कारगिल युद्ध में मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने छुड़ा दिए थे दुश्‍मनों के छक्‍के

By रेनू तिवारी | Publish Date: Jul 24 2019 5:49PM
कारगिल युद्ध में मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने छुड़ा दिए थे दुश्‍मनों के छक्‍के
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कारगिल की जंग के दौरान सबसे मुश्किल चुनौती थी टाइगर हिल पर कब्जा जमाए बैठे पाकिस्तानी लगातार बमबारी और गोलियां चला रहे थे, चोटी पर चढ़कर दुश्मन के ठीकानों को बर्बाद करना ही भारतीय सेना का पहला लक्ष्य था।

मेजर राजेश सिंह अधिकारी एक भारतीय सेना अधिकारी थे जिनकी कारगिल युद्ध के दौरान मृत्यु हो गई थी। युद्ध के मैदान में बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत दूसरे सर्वोच्च भारतीय सैन्य सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उत्तराखण्ड के नैनीताल में जन्मे वीर योद्धा मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने अपनी दिलेरी का परिचय देते हुए मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी और हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गए।

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कारगिल की जंग के दौरान सबसे मुश्किल चुनौती थी टाइगर हिल पर कब्जा जमाए बैठे पाकिस्तानी लगातार बमबारी और गोलियां चला रहे थे, चोटी पर चढ़कर दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करना ही भारतीय सेना का पहला लक्ष्य था। इससे लिए सबसे पहले तोलोलिंग से घुसपैठियों का कब्जा हटाने की योजना बनाई गई। दुश्मन 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बैठा गोलिया बरसा रहा था जिस पर काबू पाने के लिए मेजर राजेश सिंह अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई थी।
मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने अपनी यूनिट के साथ चढ़ाई की और पाकिस्तानी घुसपैठियों के बंकर को रॉकेट लॉन्‍चर से उलझाए रखा और अधिकारी को मौका मिला तो उन्होंने बंकर को तबाह कर दिया। पाकिस्तानी घुसपैठियों को भी मार गिराया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी मेजर लड़ते रहे और कई घुसपैठियों को मार कर उनके ठिकानों पर कब्जा कर लिया। लेकिन मेजर राजेश सिंह अधिकारी इस जंग में शहीद हो गये।
 
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