जानिए भारत ने अंतरिक्ष में कब भेजा था मंगलयान, क्या बोलता है आज का इतिहास ?

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 5, 2019   11:20
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जानिए भारत ने अंतरिक्ष में कब भेजा था मंगलयान, क्या बोलता है आज का इतिहास ?
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से अपने पीएसएलवी के माध्यम से इसे प्रक्षेपित किया।

नयी दिल्ली। देश के अंतरिक्ष विज्ञान इतिहास में पांच नवंबर का दिन एक खास उपलब्धि के साथ दर्ज है। भारत ने 5 नवंबर, 2013 को अपना पहला मंगलयान सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में रवाना किया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से अपने पीएसएलवी के माध्यम से इसे प्रक्षेपित किया।

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इसके साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने एक नया अध्याय लिख दिया। इसके साथ ही भारत मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और पहले प्रयास में ही पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना। सबसे कम लागत में तैयार यह अंतरिक्ष यान 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचा। भारत से पहले अमेरिका, रूस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगल की कक्षा में प्रवेश करने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। देश दुनिया के इतिहास में पांच नवंबर की तारीख में दर्ज अन्य प्रमुख घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-

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  • 1556: पानीपत की दूसरी लड़ाई में बैरम खान की हार के बाद भारत में मुगल ताकत बहाल।
  • 1914: फ्रांस और ब्रिटेन ने तुर्की के खिलाफ युद्ध छेड़ा। इससे पहले विश्व युद्ध का दायरा बढ़ा। 
  • 1930: सामाजिक आलोचक सिंक्लेयर लुइस ने साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीता। वह यह सम्मान हासिल करने वाले पहले अमेरिकी बने।
  • 1940: फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट अभूतपूर्व रूप से तीसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए।
  • 1956: मिस्र और इस्राइल की सेनाओं के बीच स्वेज नहर के आसपास संघर्ष के दौरान ब्रिटेन और फ्रांस की सेनाएं मिस्र पहुंचीं।

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  • 1994: जार्ज फोरमैन ने माइकल मूर को हराकर 45 वर्ष की आयु में विश्व हेवीवेट चैंपियन का खिताब जीता। 
  • 2006: सद्दाम हुसैन को मानवता के खिलाफ अपराधों पर मौत की सजा सुनाई गई।
  • 2013: भारत ने पहले मंगल अभियान की शुरूआत की। पहले ही प्रयास में देश का मंगलयान अपने मिशन में सफल हुआ।







Unlock 5 के 58वें दिन SC ने कहा, राजनीति से ऊपर उठकर कोरोना पर काबू पाने के लिये करने होंगे कठोर उपाय

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 27, 2020   21:40
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Unlock 5 के 58वें दिन SC ने कहा, राजनीति से ऊपर उठकर कोरोना पर काबू पाने के लिये करने होंगे कठोर उपाय
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हरियाणा में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण से 29 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद इस खतरनाक संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,345 हो गई। वहीं संक्रमण के 2,135 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,28,746 हो गई।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि पर अंकुश पाने के लिये राज्यों को राजनीति से ऊपर उठना होगा और कठोर उपाय करने होंगे क्योंकि हालात बद से बदतर हो गये हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि देश में कोविड-19 के प्रबंधन के बारे में नीतियों, दिशा निर्देश और मानक हैं लेकिन प्राधिकारियों द्वारा इन पर अमल के प्रति ढिलाई है और इस मसले से निबटने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा, ‘‘यही समय कठोर कदम उठाने का है अन्यथा केन्द्र सरकार के सारे प्रयास व्यर्थ हो जायेंगे।’’ पीठ ने महामारी की नई लहर के पहले से कहीं ज्यादा ‘भयावह’ होने के बारे में केन्द्र द्वारा न्यायालय को अवगत कराये जाने पर यह टिप्पणी की। पीठ अस्पतालों में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के समुचित इलाज और शवों को गरिमामय तरीके से उठाने के बारे में स्वत: संज्ञान लिये गये मामले की सुनवाई कर रही थी। सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दिशा निर्देशों और दूसरे मानकों पर सख्ती से अमल किया जाये क्योंकि ‘‘यह लहर पहली वाली लहरों से कहीं ज्यादा भयावह लग रही है।’’ मेहता के इनकथन को नोट करते हुये पीठ ने कहा, ‘‘फिर तो सख्त कदम उठाने की जरूरत है। चीजें बद से बदतर रही हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। राज्यों को राजनीति से ऊपर उठना होगा। सभी राज्यों को इससे निबटने के लिये आगे आना होगा।’’ पीठ ने कहा, ‘‘अब कठोर कदम उठाये जाने की जरूरत है। यह सख्त उपाय करने का उचित समय है। इसके लिये नीतियों, दिशा निर्देश और मानक हैं लेकिन सख्ती से अमल नही हो रहा है। इन पर अमल करने की कोई इच्छा शक्ति ही नहीं है।’’ मेहता ने जब यह कहा कि राज्यों को स्थिति से निबटने के उपायों को सख्ती से लागू करना होगा तो पीठ ने कहा, ‘‘जी हां, अन्यथा केन्द्र सरकार के पर्याप्त व्यर्थ हो जायेंगे।’’ सालिसीटर जनरल ने कहा, ‘‘यह ‘मैं’ बनाम ‘वे’ नहीं हो सकता। इसे ‘हम’ होना पड़ेगा।’’ इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘हम समारोह और जुलूस के आयोजन को देख रहे हैं जिनमें 60 प्रतिशत लोगों के पास मास्क नहीं है और 30 प्रतिशत के मास्क उनके चेहरे पर लटके हुये हैं।’’ मेहता ने पीठ से कहा कि कोविड-19 की मौजूदा लहर पहले से अधिक कठोर प्रतीत हो रही है और इस समय देश में महाराष्ट्र, केरल और दिल्ली सहित 10 राज्यों का कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में 77 प्रतिशत तक योगदान है। न्यायालय इस मामले में अब एक दिसंबर को आगे विचार करेगा। न्यायालय ने 23 नवंबर को केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों कोस्थिति रिपोर्ट पेश कर यह विस्तार से बताने का निर्देश दिया था कि वर्तमान के कोरोना वायरस संबंधी हालत से निपटने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा था कि महाराष्ट्र में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हुई है, ऐसे में अधिकारियों को कदम उठाने होंगे तथा दिसंबर में ‘‘और भी बदतर स्थिति’’ का सामना करने के तैयार रहना होगा।

