Japanese Companies का भारत पर बढ़ा भरोसा, Q1 में 5.71 अरब Dollar का आया FDI

Japan FDI
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Ankit Jaiswal । Oct 11 2026 7:42PM

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत बना। अप्रैल से जून के बीच जापान से 5.71 अरब डॉलर का निवेश आया, जो पिछले पूरे वित्त वर्ष से अधिक है। बैंकिंग, तकनीक, वाहन उद्योग और डिजिटल ढांचे में जापानी कंपनियों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है।

भारत में विदेशी निवेश को लेकर जापान की दिलचस्पी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान जापान भारत में FDI निवेश करने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में जापान से भारत को 5.71 अरब डॉलर का निवेश मिला है। यह रकम पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में जापान से आए 3.74 अरब डॉलर के निवेश से भी काफी अधिक है।

बता दें कि अप्रैल-जून तिमाही में जापान से आया निवेश भारत में कुल 19.81 अरब डॉलर के शेयर आधारित विदेशी निवेश का करीब 29% रहा। इससे भारतीय बाजार और उद्योगों में जापानी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी का पता चलता है। जापान ने 2025 में अगले 10 वर्षों के दौरान भारत में 10 लाख करोड़ येन निवेश करने का लक्ष्य रखा था। भारतीय रुपया में यह रकम करीब 7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने जापान का दौरा कर दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की थी। नागोया यात्रा के दौरान उन्होंने बताया कि जापानी कंपनियां घोषित लक्ष्य के तहत भारत में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी हैं।

डेलॉइट इंडिया के साझेदार अनिल तलरेजा के मुताबिक, जापान की वित्तीय संस्थाएं और बड़े निवेशक भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, धीमी आर्थिक वृद्धि, मजदूरी और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी तथा आयात शुल्क से जुड़े जोखिमों के कारण जापानी कंपनियां अपनी आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव कर रही हैं। ऐसे में भारत उनके लिए एक अहम विकल्प बन रहा है।

तलरेजा के अनुसार, भारत जापान से केवल पैसा ही नहीं, बल्कि तकनीक, उत्पादन क्षमता, आपूर्ति व्यवस्था और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की क्षमता भी हासिल कर सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जरूरी खनिज, बैटरी, ऊर्जा और नई पीढ़ी के परिवहन साधन दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बन सकते हैं। वाहन उद्योग में जापानी कंपनियों और उनके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं ने उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश किया है।

हालांकि, पहली तिमाही में निवेश बढ़ने की मुख्य वजह नई फैक्ट्रियां लगाना नहीं थी। तलरेजा के मुताबिक, बड़े वित्तीय सौदों और कंपनियों के अधिग्रहण ने इसमें अहम भूमिका निभाई। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, तकनीक, डिजिटल ढांचे और वैश्विक क्षमता केंद्रों में जापानी निवेश का हिस्सा बढ़ रहा है। अब जापानी कंपनियां भारत को उत्पादन केंद्र के साथ-साथ बड़े ग्राहक बाजार और तकनीकी विकास के ठिकाने के रूप में भी देख रही हैं।

गौरतलब है कि अप्रैल में जापान के एमयूएफजी बैंक ने श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की 20% हिस्सेदारी 39,618 करोड़ रुपये यानी करीब 4.4 अरब डॉलर में खरीदी थी। यह भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सबसे बड़ा सीमा पार निवेश बताया गया। एसएमबीसी-यस बैंक और मिजुहो-अवेंडस से जुड़े सौदे भी जापानी वित्तीय संस्थाओं की बढ़ती मौजूदगी दिखाते हैं।

जापानी निवेशकों को मदद देने के लिए भारत ने 9 राज्यों में 12 जापानी औद्योगिक टाउनशिप बनाई हैं। यहां जापान से जुड़ी सुविधाएं, अनुवाद और कारोबारी सहायता, जापानी मानकों के अनुरूप सेवाएं और मंजूरियों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था उपलब्ध है।

वहीं, निवेश के मामले में सिंगापुर 5.22 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। मॉरीशस से 2.4 अरब डॉलर, नीदरलैंड से 1.38 अरब डॉलर और अमेरिका से 1.35 अरब डॉलर का निवेश आया है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में विदेशी निवेश के लिए जापान के साथ-साथ दूसरे बड़े आर्थिक साझेदार भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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