Amarnath Yatra Mystery: Baba Barfani की अमर कहानी, क्यों 12 ज्योतिर्लिंगों से भी खास है Amarnath का ये रहस्य

Amarnath Yatra Mystery
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अमरनाथ में भगवान शिव को बाबा बर्फानी के रूप में पूजा जाता है। जोकि आस्था और मोक्ष का अनूठा केंद्र है। ऐसे में आज हम आपको बाबा बर्फानी के महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यहां पर मौजूद कबूतरों के रहस्य के बारे में भी जानेंगे।

हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिगों के दर्शन करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 12 ज्योतिर्लिगों में शामिल न होने के बाद भी अमरनाथ में स्थापित शिवलिंग के दर्शन का विशेष महत्व होता है। अमरनाथ में भगवान शिव को बाबा बर्फानी के रूप में पूजा जाता है। जोकि आस्था और मोक्ष का अनूठा केंद्र है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बाबा बर्फानी के महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यहां पर मौजूद कबूतरों के रहस्य के बारे में भी जानेंगे।

अमरेश्वर शिवलिंग का महत्व

बाबा बर्फानी 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल न होकर इसलिए भी खास है, क्योंकि यह स्वयंभू हिमलिंग है। जहां पर ज्योतिर्लिंग स्थापित किए जाते हैं, वहीं अमरनाथ गुफा में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बर्फ की बूंदों से बनता है। यह बूंद गुफा की छत से टपकती है। यह शिवलिंग चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता और बढ़ता रहता है। यह शिवलिंग सावन महीने में प्रकट होता है और सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन तक रहता है। धार्मिक मत है कि बाबा बर्फानी के दर्शन करने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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क्यों पवित्र मानी जाती है ये गुफा

अमरनाथ गुफा को बेहद पवित्र और पावन मानी जाती है। क्योंकि यह वही स्थान है, जहां पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरकथा सुनाई थी। इस कारण इसको 'अमरनाथ' कहा जाता है और इस स्थान को मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी परम पवित्र मानी जाती है। इस गुफा की एक खासियत यह भी है कि यहां मुख्य शिवलिंग के साथ गुफा में मां पार्वती और भगवान गणेश के भी हिमखंड प्राकृतिक रूप में निर्मित होते हैं।

जानें अमर कबूतरों का रहस्य

पौराणिक कथा के मुताबिक जब महादेव मां पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तो इस दौरान कबूतर के जोड़े ने इस कथा को सुन लिया और वह अमर हो गए। जब यह बात भगवान शिव को पता चली तो वह क्रोधित हुए। वहीं बाद में महादेव ने उन कबूतरों को शिव-पार्वती के प्रतीक के रूप में हमेशा गुफा में रहने का वरदान दिया। माना जाता है कि जिस भी भक्त को इस गुफा में दो कबूतर दिखते हैं, वह बेहद भाग्यशाली होते हैं।

अमरनाथ यात्रा की खासियत

अमरनाथ गुफा समुद्र तल से करीब 14,500 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर है। इसलिए अमरनाथ यात्रा को साहस और अटूट विश्वास का भी प्रतीक माना जाता है। यह एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि एक अलौकिक अनुभव है। यहां पर श्रद्धालु अमरत्व की कामना और भगवान शंकर के दर्शन के लिए दुर्गम रास्तों से होकर जाते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि अमरनाथ की कठिन यात्रा को करने के बाद जो भी भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं, उनके जीवन की हर बाधा दूर होती है और हर मनोकामना पूरी होती है।

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