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देश के दस राज्यों में कोविड-19 के लगभग 77 फीसदी सक्रिय मामले: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया

केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि दस राज्यों में कोविड-19 के लगभग 77 फीसदी सक्रिय मामले हैं जबकि कुल सक्रिय मामलों में से 33 फीसदी महाराष्ट्र और केरल के हैं। इसने कहा कि दुनिया के अधिकतर देशों में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ रहे हैं और भारत की घनी आबादी को देखते हुए देश ने संक्रमण के प्रसार पर अंकुस लगाने में उल्लेखनीय काम किया है। केंद्र ने कहा कि 24 नवंबर तक भारत में कोविड-19 के 92 लाख मामले थें, जिसमें 4.4 लाख से अधिक सक्रिय मामले हैं। गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा, ‘‘हमारी स्वस्थ दर 93.76 फीसदी हो गई है और करीब 86 लाख लोग महामारी से उबर चुके हैं। पिछले आठ हफ्तों में प्रति दिन के औसतन मामलों में50 फीसदी की कमी आई है।वर्तमान में केवल दो राज्यों में 50 हजार से अधिक मामले हैं और वे पूरे सक्रिय मामलों का करीब 33 फीसदी हैं।’’ इसने कहा कि भारत का ‘केस फेटलिटी रेट’ (सीएफआर) 1.46 फीसदी है जबकि वैश्विक औसत 2.36 फीसदी है। केंद्र ने कहा कि सरकार सीएफआर को कम करने का प्रयास जारी रखेगी और इसे एक फीसदी से नीचे लाएगी और पॉजिटिविटी दर को कम करने के प्रयास तेज करेगी जो वर्तमान में 6.9 फीसदी है। केंद्र ने कहा, ‘‘दस राज्यों में देश में सक्रिय मामलों का 77 फीसदी है। ये राज्य हैं महाराष्ट्र (18.9 प्रतिशत), केरल (14.7 प्रतिशत), दिल्ली (8.5 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (5.7 फीसदी), कर्नाटक (5.6 फीसदी), उत्तरप्रदेश (5.4 फीसदी), राजस्थान (5.5 फीसदी), छत्तीसगढ़ (पांच फीसदी), हरियाणा (4.7 फीसदी) और आंध्रप्रदेश (3.1 फीसदी)।’’ इसने कहा कि भारत अब प्रतिदिन औसतन 11 लाख नमूनों की जांच कर रहा है और अप्रैल में छह हजार नमूनों की जांच से बढ़कर यहां तक पहुंचना एक उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। केंद्र ने 170 पन्नों का हलफनामा उच्चतम न्यायालय में दाखिल किया और कहा कि महामारी जिस भयावता से बढ़ी उससे बाध्य होकर विभिन्न देशों ने कड़े कदम उठाए। इसने जीवनके लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है और भारत इसका अपवाद नहीं है।

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मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 1645 नए मामले, 15 लोगों की मौत

मध्यप्रदेश में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1645 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या2,01,597तक पहुंच गयी। राज्य में पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से और 15 व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है जिससे मरने वालों की संख्या 3,224 हो गयी है। मध्यप्रदेश के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, ‘‘पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से इंदौर में तीन,भोपाल और सागर में दो-दो, ग्वालियर, खरगोन, रतलाम, होशंगाबाद, विदिशा, खंडवा, छतरपुर और सीधी में एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘राज्य में अब तक कोरोना वायरस से सबसे अधिक 749 मौत इंदौर में हुई हैं, जबकि भोपाल में 513, उज्जैन में 100, सागर में 138, जबलपुर में 221 एवं ग्वालियर में 180 लोगों की मौत हुई हैं। बाकी मौतें अन्य जिलों में हुई हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में शुक्रवार को कोविड-19 के 556 नये मामले इंदौर जिले में आये हैं, जबकि भोपाल में 313, ग्वालियर में 95 और जबलपुर में 85 नये मामले आये। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 2,01,597 संक्रमितों में से अब तक 1,83,696 मरीज स्वस्थ होकर घर चले गये हैं और 14,677 मरीज़ों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को 1,152 रोगियों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 

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कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिये केंद्र ने SC में दिल्ली सरकार को बताया जिम्मेदार 

