'संकट को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है भारत': प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकान्त दास

Shaktikanta Das
ANI
रेनू तिवारी । Apr 9 2026 3:49PM

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकान्त दास ने गुरुवार को भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और वैश्विक उथल-पुथल के बीच इसकी मजबूती पर अटूट भरोसा जताया।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकान्त दास ने गुरुवार को भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और वैश्विक उथल-पुथल के बीच इसकी मजबूती पर अटूट भरोसा जताया। ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि भारत ने न केवल वैश्विक संकटों का सामना किया है, बल्कि हर चुनौती को एक नए अवसर में तब्दील कर और भी शक्तिशाली होकर उभरा है।

दास ने यहां एआईएमए (ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘प्रत्येक संकट में भारत ने अपने आप को बखूबी बचाये रखा और उसे अवसर में बदला। इतना ही नहीं चुनौतियों के बीच वास्तव में उल्लेखनीय रूप से मजबूत होकर उभरा है।’’ उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अलगाव, आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने और असमान वृद्धि के साथ ‘अस्थिर और तनावपूर्ण वातावरण’ का सामना कर रही है।

इसे भी पढ़ें: CAPF जवानों के सम्मान और हक के लिए Rahul Gandhi का संकल्प, बोले- खत्म होगी नाइंसाफी

इसमें जोखिम लगातार बना हुआ है। इस पृष्ठभूमि में, आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत की चुनौतियों से पार पाने की काबिलियत अकेले पूरी कहानी बयां नहीं करती। भारत ने उथल-पुथल के दौर को केवल सहन ही नहीं किया, बल्कि उससे गुजरते हुए खुद को महत्वपूर्ण रूप से रूपांतरित किया।’’

इसे भी पढ़ें: भारतीय बाजार में 'Volkswagen' की बड़ी छलांग: 2030 तक 5% हिस्सेदारी का लक्ष्य, इलेक्ट्रिक और CNG पर दांव

दास ने यह भी बताया कि इस मजबूती के कई आधार हैं, जिनमें वृहद आर्थिक स्थिरता, नीतियों के मोर्चे पर निरंतरता, बुनियादी ढांचा आधारित विकास और मजबूत घरेलू मांग शामिल हैं। शीर्ष अधिकारी ने मुद्रास्फीति नियंत्रण के महत्व का जिक्र करते हुए इसे आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। दास ने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति को अक्सर गरीबों पर कर के रूप में देखा जाता है। कम मुद्रास्फीति का अर्थ है उपभोक्ता के हाथों में खर्च करने की शक्ति में वृद्धि।’’ संकट के दौरान भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया।

‘‘उदार राजकोषीय और मौद्रिक नीति को समय पर वापस लिया गया, जिससे व्यवस्था में बुलबुले वाली स्थिति या अस्थिरता उत्पन्न नहीं हुई।’’ दास ने अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का भी उल्लेख किया। इनमें तीव्र डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे का विस्तार और इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे विनिर्माण क्षेत्रों में वृद्धि शामिल है। बाह्य मोर्चे पर उन्होंने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विविध साझेदारियों ने किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम कर दिया है। ‘‘हम अपने राष्ट्रीय हित में निर्णय लेते हैं।”

दास ने भारत को अस्थिर वैश्विक परिवेश में एक सुरक्षित आधार बताया, जो स्थिरता, भरोसा और दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाएं प्रदान करता है। उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसे समय में जब दुनिया का अधिकतर भाग संघर्ष, अस्थिरता और नीतिगत अनिश्चितता से प्रभावित है, भारत को अब एक सुरक्षित आधार के रूप में देखा जा रहा है।’’

दास ने कहा कि भविष्य की ओर देखा जाए तो जनसंख्या संबंधी लाभ और बढ़ती खपत से लेकर बुनियादी ढांचा विकास और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे भारत के वृद्धि के कारक संरचनात्मक और स्थायी हैं। उन्होंने कहा, “ये कोई चक्रीय अनुकूल परिस्थितियां नहीं हैं। ये संरचनात्मक, संवर्धित और स्थायी हैं।” दास ने कंपनियों को मजबूत होने, बही-खतों को सुदृढ़ करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और भविष्य की तैयारी के लिए निवेश करने की सलाह भी दी।

All the updates here:

अन्य न्यूज़