Inflation पर RBI में खींचतान: Sanjay Malhotra को राहत का भरोसा, पूनम गुप्ता ने दी Rate Hike की चेतावनी

Sanjay Malhotra
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Ankit Jaiswal । Aug 19 2026 7:43PM

आरबीआई के भीतर महंगाई को लेकर चल रहे गहन विश्लेषण के बीच गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुदरा मुद्रास्फीति के औसत 5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाते हुए भारतीय आर्थिक वृद्धि में स्थिरता का भरोसा दिया है। हालांकि, समिति के अन्य सदस्यों ने कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और अनियमित मानसून जैसे बाहरी जोखिमों को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की संभावना को खारिज करते हुए मौद्रिक सख्ती बरतने की आवश्यकता पर बल दिया है। नीतिगत दरों की भविष्य की दिशा अब आपूर्ति श्रृंखला के झटकों और घरेलू मांग के बीच के नाजुक संतुलन से निर्धारित होने की संभावना है।

महंगाई को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के भीतर इस समय अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के जारी हुए ब्योरे से पता चलता है कि गवर्नर संजय मल्होत्रा को महंगाई के दबाव में आगे राहत की उम्मीद है, जबकि समिति की सदस्य पूनम गुप्ता ने ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।

बुधवार को जारी बैठक के ब्योरे के मुताबिक, संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा महंगाई का बड़ा कारण आपूर्ति से जुड़े झटके हैं। अभी ऐसे बहुत कम संकेत हैं जिनसे यह माना जाए कि कीमतों का दबाव अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि मूल महंगाई फिलहाल सीमित स्तर पर बनी हुई है।

गवर्नर के अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई औसतन करीब 5 प्रतिशत रह सकती है। उनका मानना है कि महंगाई तीसरी तिमाही में अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि, महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन फिलहाल वे नियंत्रण में हैं।

संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी भरोसा जताया है। उनका कहना है कि आगे भी देश की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रह सकती हैं। यानी महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ने के बावजूद रिजर्व बैंक को आर्थिक वृद्धि की बुनियाद में फिलहाल बड़ी कमजोरी नजर नहीं आ रही है।

वहीं, मौद्रिक नीति समिति की सदस्य पूनम गुप्ता का रुख इससे कुछ अलग और ज्यादा सख्त नजर आया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ब्याज दरों में आगे और कटौती की गुंजाइश दिखाई नहीं देती। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि साल के दौरान किसी समय ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत सामने आ सकती है।

पूनम गुप्ता ने कच्चे तेल की कीमतों को भी महंगाई के लिए बड़ा जोखिम माना है। उनके मुताबिक, पूरे साल कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। अगर ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन, उत्पादन और दूसरी वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि भारत में महंगाई पर खाद्य वस्तुओं के दाम, ईंधन और मौसम का असर काफी ज्यादा रहता है। इसी संदर्भ में समिति के सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने अनियमित मानसून और अल नीनो की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बारिश के वितरण में बदलाव और कृषि उत्पादन पर इसका असर महंगाई के लिए सीधा जोखिम पैदा कर सकता है।

समिति के सदस्य राम सिंह ने भी महंगाई की दिशा पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते समय महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों पहलुओं पर बराबर ध्यान देना जरूरी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, बैठक के ब्योरे से साफ है कि रिजर्व बैंक के भीतर महंगाई को लेकर पूरी तरह एक जैसी राय नहीं है। एक तरफ महंगाई में आगे नरमी की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ तेल, मानसून और खाद्य कीमतों जैसे जोखिम ब्याज दरों के अगले फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े मौद्रिक नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।

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