केंद्र ने राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिये शुक्रवार को दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “बार-बार कहने” के बावजूद उसने जांच क्षमता, विशेष तौर पर आरटी-पीसीआर जांच, बढ़ाने के लिये कदम नहीं उठाए औरकाफी समय से प्रतिदिन 20,000 के करीब आरटी-पीसीआर जांच ही हो रही थी। केंद्र ने कहा कि दिल्ली सरकार को ठंड, त्योहारी सीजन और प्रदूषण के दौरान मामलों में बढ़ोतरी की पूरी जानकारी थी और इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त रूप से जागरूक करने के लिए उपायों को समय से अमल में नही लाया गया। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपने हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा, “ डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण समेत दिल्ली सरकार की उपलब्धियों पर जहां नियमित विज्ञापन थे वहीं कोविड-19 अनुकूल व्यवहार पर कोई विज्ञापन नहीं देखा गया। व्यापक रूप से लोगों को भी नियमित संपर्क उपायों के जरिये इसकी जानकारी नहीं थी।” उसने कहा, “कोविड-19 के बढ़ते मामलों के संदर्भ में बार-बार कहे जाने के बावजूद दिल्ली सरकार ने जांच क्षमता बढ़ाने के लिये कदम नहीं उठाए, खास तौर पर आरटी-पीसीआर के लिये, जो करीब 20,000 जांच के स्तर पर काफी समय से स्थिर थी।” न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह ने केंद्र के हलफनामे को संज्ञान में लिया और कहा, “चीजें बद् से बद्तर होती जा रही हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।” पीठ ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख एक दिसंबर तय करते हुए कहा, “राज्यों को राजनीति से ऊपर उठना होगा। सभी राज्यों को इस अवसर पर आगे आना होगा।” 

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न्यायालय ने राजकोट में कोविड-19 के लिये नामित अस्पताल में अग्निकांड की घटना का लिया संज्ञान

उच्चतम न्यायालय ने राजकोट में कोविड-19 अस्पताल में बृहस्पतिवार को आग लगने की घटना पर संज्ञान लिया और इस मामले में गुजरात सरकार से रिपोर्ट मांगी। इस घटना में पांच मरीजों की मौत हो गई है। न्यायालय ने बार बारइस तरह की घटनायें होने के बावजूद इन्हें कम करने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर राज्यों की तीखी आलोचना की। न्यायमूर्ति अशोक भूषण,न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस घटना को हतप्रभ करने वाला बताते हुये कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और यह नामित सरकारी अस्पतालों की स्थिति को दर्शाता है क्योंकि इसी तरह की घटनायें दूसरे स्थानों पर भी हो चुकी हैं। पीठ ने कहा कि यह घटना इस बात का प्रतीक है कि ऐसी स्थिति से निबटने के लिये अग्नि सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसका स्वत: संज्ञान ले रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर बात है।’’ इसके साथ ही पीठ ने गुजरात सरकार को इस घटना के बारे में एक दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘ये हतप्रभ करने वाली है और यह पहली घटना नहीं है। आपके पास इसकी निगरानी के लिये कितने अग्निशमन अधिकारी हैं? आपके यहां सुरक्षा प्रबंध ही नही हैं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘इन घटनाओं की एक राज्य से दूसरे राज्य और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में पुनरावृत्ति हो रही है। इस संबंध में राज्यों ने कोई ठोस कार्य योजना बनायी ही नहीं है।’’ गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बताया किराजकोट जिले में निर्दिष्ट कोविड-19 अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से संक्रमण के इलाज के लिए भर्ती पांच मरीजों की मौत हो गई जबकि इसमें उपचार के लिए भर्ती 26 अन्य मरीजों को सुरक्षित निकाल कर अन्य जगह स्थानांतरित किया गया है। पटेल ने बताया कि आनंद बंगला चौक इलाके में स्थित चार मंजिला उदय शिवानंद अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित आईसीयू में रात में करीब साढ़े बारह बजे आग लगी थी। इस अग्निकांड के समय इसमें करीब 31 मरीज भर्ती थे।

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राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण से और 18 लोगों की मौत

राजस्थान में एक और मंत्री सहित और 3093 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की शुक्रवार को पुष्टि हुई हैं राज्य में अभी तक कुल 2,60,040 लोग संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में संक्रमण से और 18 लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में संक्रमण से कुल मरने वालों का आंकड़ा 2,255 तक पहुंच गया। शुक्रवार को वनमंत्री सुखराम विश्नोई के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, वह अस्पताल में भर्ती हैं। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार शाम छह बजे तक के बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से 18 और मौत हुई हैं। जिससे मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2,255 हो गयी। कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक जयपुर में 426, जोधपुर में 230, अजमेर में 181, बीकानेर में 160, कोटा में 133, भरतपुर में 103, उदयपुर में 90, और पाली में 85 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक कुल 2,29,602 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त हुए हैं। इसके साथ ही शुक्रवार को संक्रमण के 3,093 नये मामले सामने आने से राज्य में इस घातक वायरस से संक्रमितों की अब तक की कुल संख्या 2,60,040 हो गयी जिनमें से 28,183 रोगी उपचाराधीन हैं।

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हरियाणा में कोविड-19 से 29 और लोगों की मौत, 2,135 नए मामले

हरियाणा में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण से 29 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद इस खतरनाक संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,345 हो गई। वहीं संक्रमण के 2,135 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,28,746 हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दैनिक बुलेटिन में बताया गया कि फरीदाबाद में पांच, गुरुग्राम और रोहतक जिले में चार-चार और हिसार तथा फतेहाबाद जिलों में तीन-तीन लोगों की मौत हुई। वहीं गुरुग्राम में 698, फरीदाबाद में 468, हिसार में 157 और रोहतक में 104 नए मामले सामने आए हैं। हरियाणा में अभी 20,400 लोगों का इलाज चल रहा है और कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर 90.06 फीसदी है।







