Auto Sector में बड़ा ऐलान! अब 100% Ethanol पर चलेंगी गाड़ियां, Nitin Gadkari ने फाइल पर किए Sign

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 100 प्रतिशत एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में मंजूरी दे दी है, जो भारत की वैकल्पिक ईंधन नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
भारत में वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब देश में 100 प्रतिशत एथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में उपयोग करने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि उन्होंने इस संबंध में जरूरी नियमों वाली फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इसे आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है। देश के कई हिस्सों में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पहले से उपलब्ध है। अब नए फैसले के बाद ऐसे वाहनों का रास्ता खुलेगा जो पूरी तरह 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चल सकेंगे।
मौजूद जानकारी के अनुसार नए नियमों के तहत केवल 100 प्रतिशत एथेनॉल ही नहीं, बल्कि 85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण, 100 प्रतिशत जैव डीजल तथा हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण जैसे वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा देने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी।
बता दें कि नितिन गडकरी लंबे समय से एथेनॉल आधारित ईंधन के समर्थक रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में जब 100 प्रतिशत एथेनॉल से वाहन चलाने की बात की गई थी, तब कई लोगों ने इसे व्यावहारिक नहीं माना था। हालांकि घरेलू एथेनॉल उत्पादन में वृद्धि, नई तकनीक और सरकारी नीतियों के कारण अब यह संभव हो गया है।
इस फैसले के साथ वाहन उद्योग में भी नई गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। हाल ही में हीरो स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के ऐसे संस्करण पेश किए गए हैं जो 85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं। नितिन गडकरी ने यह भी संकेत दिया है कि अगले डेढ़ महीने के भीतर कई बड़ी वाहन कंपनियां एथेनॉल आधारित नए वाहन बाजार में उतार सकती हैं। इनमें टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और एमजी जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मारुति वैगनआर के एथेनॉल आधारित संस्करण का भी प्रदर्शन किया था। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम करना है। भारत हर साल पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर बड़ी राशि खर्च करता है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। दूसरी ओर एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का और अतिरिक्त अनाज जैसी कृषि उपज से किया जाता है। ऐसे में इसकी मांग बढ़ने से किसानों को भी अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है।
हालांकि इस दिशा में कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। एथेनॉल के भंडारण और वितरण की व्यवस्था पेट्रोल से अलग होती है। इसके लिए विशेष ईंधन केंद्रों और वितरण नेटवर्क की जरूरत होगी। इसके अलावा सभी मौजूदा वाहन 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने के लिए तैयार नहीं हैं। कई पुराने वाहनों के उपयोगकर्ता पुस्तिका में 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार आने वाले समय में सरकार और वाहन कंपनियों को वाहन अनुकूलता, वारंटी और ईंधन उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों पर भी स्पष्टता देनी होगी। इसके साथ ही सरकार विद्युत वाहन, जैव डीजल, सीएनजी, एलएनजी, हाइड्रोजन और हरित हाइड्रोजन जैसे अन्य विकल्पों पर भी काम कर रही है। नागपुर में जल्द ही हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और विशेष ईंधन केंद्रों की एक पायलट परियोजना भी शुरू की जाएगी। ऐसे में भारत का परिवहन क्षेत्र धीरे-धीरे बहु-ईंधन व्यवस्था की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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