रक्षाबंधन 2020 पर अपने भाई को राखी बाँधने का सबसे बढ़िया मुहूर्त जानें

रक्षाबंधन 2020 पर अपने भाई को राखी बाँधने का सबसे बढ़िया मुहूर्त जानें

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधते समय बहन कहती है कि हे भैया, मैं तुम्हारी शरण में हूं। मेरी सब प्रकार से रक्षा करना। राखी कच्चे सूत जैसी सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे तथा सोने या चांदी जैसी महंगी वस्तु तक की हो सकती है।

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक ही नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कारों को प्रदर्शित करने का अवसर भी है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हालांकि इस बार कोरोना काल में पर्व मनाने की शैली बिलकुल बदल गयी है और अधिकतर बहनें इस बार भाई के घर जाने की बजाय उसे ऑनलाइन ही रक्षाबंधन की बधाई देंगी, राखी तो अधिकतर बहनें ई-कॉमर्स वेबसाइटों अथवा अन्य माध्यमों से भाई तक पहुँचा ही चुकी हैं। फिर भी यदि आप घर पर भाई के साथ हैं तो आइये सबसे पहले जान लेते हैं रक्षाबंधन पर राखी बाँधने का सबसे अच्छा मुहूर्त क्या है-

इसे भी पढ़ें: 29 साल बाद बन रहा रक्षाबंधन पर सर्वार्थ-सिद्धि के साथ दीर्घायु आयुष्मान योग

-सुबह 9 बजकर 28 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट तक रक्षाबंधन का अनुष्ठान किया जा सकता है।

-यदि आप दोपहर में भाई को राखी बाँधने का मुहूर्त जानना चाहती हैं तो यह 1 बजकर 47 मिनट से लेकर 4 बजकर 26 मिनट तक है।

-प्रदोष काल में राखी बाँधने का मुहूर्त जानना चाहती हैं तो यह 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 9 बजकर 14 मिनट तक है।

पर्व मनाने का तरीका

रक्षाबंधन के दिन बहन भाई के हाथ में रक्षा सूत्र बांधती है तथा मस्तक पर टीका लगाती है। राखी बांधते समय बहन कहती है कि हे भैया, मैं तुम्हारी शरण में हूं। मेरी सब प्रकार से रक्षा करना। राखी कच्चे सूत जैसी सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे तथा सोने या चांदी जैसी महंगी वस्तु तक की हो सकती है। इस दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर बहनें पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी के अलावा चावल, दीपक और मिठाई भी होती है। भाई तैयार होकर टीका करवाने के लिए पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं। पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीक करके अक्षत को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है फिर उसकी आरती उतारी जाती है, तत्पश्चात् भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके बाद भाई बहन को उपहार या धन देता है। इस प्रकार रक्षाबंधन के अनुष्ठान के पूरा होने पर भोजन किया जाता है।

पौराणिक कथाएँ

रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ पौराणिक कथाएं भी हैं जिनमें एक के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लग गई तथा खून गिरने लगा। द्रौपदी ने जब यह देखा तो उन्होंने तुरंत ही धोती का किनारा फाड़कर उनके हाथ में बांध दिया। इसी बंधन के ऋणी श्रीकृष्ण ने दुःशासन द्वारा चीर खींचते समय द्रौपदी की लाज रखी थी। मध्यकालीन इतिहास में भी एक ऐसी ही घटना मिलती है- चित्तौड़ की हिन्दूरानी कर्मवती ने दिल्ली के मुगल बादशाह हुमायूं को अपना भाई मानकर उनके पास राखी भेजी थी। हुमायूं ने कर्मवती की राखी स्वीकार कर ली और उसके सम्मान की रक्षा के लिए गुजरात के बादशाह से युद्ध किया।

इसे भी पढ़ें: राशि अनुसार राखी बांधने से मिलेगी खुशहाली और दीर्घायु

रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी कथा

एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, ''हे अच्युत! मुझे रक्षाबंधन की वह कथा सुनाइए जिससे मनुष्यों की प्रेत बाधा तथा दुख दूर होता है। इस पर भगवान ने कहा, 'हे पाण्डव श्रेष्ठ! प्राचीन समय में एक बार देवों तथा असुरों में बारह वर्षों तक युद्ध चलता रहा। इस संग्राम में देवराज इंद्र की पराजय हुई। देवता कांति विहीन हो गये। इंद्र विजय की आशा को तिलांजलि देकर देवताओं सहित अमरावती चले गये। विजेता दैत्यराज ने तीनों लोकों को अपने वश में कर लिया। उसने राजपद से घोषित कर दिया कि इंद्रदेव सभा में न आएं तथा देवता एवं मनुष्य यज्ञ कर्म न करें। सब लोग मेरी पूजा करें। जिसको इसमें आपत्ति हो, वह राज्य छोड़कर चला जाए।

दैत्यराज की इस आज्ञा से यज्ञ वेद, पठन पाठन तथा उत्सव समाप्त हो गये। धर्म के नाश होने से से देवों का बल घटने लगा। इधर इंद्र दानवों से भयभीत हो बृहस्पति को बुलाकर कहने लगे, ''हे गुरु! मैं शत्रुओं से घिरा हुआ प्राणन्त संग्राम करना चाहता हूं। पहले तो बृहस्पति ने समझाया कि कोप करना व्यर्थ है, परंतु इंद्र की हठवादिता तथा उत्साह देखकर रक्षा विधान करने को कहा। सहधर्मिणी इंद्राणि के साथ इंद्र ने बृहस्पति की उस वाणी का अक्षरशः पालन किया। इंद्राणि ने ब्राह्मण पुरोहित द्वारा स्वस्ति वाचन कराकर इंद्र के दाएं हाथ में रक्षा की पोटली बांध दी। इसी के बल पर इंद्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की।

-शुभा दुबे





Related Topics
Rakshabandhan 2020 Rakhi Shubh Muhurat Raksha Bandhan Date Time Raksha Bandhan 2020 Date and Time Raksha Bandhan 2020 Wishes Happy Raksha Bandhan Raksha Bandhan 2020 Rakhi Rakhi timing Rakhi muhurat Rakhi 2020 Raksha Bandhan Rakhi Muhurat Rakhi Pooja Vidhi Raksha Bandhan Pooja Vidhi Rakshabandhan Poojavidhi Raksha Bandhan Muhurat Raksha Bandhan 2020 Shubh Muhurat Raksha Bandhan Mantra Rakhi 2020 Rakhi Rakhi Date and Time Raksha Bandhan on 3th August Monday 3 August Rakhi Bandhne Ka Muhurat रक्षाबंधन रक्षाबंधन मुहूर्त रक्षाबंधन 2020 राखी मुहूर्त रक्षाबंधन राखी बांधने का मुहूर्त राखी बांधने का समय रक्षाबंधन मुहूर्त रक्षा बंधन राखी 2020 रक्षा बंधन पूजा विधि रक्षाबंधन पूजा विधि राखी बांधने का शुभ समय रक्षाबंधन तिथि रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त रक्षाबंधन मंत्र राखी डेट एंड टाइम रक्षा बंधन मुहूर्त 3 अगस्त को रक्षाबंधन राहुकाल श्रावणी पूर्णिमा श्रावण मास Religion 


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept