GST Council: कई राज्यों में कारोबार के लिए एक ही पंजीकरण आवेदन पर होगा विचार

जीएसटी परिषद सात अक्टूबर की बैठक में कारोबारियों को एकल आवेदन के जरिये विभिन्न राज्यों में पंजीकरण की अनुमति देने के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है। इस नई व्यवस्था से एक राज्य में दर्ज विवरण दूसरे राज्यों के आवेदनों में अपने आप शामिल हो जाएगा। साथ ही अधिकारियों के लिए जरूरी दस्तावेजों की एक समान सूची तय करने पर भी मंथन होगा।
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर जीएसटी परिषद ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जिसके तहत कारोबारियों को एक ही आवेदन प्रक्रिया के जरिये कई राज्यों में जीएसटी पंजीकरण के लिए आवेदन करने की अनुमति होगी। इसके साथ ही कर अधिकारी किन दस्तावेजों की मांग कर सकते हैं, इसकी एक समान सूची भी तैयार की जा सकती है। कारोबार करने में आसानी बढ़ाने के उद्देश्य से परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक में बड़े कारोबारियों के लिए नए तथा सरल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण ‘फॉर्म’ पर विचार किए जाने की संभावना है।
फिलहाल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत 1.68 करोड़ से अधिक कारोबारी पंजीकृत हैं। नया पंजीकरण ‘फॉर्म’ भरना आसान होगा और हर चरण में मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, ‘फॉर्म’ में अपलोड किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची भी दी जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि नई पंजीकरण व्यवस्था लागू होने के बाद किसी राज्य में पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय कारोबारी द्वारा दी गई जानकारी दूसरे राज्यों में पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय स्वतः उपलब्ध हो जाएगी। यदि कोई कारोबारी कई राज्यों में पंजीकरण के लिए आवेदन करता है, तो वह सभी आवेदन एक साथ भर सकेगा। सूत्रों ने कहा कि ‘फॉर्म’ भरते समय दी गई जगह के आधार पर जीएसटी प्रणाली यह तय करेगी कि किस कार्यालय के पास संबंधित आवेदन का अधिकार क्षेत्र है।
परिषद अधिकारियों के लिए ऐसे दिशानिर्देश भी दे सकती है, जिसमें बताया जाएगा कि किन दस्तावेजों की मांग की जा सकती है, किस उद्देश्य से और किस समय उनकी जरूरत होगी तथा किन दस्तावेजों को पर्याप्त माना जाएगा। सूत्र ने कहा, ‘‘इससे जीएसटी पंजीकरण में राज्यों के बीच एकरूपता आएगी। एक राज्य में आवेदक से जो चीजें मांगी जाएंगी, वही दूसरे राज्य में भी आवेदक से मांगी जाएंगी।’’ जीएसटी परिषद ने सितंबर 2025 की बैठक में छोटे एवं कम जोखिम वाले कारोबारियों के लिए सरल जीएसटी पंजीकरण योजना को मंजूरी दी थी और इसे एक नवंबर, 2025 से लागू किया गया था।
इस योजना के तहत ऐसे कारोबारियों को तीन दिन के भीतर पंजीकरण दिया जाता है। जीएसटी प्रणाली डेटा विश्लेषण के आधार पर जिन छोटे व कम जोखिम वाले कारोबारियों की पहचान करती है या ऐसे आवेदक, जो खुद आकलन करते हैं कि उनकी उत्पादन कर देनदारी सीजीएसटी और एसजीएसटी/यूटीजीएसटी सहित प्रति माह 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं है, इस योजना का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें करीब 1.68 करोड़ जीएसटी पंजीकृत कारोबारियों में से 61 प्रतिशत शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय एवं राज्य वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद के समक्ष रखे जाने वाले पंजीकरण संबंधी बदलाव अब बाकी कारोबारियों को भी शामिल करेंगे। एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि एक ही आवेदन प्रक्रिया के जरिये कई राज्यों में जीएसटी पंजीकरण के लिए आवेदन करने की अनुमति देना पंजीकरण व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मोहन ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि इससे अभी एकल, समूचे भारत के लिए जीएसटी पंजीकरण व्यवस्था शुरू नहीं होगी।
राज्यवार अलग-अलग पंजीकरण जारी रहेंगे। हालांकि, मौजूदा जानकारी को आगे ले जाने और उचित अधिकार क्षेत्र तय करने वाली प्रणाली के साथ एक साथ कई राज्यों में पंजीकरण के लिए आवेदन करने की सुविधा अधिक केंद्रीकृत एवं सुगम पंजीकरण व्यवस्था की दिशा में स्पष्ट कदम है।’’ परिषद जीएसटी पंजीकरण में प्रमुख क्षेत्रों में बदलाव की प्रक्रिया को सरल बनाने और स्वतः मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है। जीएसटी के ‘बैकएंड’ प्रौद्योगिकी विश्लेषण के अनुसार, जीएसटी पंजीकरण में बदलाव के लिए आने वाले करीब 66 प्रतिशत आवेदन कंपनी के नाम में बदलाव, निदेशक, साझेदार या ‘कर्ता’ में बदलाव और कारोबार के अतिरिक्त स्थान के पते में बदलाव से संबंधित हैं।
पंजीकरण दस्तावेजों में बदलाव के लिए हर साल आने वाले 16 लाख आवेदनों में से करीब 10.5 लाख आवेदन इन क्षेत्रों में बदलाव के लिए होते हैं। केवल कारोबार के मुख्य स्थान में बदलाव के लिए संबंधित कर अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, जिन कारोबारियों को स्वतः प्रक्रिया के तहत तीन दिन के भीतर जीएसटी पंजीकरण दिया गया था, उनके ऐसे अनुरोध को भी स्वतः मंजूरी दे दी जाएगी।
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