बहुत पुराना है हिंदू धर्म का इतिहास, मिस्र में मिला 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर

बहुत पुराना है हिंदू धर्म का इतिहास, मिस्र में मिला 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर

हाल ही में मिस्र की राजधानी काहिरा में 4500 साल पुराने सूर्य मंदिर की खोज की गई है। मिस्र की राजधानी काहिरा के दक्षिण में मौजूद अबु गोराब शहर के रेगिस्तान में कुछ पुरातत्वविद खुदाई कर रहे थे। खुदाई के दौरान उन्हें प्राचीन सूर्य देव के मंदिर के अवशेष मिले।

हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे पुराना और तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। हिन्दू धर्म दुनिया में चारों तरफ फैला हुआ है। हाल ही में मिस्र की राजधानी काहिरा में 4500 साल पुराने सूर्य मंदिर की खोज की गई है। मिस्र की राजधानी काहिरा के दक्षिण में मौजूद अबु गोराब शहर के रेगिस्तान में कुछ पुरातत्वविद खुदाई कर रहे थे। खुदाई के दौरान उन्हें प्राचीन सूर्य देव के मंदिर के अवशेष मिले। मिस्र के पुरातत्वविदों का मानना है कि यह पिछले दशकों की सबसे बड़ी खोज है।

माना जा रहा है कि इस सूर्य मंदिर का निर्माण फैरोह द्वारा किया गया था। यह भी माना जा रहा है कि यह मंदिर 4500 साल पहले बने छह सूर्य मंदिरों में से एक है। मिस्र में अब तक सिर्फ दो ही प्राचीन सूर्य मंदिरों की खीज की गई है। पुरातत्वविदों की माने तो मंदिरों का निर्माण तब किया गया था जब पांचवें राजवंश के फैरोह जिन्दा थे। उन्हें भगवान का दर्जा देने के उद्देश्य से इन मंदिरों का निर्माण करवाया गया था। दूसरी तरफ मिस्र में फैरोह के मरने के बाद उनकी कब्र यानि पिरामिड बनवाए गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगले जन्म में उन्हें देवताओं के रूप में पुनर्जीवित किया जाए। 

मिस्र के पुरातत्व इलाके के उत्तर में खुदाई करने वाले विशेषज्ञों अबुसीर को इन मंदिरों के बारे में पता चला। ऐसा माना जा रहा है कि हाल ही में खोजा गया सूर्य मंदिर मिस्र के फैरोह और पुराने साम्राज्य काल के दौरान पांचवें राजवंश के छठे शासक न्यूसिरी इनी द्वारा बनाया गया था। न्यूसिरी इनी ने 25वीं शताब्दी ईसा पूर्व में लगभग 30 वर्षों तक शासन किया था। विशेषज्ञों ने अनुसार, टेलीग्राफ की रिपोर्टों से पता चलता है कि मंदिर की मूल संरचना "काफी प्रभावशाली" थी।

पोलैंड के वारसॉ में विज्ञान अकादमी में इजिप्टोलॉजी के सहायक प्रोफेसर डॉ मासिमिलियानो नुज़ोलो ने कहा कि हम जानते थे कि नुसेरे के पत्थर के मंदिर के नीचे कुछ है, लेकिन हम यह नहीं जानते थे कि यह इसी मंदिर का ही कोई भाग है या एक नया मंदिर है। मिस्र में हुई इस खोज को नई नेशनल ज्योग्राफिक डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ "लॉस्ट ट्रेज़र्स ऑफ़ मिस्र" में दिखाया गया था।






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