मौत से 15 मिनट पहले क्या सोचता है इंसान का माइंड, रिकॉर्डिंग हुई तो खुले राज

मौत से 15 मिनट पहले क्या सोचता है इंसान का माइंड, रिकॉर्डिंग हुई तो खुले राज

इस दौरान हमें नई जानकारी मिल गई। लेकिन ऐसा ही शोध चूहों पर भी किया जा चुका है। जिसमें यह जानने का प्रयास किया गया था कि दिल का दौरा पड़ने से पहले और बाद में चूहे के दिमाग की तरंगे कितना बदलती हैं।

आज से पहले कोई कुछ नहीं जानता था कि मरने से पहले के कुछ मिनट व्यक्ति क्या सोच रहा है। लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब ढूंढ लिया। पहली बार वैज्ञानिकों ने यह रिकॉर्ड किया कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु का समय आता है तो उस समय वह क्या सोचता है। एस्तोनिया के यूनिवर्सिटी ऑफ तारतू में डॉक्टरों एक 87 साल के बुजुर्ग के दिमाग के रिकॉर्डिंग की यह बुजुर्ग मिर्गी से पीड़ित थे। इनके दिमाग में चल रही हलचल को रिकॉर्ड करने के लिए डॉक्टर ने इलेक्ट्रोइनसिफेलोग्राफी (EEG) का सहारा लिया। बुजुर्ग के दिमाग की मॉनिटरिंग लगातार EEG मशीन से की जाती रही।

बता दें कि जब व्यक्ति का इलाज चल रहा था तो उस दौरान अचानक से व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। लेकिन मौत से पहले दिमाग में चल रही सारी बातें EEG मशीन में रिकॉर्ड हो गई। जब डॉक्टर रॉल विसेंट और उनकी टीम ने बुजुर्ग के दिमाग की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग देखी तो वो हैरत में पड़ गए। इस रिकॉर्डिंग की डिटेल को स्टडी फ्रंटियरर्स ऑफ एजिंग न्यूरोसाइंस में प्रकाशित हुई है।

यूनिवर्सिटी ऑफ लुईविले के न्यूरोसर्जन डॉक्टर अजमल जेमर भी इस अध्ययन में शामिल थे । उन्होंने कहा कि हमने EEG मशीन में मौत के समय की 15 मिनट की रिकॉर्डिंग की। लेकिन हमारा पूरा ध्यान सिर्फ मौत से पहले 30 सेकंड और उसके बाद के 30 सेकंड पर ही था। अध्ययन में यह भी पता चला कि जब तक दिल चलता रहा, बुजुर्ग के दिमाग में तरंगे दौड़ती रहीं। यह तरंगे उस बुजुर्ग के संज्ञानत्मक क्रियाओं (Congnitive Function) को सक्रिय बनाए हुए थीं।

इसमें से कुछ तरंगे ऐसी भी थीं, जो जीवित इंसान सोते समय सपनों को देखते समय पैदा करता है। अपनी पुरानी यादों में खो जाता है। पुरानी सूचनाओं को जमा करके एक साथ उन्हें देखने और सोचने की कोशिश करता है। यह सब बातें वैज्ञानिकों के लिए हैरान करने वाली थी क्योंकि इसके ठीक बाद दिल, शरीर और दिमाग सब शांत हो जाते हैं। किसी भी तरह की प्रक्रिया जो जीवित शरीर में होती है वह सब बंद हो जाती है।

डॉक्टर अजमल ने कहा कि हमारे अध्ययन में पता चला कि यह बुजुर्ग मौत से पहले अपनी पुरानी घटनाओं को याद कर रहे थे। क्योंकि उस समय उनके दिमाग की तरंगे बहुत तेज थीं। लेकिन जैसे ही मौत नजदीक आती है यह धीमी होने लगती हैं। आखरी में EEG मशीन पर बस सीधी रेखा नजर आती है।

इस अध्ययन से इंसानी दिमाग, उसके जीवन के खत्म होने की प्रक्रिया और उस समय होने वाली मानसिक गतिविधियों की समझ बढ़ी है। EEG मशीन से हुई रिकॉर्डिंग ने डॉक्टर रॉल विसेंट और डॉक्टर अजमल जेमार को हैरान कर के रख दिया है। लेकिन दोनों ने कहा कि इससे बहुत लाभ होगा। अब हम जान सकते हैं कि इंसान के शरीर का कौन सा अंग मौत से पहले और कौन से बाद में दान करने के लायक कितनी देर तक बचेंगे।

डॉक्टर अजमल ने कहा कि यह शोध सिर्फ एक इंसान के दिमाग पर किया गया है। इसलिए इसकी सीमाएं भी है। क्योंकि हम तो उस मिर्गी से पीड़ित बुजुर्ग के सेहत की निगरानी कर रहे थे। इस दौरान हमें नई जानकारी मिल गई। लेकिन ऐसा ही शोध चूहों पर भी किया जा चुका है। जिसमें यह जानने का प्रयास किया गया था कि दिल का दौरा पड़ने से पहले और बाद में चूहों के दिमाग की तरंगो में कितना बदलाव आता है।

डॉ रॉल ने कहा कि मरते वक्त पुरानी यादों को रीकॉल करने की घटना कई जीवों में देखने को मिलती है। अगर इंसानी दिमाग का अध्ययन करना है, तो हमें और ज्यादा शोध करने की जरूरत पड़ेगी। शायद किसी मरने वाले इंसान को अगर उसके पुराने लोग, यादें, घटनाएं दिखाई जाए तो जाने वाला इंसान खुशी से मौत को गले लगा सके। सुकून से मर सके। उसे अपने दिमाग पर इतना जोर डालने की जरूरत ना पड़े।






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