FSSAI ने चाय में Acetamiprid और Imidacloprid कीटनाशकों की अधिकतम सीमा तय करने का रखा प्रस्ताव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार खाद्य नियामक ने चाय में दो कीटनाशकों के अधिकतम अवशेष स्तर तय करने के लिए मसौदा संशोधन अधिसूचित किए हैं। इसके तहत एसिटामिप्रिड के लिए 20 पीपीएम और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 पीपीएम की सीमा प्रस्तावित की गई है। इस कदम का उद्देश्य फसल संरक्षण के साथ उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियामकीय मानकों को स्पष्ट करना है।
खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ फसल संरक्षण की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चाय में दो कीटनाशकों- एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड के अवशेषों की अधिकतम सीमा (एमआरएल) तय करने का प्रस्ताव रखा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को एक सरकारी बयान में कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड नामक दो कीटनाशकों के अवशेषों की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के लिए मसौदा संशोधनों को अधिसूचित किया है। यह मसौदा विज्ञान आधारित खाद्य सुरक्षा नियमन और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने के एफएसएसएआई के जारी प्रयासों का हिस्सा है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषाक्त पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे में चाय में एसिटामिप्रिड के लिए 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (20 पीपीएम) और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (50 पीपीएम) की अधिकतम अवशेष सीमा प्रस्तावित की गई है। मंत्रालय ने कहा, प्रस्तावित सीमाओं का उद्देश्य कीटनाशकों के अवशेषों के लिए स्पष्ट नियामकीय मानक निर्धारित करना है, जिससे खाद्य सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुपालन, निगरानी और प्रवर्तन में सुविधा होगी। हालांकि, ये मसौदा विनियमों को अंतिम रूप दिए जाने के अधीन हैं।
चाय क्षेत्र के लिए प्रस्तावित सीमाओं से चाय उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं, खाद्य कारोबारियों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रवर्तन अधिकारियों को नियामकीय स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशकों के अवशेषों की कानूनी रूप से अनुमत अधिकतम मात्रा निर्धारित करती है। ये सीमाएं वैज्ञानिक आकलन के आधार पर तय की जाती हैं, जिसमें कीटनाशक अवशेषों से संबंधित आंकड़ों, आहार के माध्यम से उनके शरीर में पहुंचने की मात्रा और सुरक्षा से जुड़े प्रासंगिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
मंत्रालय ने बताया कि चाय में एसिटामिप्रिड के लिए प्रस्तावित 20 पीपीएम की सीमा जापान में निर्धारित 30 पीपीएम और अमेरिका में निर्धारित 50 पीपीएम की संबंधित सीमाओं से कम है। इमिडाक्लोप्रिड के लिए अधिकतम अवशेष सीमा भी अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स मानकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह प्रस्ताव कीटनाशकों के अवशेषों से संबंधित मानकों की समीक्षा और संशोधन के लिए एफएसएसएआई के व्यापक नियामकीय दृष्टिकोण का हिस्सा है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषाक्त पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2024 में भी उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों और वैश्विक प्रथाओं के मद्देनजर अधिकतम अवशेष सीमाओं की समीक्षा की गई थी। इससे पहले नियामकीय उपायों के तहत अधिक विषाक्तता वाले पाए गए 13 कीटनाशकों को सूची से हटाना भी शामिल था। मंत्रालय ने कहा, प्रस्तावित मानकों में कृषि उत्पादन के दौरान प्रभावी कीट प्रबंधन के महत्व को भी स्वीकार किया गया है।
उचित तरीके से और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार इस्तेमाल किए जाने पर कीटनाशक किसानों को फसलों को कीटों से बचाने, फसल के नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादकता बनाए रखने में मदद करते हैं। भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल 0.5 किलोग्राम से भी कम है, जो 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के वैश्विक औसत से काफी नीचे है।
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