इसके लिए वे आपको तुरंत टोकें, याद दिलाएं। 

- ऐसे लोगों के बीच रहें जो तंबाकू न खाते हों और वो न चाहते हों कि उनके आसपास कोई तंबाकू खाए या धूम्रपान करे। 

- धूम्रपान की तरफ आपका ध्यान न जाए इसके लिए स्वयं को योग, कसरत, बागवानी जैसे कामों में व्यस्त रखें। 

- शहद खाएं इसमें ऐसे विटामिन, एंजाइम और प्रोटीन होते हैं, जो स्मोकिंग छोड़ने में आपकी मदद कर सकते हैं।

- विटामिन सी से भरपूर फल संतरा, अमरूद, आवंला, नीबू, अनानास भी तंबाकू छोड़ने में मदद कर सकते हैं। तंबाकू में निकोटिन होता है और विटामिन सी निकोटिन से शरीर को डिटॉक्स कर उसकी तलब कम करता है।

डॉक्टर्स के अनुसार धूम्रपान से कैंसर का खतरा होता है। यह बात तंबाकू और सिगरेट की डिब्बियों पर भी चेतावनी के रूप में लिखी होती हैं, किन्तु आश्चर्य कि इसके बावजूद भी लोग इसे लेने में नहीं हिचकिचाते। धूम्रपान करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो जाती है। 

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक तंबाकू की वजह से दुनिया भर में हर साल लगभग 8 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है। दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा आँकड़ा फेफड़े के कैंसर का है, इसमें 80 प्रतिशत मौतें धूम्रपान की वजह से होती हैं। 

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धूम्रपान करने वालों को दिल के दौरे का जोखिम दूसरों की तुलना में तीन गुना अधिक होता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के आंकड़ों के मुताबिक भारत में सभी तरह के जितने भी कैंसर मरीज हैं उनमें से 30 फीसदी में कैंसर की वजह तम्बाकू है।  

गौरतलब है कि भारत में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम ‘कोटपा एक्ट 2003’ देश भर में लागू है, यह अधिनियम  बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों से लोगों को बचाने के लिए लाया गया है। इस अधिनियम में तंबाकू पर अंकुश लगाने के लिए पांच प्रमुख धाराएं निर्धारित की गई हैं जिसकी पालना देश में प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। 

धारा-4  बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रेलवे प्रतीक्षालय, न्यायालय, शैक्षणिक संस्थान, कैंटीन, कैफे, क्लब, होटल, रेस्टोरेंट आदि पर धूम्रपान पर पूरी तरह से रोक है। सरकारी निजी क्षेत्र के सार्वजनिक स्थलों पर नो स्मोकिंग जोन का साइन बोर्ड लगा होना चाहिए। 

धारा-5  सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन, प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने पर रोक है। सांस्कृतिक समारोह या खेल के जरिए तंबाकू उत्पाद कंपनियां प्रमोशन नहीं कर सकतीं हैं। उल्लंघन करने पर एक हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की सश्रम कैद या दोनों का दण्ड मिल सकते हैं।

धारा-6  सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों को 18 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा बेचे जाने पर पूरी तरह रोक का प्रावधान किया है।

धारा-6बी  शैक्षणिक संस्थाओं से 100 गज की दूरी में सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक है। इस दायरे में कोई भी इस तरह के उत्पाद नहीं बेच सकता। 

धारा-7  सिगरेट-गुटखा व अन्य तम्बाकू उत्पादों के रैपर पर 85 फीसद हिस्से में इसके सेवन से होने वाली बीमारी की चित्रित चेतावनी और भय पैदा करने वाली तस्वीर लगाना अनिवार्य है। 

आज 31 मई ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ है, कोविड के चलते हालांकि कोई सार्वजनिक कार्यक्रम तो आयोजित नहीं किया जा सकता किन्तु वर्चुअल रूप से No Tobacco  संदेश तो लोगों के समक्ष पहुंचाया जाएगा। कोविड के कारण इन दिनों वैसे भी दुनिया सेहत के महत्व को समझ ही चुकी है तो तंबाकू जैसी चीजों को तो अपने से दूर किया ही जा सकता है जो स्वास्थ्य के लिए अत्याधिक हानिकारक हैं। 

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ने के 12 घंटे बाद खून में कार्बन मॉनोऑक्साइज का लेवल घटना शुरू हो जाता है और 2 से 12 हफ्तों में खून के प्रवाह और फेफड़ों की क्षमता बढ़ जाती है। इसे छोड़ने से मुंह, गले, फेफड़ों के कैसर का खतरा कम होता है। 

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आइए संकल्प लें कि तंबाकू से तौबा करनी है और कोई अन्य व्यक्ति जो ऐसा करता है उसे इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।

- अमृता गोस्वामी