Unlock 5 के 57वें दिन AIIMS में भारत बायोटेक के Covaxin के तीसरे चरण का परीक्षण शुरू

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 26, 2020   21:46
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Unlock 5 के 57वें दिन AIIMS में भारत बायोटेक के Covaxin के तीसरे चरण का परीक्षण शुरू
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त्रिपुरा में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 50 और नए मामले सामने आने से संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 32,578 हो गए। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस पूर्वोत्तर राज्य में कोविड-19 से अब तक 367 मौतें हुई हैं त्रिपुरा में अभी 770 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 31,418 लोग बीमारी से ठीक हो चुके हैं।

नयी दिल्ली। कोरोना वायरस रोधी टीके के निर्माण में लगी स्वदेशी कोवैक्सिन के इंसानों पर नैदानिक परीक्षण के तीसरे चरण की शुरुआत बृहस्पतिवार को यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुई। संस्थान के तंत्रिका विज्ञान केंद्र की प्रमुख एम वी पद्मा श्रीवास्तव और तीन अन्य स्वयंसेवकों ने टीके की पहली खुराक ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर भारत बायोटेक ‘कोवैक्सिन’ को विकसित कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि डॉ. श्रीवास्तव को पहला टीका लगाया गया और अगले कुछ दिनों में एम्स में 15 हजार से ज्यादा स्वयंसेवकों को टीका लगाया जाएगा। एक सूत्र ने कहा कि चार स्वयंसेवकों को मांसपेशियों में आधा मिलीलीटर की पहली खुराक सुई के माध्यम से दी गई। संपर्क किये जाने पर डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, “कोवैक्सिन देश में निर्मित पहला कोरोना वायरस रोधी टीका है और उससे भी ऊपर मेरा संस्थान परीक्षण में हिस्सा ले रहा है। टीका लगवाने वाले पहले स्वयंसेवक के तौर पर मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मैं इस महान उद्देश्य का हिस्सा बनकर खुश हूं। मैं पूरी तरह ठीक हूं और काम कर रही हूं।” सूत्रों ने कहा कि परीक्षण के तहत 0.5 मिलीलीटर की पहली खुराक देने के 28 दिन बाद 0.5 मिलीलीटर की दूसरी खुराक दी जाएगी। तीसरे चरण के तहत 18 वर्ष और उस से ज्यादा की आयु के 28,500 लोगों को विभिन्न केंद्रों पर परीक्षण टीका लगाया जाएगा। 10 राज्यों में करीब 25 केंद्रों पर यह परीक्षण किया जाएगा। कुछ जगहों पर परीक्षण शुरू भी हो गया है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने भारत बायोटेक को कोवैक्सिन के तीसरे चरण के मानवीय नैदानिक परीक्षण करने की मंजूरी दे दी है। पहले और दूसरे चरण के परीक्षण के सुरक्षा और प्रतिरक्षाजनकता आंकड़े केंद्रीय औषध नियामक को उपलब्ध करा दिये गए हैं। हैदराबाद स्थित कंपनी ने तीसरे चरण के परीक्षण के लिये आवेदन करते हुए कहा था कि टीके को लेकर किसी भी स्वयंसेवक पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव की खबर नहीं है। सूत्र ने कहा कि एक आम शिकायत सूई लगने वाली जगह पर दर्द की थी जो धीरे-धीरे खत्म हो गया। कोवैक्सिन के अलावा भारत में चार अन्य टीकों का अलग-अलग चरणों में परीक्षण चल रहा है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनका के कोविड-19 टीके के तीसरे चरण का परीक्षण कर रहा है जबकि जाइडस-कैडिला के देश में निर्मित टीके के दूसरे चरण का परीक्षण पूरा हो चुका है।

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कोविड-19 के सामने आए 44489 नए मामलों में से 60.72 प्रतिशत छह राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बीते 24 घंटे में सामने आए कोरोना वायरस के 44,489 मामलों में से 60.72 प्रतिशत मामले छह राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामलों की पुष्टि केरल में हुई। इसके बाद महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का नम्बर आता है। मंत्रालय ने कहा कि 524 मौतों में से 60.50 प्रतिशत दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई हैं। गत 24 घंटे में केरल में सबसे ज्यादा 6491 नए मामले आए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 6159व दिल्ली में 5246 मरीजों की पुष्टि हुई है। मंत्रालय ने कहा कि पिछले 24 घंटे में दिल्ली में सबसे ज्यादा 99 मौतें हुई हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 65 और पश्चिम बंगाल में 51 संक्रमितों ने दम तोड़ा है। भारत में संक्रमण का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 4,52,344 है, जो कुल मामलों का 4.88 फीसदी है। मंत्रालय के मुताबिक, संक्रमण का इलाज करा रहे 65 प्रति मरीज आठ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के हैं, जहां से रोजाना अधिकतम मामले और मौतें रिपोर्ट होती हैं। उसने कहा कि कोविड-19 के कारण हुई कुल मौतों में से 61 प्रतिशत इन आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई हैं। मंत्रालय ने बताया, पंजाब में मृत्यु दर 3.16 फीसदी, महाराष्ट्र में 2.60 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 1.75 फीसदी और दिल्ली में 1.60 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.46 फीसदी है। वहीं मृत्यु दर उत्तर प्रदेश में 1.43 प्रतिशत, हरियाणा में 1.02 फीसदी, राजस्थान में 0.87 प्रतिशत और केरल में 0.37 फीसदी है। दिल्ली में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोविड-19 के 29,169 मामले हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में प्रति 10 लाख की आबादी पर 14,584 और हरियाणा में 7,959 मामले हैं। देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर 6,715 मामले हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश में संक्रमण से मुक्त होने वाले लोगों की संख्या 86,79,138 है और संक्रमण को मात देने की राष्ट्रीय दर 93.66 प्रतिशत है। बीते 24 घंटे में 36,367 मरीज संक्रमण से उबरे हैं। उसने कहा कि 15 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में संक्रमण से मुक्त होने की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, कुल मामले 92.66 लाख पहुंच गए हैं, जबकि मृतक संख्या 1,35,223 हो गई है।

