कमाल अमरोही ने बेहतरीन हिंदी फिल्में तो बनाई हीं, कई उम्दा कलाकार भी दिये

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‘महल’ फिल्म के एक और मिठास भरे, लता जी के गाए गीत ‘मुश्किल है बहुत मुश्किल’ की खासियत रही कि कमाल अमरोही के डायरेक्शन में इसे महज एक सिंगल शॉट में फिल्मा लिया गया था।

कमाल अमरोही बॉलीवुड में एक ऐसे गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक के नाम से जाने जाते हैं जिनकी फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में कई बड़े कलाकारों, गायकों का आगाज इस तरह से हुआ कि उनकी कामयाबी ने फिर कभी पीछे मुड़कर देखने का नाम न लिया। वर्ष 1949 में बनी, अशोक कुमार निर्मित हॉरर फिल्म ‘महल’ का नाम आपको भी याद होगा। इस फिल्म के निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर कमाल अमरोही थे। इस फिल्म का गीत-संगीत और स्क्रिप्ट इतनी गजब की थी जिससे न सिर्फ फिल्म की गायिका लता मंगेशकर के सिने कॅरियर को सही दिशा मिली वहीं इस फिल्म से अदाकारा मधुबाला को फिल्म जगत में स्टार रूप में पहचान मिली। इस फिल्म के गीत ‘आएगा आने वाला’ को तो आज की जनरेशन को भी गाते सुना जा सकता है। ‘महल’ फिल्म के एक और मिठास भरे, लता जी के गाए गीत ‘मुश्किल है बहुत मुश्किल’ की खासियत रही कि कमाल अमरोही के डायरेक्शन में इसे महज एक सिंगल शॉट में फिल्मा लिया गया था। 

कमाल अमरोही का जन्म 17 जनवरी, 1918 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा ग्राम हुआ था। इनका नाम सैयद आमिर हैदर कमाल था, बॉलीवुड में उन्हें कमाल अमरोही के नाम से जाना गया। बॉलीवुड में कदम रखने से पहले कमाल अमरोही लेखक के रूप में एक उर्दू समाचार पत्र में नियमित रूप से स्तंभ लिखते थे। अखबार में कुछ समय तक काम करने के बाद वे कलकत्ता और फिर मुंबई आ गए। मुंबई पहुंचने पर प्रारंभ में कमाल अमरोही को मिनर्वा मूवीटोन की निर्मित कुछ फिल्मों जेलर, पुकार, भरोसा इत्यादि में संवाद लेखक के रूप में काम करने को मिला। इन फिल्मों से हालांकि कमाल अमरोही की कोई खास पहचान नहीं बन पाई किन्तु 1949 में बनी फिल्म ‘महल’ ने उन्हें बॉलीवुड में पूरी तरह स्थापित कर दिया। 

कमाल अमरोही के लेखन की एक खासियत रही कि फिल्मों में अपनी कोई स्क्रिप्ट या संवाद लिखने में कभी भी उन्होंने पेन का इस्तेमाल नहीं किया, लिखने के लिए वे हमेशा पेन्सिल का इस्तेमाल किया करते थे ताकि उसमें संशोधन साफ-सफाई से किए जा सकें।


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‘महल’ फिल्म की कामयाबी के बाद कमाल अमरोही ने कमाल पिक्चर्स और कमालिस्तान स्टूडियो की स्थापना की। इसी दौरान उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के महान डायरेक्टर के. आसिफ ( करीमुद्दीन आसिफ) की 1960 में प्रदर्शित फिल्म ‘मुगल ए आजम’ में डायलॉग लिखने का मौका मिला। इस फिल्म के डायलॉग इतने जबरदस्त थे कि इस फिल्म के लिए कमाल अमरोही को सर्वश्रेष्ठ डायलॉग राइटर का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। मुगल ए आजम में लिखा उनका डायलॉग “हमारा दिल भी कोई आपका हिंदुस्तान नहीं, जिस पर किसी बादशाह की हुकूमत चले” आज भी चर्चाओं में बोला सुना जाता है। 

‘महल’, ‘मुगल ए आजम’ और पाकीजा जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले कमाल अमरोही की तीन शादियां हुईं। उनकी पहली पत्नी का नाम ‘बानो’ और दूसरी पत्नी का नाम ‘महमूदी’ था। कमाल अमरोही की तीसरी पत्नी थीं बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी। मीना कुमारी से कमाल अमरोही की मुलाकात 1952 में फिल्म ‘तमाशा’ के सेट पर हुई थी। मीना कुमारी से कमाल अमरोही बहुत प्रभावित थे। मीना कुमारी से उनकी मोहब्बत को बॉलीवुड की चर्चित प्रेम कहानियों में गिना जाता है। हालांकि फिल्मी दुनिया की तरह कमाल की दुनिया में भी एक ऐसा मोड़ आया जिसकी वजह से मीना कुमारी से उनका निकाह ज्यादा समय नहीं चला और एक समय ऐसा भी आया जब इन दोनों का तलाक हो गया।

कमाल अमरोही निर्देशित सुपरहिट फिल्म ‘पाक़ीज़ा’ की शूटिंग तब शुरू हुई थी जब मीना कुमारी से उनकी मोहब्बत की शुरूआत ही थी, इस फिल्म को बनने में 14 साल लगे और जब यह फिल्म बनकर तैयार हुई तब तक कमाल और मीना कुमारी एक दूसरे से अलग हो चुके थे। ‘पाक़ीज़ा’ फिल्म का मशहूर गीत ‘मौसम है आशिकाना’ कमाल अमरोही ने मीना कुमारी के लिए ही लिखा था, इसे लिखते समय कमाल और मीना कुमारी की नाराजगी चरम पर थी। पाक़ीज़ा फिल्म के लिए लिखा उनका डायलॉग आपके पांव देखे... बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा, मैले हो जाएंगे... बहुत हिट डायलॉगों में है।

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वर्ष 1972 में मीना कुमारी की मौत के बाद कमाल अमरोही टूट से गए और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया हालांकि इसके लगभग 10 वर्ष बाद 1983 में कमाल ने खुद को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से एक बार फिर से फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया और फिल्म ‘रजिया सुल्तान’ का निर्देशन किया। ‘रजिया सुल्तान’ बॉक्स ऑफिस पर तो हिट नहीं हो पाई किन्तु इस फिल्म में कमाल के निर्देशन ने बहुत तारीफ बटोरी।

11 फरवरी 1993 को कमाल अमरोही दुनिया को अलविदा कह गए किन्तु उनकी फिल्मों, डायलॉग्स के जरिए आज भी वे बॉलीवुड इंडस्ट्री और हमारे बीच जिन्दा हैं। 

-अमृता गोस्वामी

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