त्योहारी सीजन में Zostel बुकिंग 50 प्रतिशत बढ़ी, हम्पी और ऋषिकेश बने पहली पसंद

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किफायती हॉस्टल शृंखला जोस्टेल की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर के दौरान त्योहारी यात्राओं के आरक्षण में जोरदार तेजी आई है। भारतीय पर्यटक अब लंबी छुट्टियों के बजाय औसतन दो रातों के छोटे टूर पसंद कर रहे हैं। अध्ययन में सामने आया कि अधिकांश यात्री चेक-इन से महज कुछ दिन पहले ही होटल बुक कर रहे हैं।

इस साल अक्टूबर से दिसंबर के दौरान त्योहारी यात्रा बुकिंग में सालाना आधार पर करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। किफायती हॉस्टल शृंखला जोस्टेल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में लगभग हर चार में एक यात्री ने एक से अधिक त्योहारी यात्राएं की थीं।

‘जोस्टेल फेस्टिव ट्रैवल पल्स 2026’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में त्योहारी सत्र अब केवल एक लंबी छुट्टी के बजाय कई छोटी-छोटी यात्राओं का दौर बनता जा रहा है। पिछले साल अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान 23 प्रतिशत यात्रियों ने दोबारा बुकिंग की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में लगभग 10 में एक यात्री दो या अधिक स्थानों पर रुका।

इसके अलावा, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2026 के नवंबर में ठहरने के लिए बुकिंग 43 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि त्योहारी सत्र की एक यात्रा औसतन दो रात की रही, जिसमें 10 में तीन यात्रियों ने चेक-इन वाले दिन ही बुकिंग कराई। लगभग 10 में छह लोगों ने यात्रा से तीन दिन पहले और 10 में सात लोगों ने एक सप्ताह के भीतर आरक्षण कराया।

एक महीने से अधिक समय पहले अपनी यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों की संख्या 10 में एक से भी कम रही। वर्ष 2026 के त्योहारी सत्र के लिए अब तक हम्पी, गोकर्ण, वर्कला, ऋषिकेश और जयपुर सबसे ज्यादा बुक किए गए स्थलों के रूप में उभरे हैं। सबसे तेजी से उभरते शीर्ष पांच स्थलों में तीन किन्नौर जिले में स्थित हैं।

जोस्टेल एवं जो वर्ल्ड के सह-संस्थापक और जो वर्ल्ड के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) धर्मवीर सिंह चौहान ने कहा, ‘‘त्योहारी सत्र अब सिर्फ एक यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कई यात्राओं का मौसम बन चुका है। जोस्टेल पर आने वाले 10 में तीन यात्री उसी दिन बुकिंग करते हैं जिस दिन वे पहुंचते हैं। कोई भी अगस्त में दिवाली की योजना नहीं बना रहा।

लोग काम खत्म करते हैं, जगह चुनते हैं और निकल पड़ते हैं। वे औसतन दो रात की छोटी यात्रा रखते हैं, और यही वजह है कि वे बार-बार यात्रा पर निकलते हैं।

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