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दिल्ली में कोविड-19 की जांच ‘पूर्णता के स्तर’ पर पहुंच गई है: सत्येंद्र जैन 

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के लिए जांच की क्षमता ‘‘पूर्णता के स्तर’’ पर पहुंच गई है और प्रयोगशालाओं को एक दिन के अंदर सभी आरटी-पीसीआर की जांच के परिणाम जारी करने में समस्या आ रही है। कोविड-19 का पता लगाने के लिए मंगलवार को 61,778 जांच की गई जिसमें 26,080 आरटी-पीसीआर जांच थी, जो महानगर के लिए एक दिन में सर्वाधिक है। इसमें 35,698 रैपिड एंटीजन जांच भी शामिल है। जैन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जांच पूर्णता के स्तर पर पहुंच गई है...कई लोग अब कह रहे हैं कि उनकी जांच दो-तीन दिन पहले ही हुई थी।’’ मंत्री ने कहा कि सरकार ने आरटी-पीसीआर की जांच बढ़ाकर 35 हजार तक करने का निर्देश दिया था लेकिन प्रयोगशालाओं को एक दिन के अंदर सभी जांच के परिणाम जारी करने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक नई समस्या आ गई है।’’ जैन ने कहा कि बुधवार को संक्रमण की दर कम होकर 8.49 फीसदी हो गई जबकि सात नवंबर को यह दर 15.26 फीसदी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे बिस्तर जिन पर मरीज नहीं हैं उनकी संख्या चार दिन पहले 7844 थी जो अब बढ़कर 9138 हो गई है। पिछले कुछ दिनों में उपलब्ध आईसीयू बिस्तरों की संख्या भी बढ़कर 1057 हो गई है। 

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दिल्ली में वेंटिलेटर के साथ केवल 205 आईसीयू बेड उपलब्ध, 60 अस्पतालों में कोई बेड नहीं खाली

दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों और मृत्यु दर में वृद्धि होने के बीच नगर में बृहस्पतिवार को वेंटिलेटर से लैस उपलब्ध गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) बेड की संख्या घटकर 205 रह गयी वहीं कम से कम 60 अस्पतालों में कोई बेड खाली नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को संक्रमण के 5,246 नए मामले दर्ज किए गए। इस बीच तापमान में कमी होने तथा हवा की गुणवत्ता खराब होने से श्वसन संबंधी बीमारियों के बढ़ने की आशंका है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि शहर में कोविड​​-19 मरीजों के लिए बेडों की संख्या नौ से 26 नवंबर के बीच 16,172 से बढ़कर 18,252 हो गयी है। मंत्री ने ट्विटर पर कहा, पिछले 15 दिनों में दिल्ली के अस्पतालों में कोविड मरीजों के लिए 1359 आईसीयू बेड सहित 2080 बेड बढ़ाए गए हैं। ट्वीट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार वेंटिलेटर के साथ 211 आईसीयू बेड बढ़ाए गए हैं और इस तरह के बेडों की कुल संख्या 1,264 से बढ़कर 1,475 हो गयी है। दिल्ली सरकार के ‘ऑनलाइन कोरोना डैशबोर्ड’ के अनुसार बृहस्पतिवार शाम 5.10 बजे, शहर में वेंटिलेटर वाले 205 कोविड आइसीयू बेड खाली थे। जिन अस्पतालों में कोई स्थान खाली नहीं है, उनमें बेस अस्पताल दिल्ली कैंट, उत्तर रेलवे अस्पताल, सर गंगाराम अस्पताल, बत्रा अस्पताल, विम्हांस और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल शामिल हैं। शहर में कोविड का इलाज मुहैया कराने वाले 100 से अधिक अस्पतालों में, कम से कम 30 में पांच से कम खाली बेड हैं। 

रात में कर्फ्यू का फैसला तीन-चार दिन में लिया जा सकता है्: दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया

आप सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बृहस्पतिवार को बताया कि वह कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में रात में कर्फ्यू लगाने के संबंध में तीन से चार दिन में फैसला कर सकती है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। देश के कुछ राज्यों में रात्रि कर्फ्यू लागू किया गया है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील संदीप सेठी ने अतिरिक्त स्थायी वकील सत्यकाम के साथ मिलकर न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ के समक्ष यह अभ्यावेदन दिया। अदालत ने सवाल किया था कि क्या दिल्ली सरकार रात में कर्फ्यू लागू करेगी। केंद्र ने 25 नवंबर को जारी ताजा दिशा निर्देशों में रात्रि कर्फ्यू लगाने की मंजूरी दे दी है। दिल्ली सरकार ने कहा, ‘‘हम रात्रि कर्फ्यू लगाने के बारे में सक्रियता से विचार कर रहे हैं। इस पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है।’’ अदालत ने पूछा कि यह फैसला कितनी जल्दी लिया जाएगा। उसने कहा, ‘‘सक्रियता से विचार कर रहे हैं? क्या आप उतनी सक्रियता से विचार कर रहे हैं, जितना कोविड-19 सक्रिय है?’’ दिल्ली सरकार के वकील ने उत्तर दिया, ‘‘संभवत: तीन से चार दिन में फैसला किया जाएगा।’’ अदालत दिल्ली में कोविड-19 संबंधी जांच बढ़ाने और जल्दी परिणाम देने के संबंध में वकील राकेश मल्होत्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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केरल में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 5,378 नए मामले सामने आए, जिससे राज्य में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 5.83 लाख से अधिक हो गए, जबकि बीमारी से 27 और मृत्यु होने से राज्य में मृतकों की संख्या 2,148 हो गई। स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पिछले 24 घंटों में, 55,996 नमूनों की जांच की गई है। संक्रमण दर 9.60 प्रतिशत है। राज्य में कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 5,83,510 हो गए है, जिसमें 50 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। राज्य में 5,970 मरीजों के संक्रमण से ठीक होने के बाद ठीक हो चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 5,16,978 हो गई। वर्तमान में 64,486 मरीजों का इलाज चल रहा है। 

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आंध्र प्रदेश में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 1,031 नए मामले सामने आने से राज्य में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 8,65,705 हो गए। पिछले 24 घंटों में 1,081 रोगियों के ठीक होने के बाद ठीक हो चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 8,46,120 हो गई। नवीनतम बुलेटिन में कहा गया कि कोरोना वायरस संक्रमण से आठ और मरीजों ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की कुल संख्या 6,970 हो गई। बुलेटिन में कहा गया है कि राज्य में अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या 12,615 है। 

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गोवा में बृहस्पतिवार को 148 और लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बााद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 47,341 हो गए, जबकि बीमारी से दो और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 685 हो गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कम से कम 111 रोगियों को विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई, जिससे राज्य में ठीक हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 45,340 हो गई। अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 1,316 मरीजों का इलाज चल रहा है। 

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त्रिपुरा में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 50 और नए मामले सामने आने से संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 32,578 हो गए। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस पूर्वोत्तर राज्य में कोविड-19 से अब तक 367 मौतें हुई हैं त्रिपुरा में अभी 770 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 31,418 लोग बीमारी से ठीक हो चुके हैं।







Unlock 5 के 56वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, जांच बढ़ाने से संक्रमण दर में लगातार आ रही गिरावट

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 25, 2020   21:27
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Unlock 5 के 56वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, जांच बढ़ाने से संक्रमण दर में लगातार आ रही गिरावट
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कोरोना वायरस के नमूनों की जांच के लिए प्रयोगशाला भी बढ़ायी गयी। वर्तमान में 2138 प्रयोगशाला में जांच की जा रही है। इसमें 1167 सरकारी और 971 निजी प्रयोगशालाएं हैं। मंत्रालय ने कहा कि प्रति दस लाख आबादी पर जांच की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय मानक से पांच गुणा ज्यादा हैं।

नयी दिल्ली। देश में कोविड-19 के लिए अब तक करीब 13.5 करोड़ नमूनों की जांच हो चुकी है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि लगातार व्यापक जांच के कारण संक्रमण दर में गिरावट आयी है। मंत्रालय ने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण दर में गिरावट आने से पता चलता है कि संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने में मदद मिली है। कुल संक्रमण दर में लगातार गिरावट आ रही है और यह 6.84 प्रतिशत पर पहुंच गयी है जबकि दैनिक संक्रमण दर 3.83 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा कि जनवरी के बाद से कोविड-19 नमूनों की जांच के लिए आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया गया और इस वजह से जांच की संख्या भी बढ़ती गयी। पिछले 24 घंटे में 11,59,032 नमूनों की जांच के साथ अब तक करीब 13.5 करोड़ (13.48,41,307) जांच हो चुकी हैं। कोरोना वायरस के नमूनों की जांच के लिए प्रयोगशाला भी बढ़ायी गयी। वर्तमान में 2138 प्रयोगशाला में जांच की जा रही है। इसमें 1167 सरकारी और 971 निजी प्रयोगशालाएं हैं। मंत्रालय ने कहा कि प्रति दस लाख आबादी पर जांच की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय मानक से पांच गुणा ज्यादा हैं। देश में वर्तमान में 4,44,746 संक्रमित मरीज हैं जो कि कुल मामलों का 4.82 प्रतिशत है। उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल मामलों के हिसाब से लगातार पांच प्रतिशत से कम बनी हुई है। मंत्रालय ने कहा पिछले 24 घंटे के दौरान 37,816 मरीजों के ठीक हो जाने से अब तक कुल 86,42,771 लोग संक्रमण को मात दे चुके हैं। कोविड-19 के 44,376 नए मामलों में 76.51 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश से आए। दिल्ली में सबसे ज्यादा 6224 मामले आए। इसके बाद महाराष्ट्र में 5439 और केरल में 5420 मामले आए। पिछले 24 घंटे में 481 और मरीजों की मौत हो गयी। इनमें से 74.22 मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। दिल्ली में 109 और मरीजों की मौत हो गयी जबकि पश्चिम बंगाल में 49 और उत्तरप्रदेश में 33 मरीजों की मौत हो गयी।

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मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1773 नए मामले सामने आए , 14 और लोगों की मौत

मध्यप्रदेश में बुधवार को कोरोना वायरस से संक्रमण के 1,773 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित पाये गये लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,98,284तक पहुंच गयी। राज्य में पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से 14 और व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है जिससे मरने वालों की संख्या 3,197 हो गयी है। मध्यप्रदेश के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, ‘‘पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से इंदौर में पांच, भोपाल एवं रायसेन में दो-दो और ग्वालियर, जबलपुर, सागर, उज्जैन एवं देवासमें एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘राज्य में अब तक कोरोना वायरस से सबसे अधिक 743 मौत इंदौर में हुई हैं, जबकि भोपाल में 510, उज्जैन में 100, सागर में 136, जबलपुर में 220 एवं ग्वालियर में 178 लोगों की मौत हुई हैं। बाकी मौतें अन्य जिलों में हुई हैं।’’

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महाराष्ट्र में संक्रमण के 6,159 नए मामले आए सामने, 65 लोगों की मौत

महाराष्ट्र में बुधवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 6,159 नए मामले सामने आने के बाद राज्य में संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 17,95,959 हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण से 65 और लोगों की मौत हो जाने के बाद इस घातक बीमारी के कारण राज्य में अब तक मारे जा चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 46,748 हो गई। उसने बताया कि बुधवार को 4,844 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दी गई और राज्य में संक्रमणमुक्त हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर16,63,723 हो गई। राज्य में इस समय संक्रमण के 84,464 उपचाराधीन मामले हैं मुंबई में संक्रमण के 1,144 नए मामले सामने आने के बाद यहां अब तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 2,78,598 हो गई है। शहर में 17 और लोगों की मौत होने के बाद कुल मृतक संख्या 10,725 हो गई। राज्य में अब तक 1,04,56,962 नमूनों की जांच की जा चुकी है।

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अस्पताल में देर से भर्ती, आईसीयू बिस्तरों की कमी, बढ़ता प्रदूषण कोविड-19 मरीजों की मौत में वृद्धि के मुख्य कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 मरीजों को अस्पताल में देर से भर्ती करने के कारण उनकी हालत गंभीर होने, आईसीयू बिस्तरों की कमी, प्रतिकूल मौसम और बढ़ता प्रदूषण दिल्ली में कोरोना वायरस संबंधी मौत के मामलों में वृद्धि के मुख्य कारण हैं। राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 मरीजों की मृत्यु दर बढ़कर 1.89 प्रतिशत हो गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.46 प्रतिशत है। महानगर में पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस संक्रमण के अत्यधिक मामले सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में मरीजों की इस बीमारी से जान जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि महामारी के पिछले चरण की तुलना में इस चरण में रोग की गंभीरता अधिक है, जिसके लिए प्रतिकूल मौसम और प्रदूषण सहित कई कारक जिम्मेदार हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग (ईसीडी) विभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि घर में मरीजों के पृथक-वास में होने के दौरान दिशा-निर्देशों का पालन नहीं होना, बीमारी के अधिक लक्षण सामने आने और तबीयत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल में देर से जाना मौत के बढ़ते मामले के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों को कोविड-19 जांच में संक्रमित पाया जाता है और उन्हें घर पर पृथक-वास में रहने की सलाह दी जाती है, उन्हें अपने शरीर में ऑक्सीजन स्तर की लगातार निगरानी करते रहनी चाहिए तथा यदि और अधिक लक्षण सामने आते हैं और तबियत बिगड़ती है तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जल्दी मदद मिलने से समय पर उपचार सुनिश्चित होगा।’’ राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक राणा ए के सिंह ने कहा कि मौसम में बदलाव और बढ़ता प्रदूषण समस्याओं को बढ़ा रहा है। डॉ. राणा ने जोर देकर कहा, ‘‘लोग इस मौसम में फ्लू, सर्दी और खांसी से अधिक पीड़ित होते हैं। श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए, अगर समय पर मदद नहीं ली जाती है, तो इससे प्रतिकूल परिणाम होते हैं।’’ राष्ट्रीय राजधानी में आईसीयू बिस्तरों पर बढ़ते बोझ को देखते हुए, आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित तीन अस्पतालों - सफदरजंग अस्पताल, आरएमएल अस्पताल और लेडी हार्डिंग अस्पताल को आईसीयू बिस्तरों की संख्या बढ़ाने को कहा है। उन्होंने कहा, ‘‘और हम ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ सर गंगा राम अस्पताल के बोर्ड अध्यक्ष डॉ. डी एस राणा ने कहा कि ऑक्सीजन का स्तर 90 प्रतिशत से नीचे आने और अपनी हालत गंभीर होने पर मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कई अस्पतालों में आईसीयू भरे हुए हैं जिसके चलते एक रोगी जिसकी स्थिति पहले से ही खराब है, उसे लंबे समय तक वार्ड में इंतजार करना पड़ता है जिससे उसकी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं और बढ़ जाती हैं।

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निषिद्ध क्षेत्रों के बाहर लॉकडाउन के लिए केंद्र की अनुमति जरूरी: गृह मंत्रालय का दिशा-निर्देश

कुछ क्षेत्रों में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए रात्रिकालीन कर्फ्यू जैसी स्थानीय पाबंदियां लगा सकते हैं। हालांकि, निषिद्ध क्षेत्रों के बाहर किसी भी तरह का लॉकडाउन लगाने के पहले केंद्र से विचार-विमर्श करना होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिसंबर के लिए ‘निगरानी, रोकथाम और सावधानी’ दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि निर्देश का मुख्य लक्ष्य देश में कोविड-19 के खिलाफ मुकाबले में जो कामयाबी मिली है, उसे बनाए रखना है। रोकथाम रणनीति की बदौलत ही देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। दिशा-निर्देश में कहा गया है कि कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हाल ही में मामलों में बढ़ोतरी, त्योहार के मौसम और ठंड की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए यह जोर दिया जाता है कि महामारी की रोकथाम के लिए सावधानी रखना बहुत जरूरी है और इसको लेकर निर्धारित रणनीति का कड़ाई से पालन करना होगा। मंत्रालय ने कहा कि रोकथाम की रणनीति में निगरानी, अन्य उपायों पर ध्यान होना चाहिए और गृह मंत्रालय तथा स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का कड़ाई से पालन करना चाहिए। मंत्रालय ने कहा, ‘‘राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्थिति के अपने आकलन के आधार पर कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए रात्रिकालीन कर्फ्यू जैसी स्थानीय पाबंदी लागू कर सकते हैं।’’ दिशा-निर्देश में कहा गया, ‘‘हालांकि, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारें केंद्र सरकार के साथ विचार-विमर्श किए बिना निषिद्ध क्षेत्रों के बाहर किसी भी प्रकार का स्थानीय लॉकडाउन (राज्य, जिला, उपसंभाग, शहर के स्तर पर) नहीं लागू करेंगी।’’ दिशा-निर्देश एक दिसंबर से 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेगा। मंत्रालय ने कहा कि स्थानीय जिला, पुलिस और निगम प्राधिकार पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि रोकथाम उपायों का कड़ाई से पालन कराया जाए। राज्य सरकारें इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगी। दिशा-निर्देश के मुताबिक निषिद्ध क्षेत्रों के बाहर कुछ गतिविधि को सशर्त अनुमति के अलावा सभी गतिविधियों की अनुमति दी गयी है। सिनेमा हॉल और थियेटरों को बैठने की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालन की अनुमति दी गयी है। सामाजिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जमावड़े की स्थिति में एक हॉल में अधिकतम 50 प्रतिशत क्षमता के साथ 200 लोगों तक की अनुमति होगी। खुले स्थान में मैदान के हिसाब से लोगों को अनुमति दी जाएगी। 

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दिल्ली में कोविड-19 से होने वाली मौतों की आंकड़ा कम करके बता रही है सरकार: नगर निगम

दिल्ली की भाजपा शासित तीनों नगर निगमों ने बुधवार को आरोप लगाया कि शहर की आम आदमी पार्टी की सरकार कोरोना वायरस संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या को कम करके बता रही है। हालांकि सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए नगर निगमों पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। दिल्ली सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शहर में 23 नवंबर तक कोविड-19 से 8,512 लोगों की मौत हुई है। वहीं नगर निगमों का दावा है कि उन्होंने अभी तक 10,318 लोगों का अंतिम संस्कार किया है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर निर्मल जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उसके द्वारा जारी आंकड़े नगर निगमों के आंकड़ों से कम कैसे हैं? जैन ने कहा, ‘‘कोविड-19 से मरने वालों या उससे हुई संदिग्ध मौतों के मामले में प्रत्येक अंतिम संस्कार का पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने पूरा-पूरा हिसाब रखा है, ऐसे में हमारी संख्या में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।’’ 

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दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के साथ अधिकारी सूक्ष्म निरूद्ध क्षेत्र बना रहे हैं

राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच कुछ जिलों के अधिकारी सूक्ष्म निरूद्ध क्षेत्र बना रहे हैं जहां दो या अधिक संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि महामारी के बेहतर प्रबंधन के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर किसी क्षेत्र को तब निरूद्ध क्षेत्र घोषित किया जाता है जहां कोविड-19 के तीन या अधिक मामले सामने आते हैं। लेकिन यह ऐसा अभ्यास है जिसे जिले के अधिकारी जरूरत के आधार पर करते हैं। दिल्ली महामारी रोग कोविड-19 नियमन, 2020 में जिलाधिकारी को किसी क्षेत्र को सील करने, निरूद्ध क्षेत्र से आबादी के प्रवेश या निकासी को प्रतिबंधित करने और महामारी को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी किसी उपाय को लागू करने का अधिकार देता है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दक्षिण पश्चिम और उत्तर पश्चिम जिलों में सूक्ष्म निरूद्ध क्षेत्र बनाये गये हैं, जबकि अन्य जिले भी बेहतर तरीके से वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लचीला रूख अपना रहे हैं। दक्षिण पश्चिम जिले के जिलाधिकारी ने जिले में कोरोना वायरस फैलने को देखते हुए सूक्ष्म निरूद्ध क्षेत्र बनाने का आदेश रविवार को जारी किया। 

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उत्तराखंड में कोविड-19 के 482 नए मरीज सामने आए, 12 और संक्रमितों की मौत

उत्तराखंड में बुधवार को 482 और लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई जबकि 12 और मरीजों ने महामारी से दम तोड़ दिया। यहां प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 482 नए मरीजों के मिलने के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 72,642 हो गयी है। बुलेटिन के मुताबिक ताजा मामलों में सर्वाधिक 157 संक्रमित देहरादून जिले में मिले जबकि नैनीताल में 59, हरिद्वार में 50, पौड़ी में 47 और पिथौरागढ़ में 44 नए मरीज सामने आए। विभाग ने बताया कि बुधवार को प्रदेश में 12 और कोविड-19 मरीजों ने दम तोड़ दिया जिन्हें मिलाकर अबतक राज्य में 1,185 मरीज इस महामारी में अपनी जान गंवा चुके हैं। बुलेटिन के मुताबिक प्रदेश में बुधवार को 444 और मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो गए जिन्हें मिलाकर अब तक कुल 66,147 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 4,658 है। बुलेटिन के मुताबिक प्रदेश से 652 संक्रमितों ने अबतक पलायन किया है।