Nirmala Sitharaman बोलीं, भारत 10 प्रतिशत से अधिक की Economic Growth हासिल कर सकता है

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बेंगलुरु में आईआईटी मद्रास पूर्व छात्र संघ के कार्यक्रम में देश की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए सभी क्षेत्रों में नवाचार और तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा।
(तस्वीर के साथ) बेंगलुरु, 26 सितंबर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को भसोसा जताया कि भारत 10 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने सभी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी और नवाचार को बड़े पैमाने पर अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। आईआईटी मद्रास पूर्व छात्र संघ द्वारा यहां आयोजित एक परिचर्चा में उन्होंने कहा कि उच्च आर्थिक वृद्धि दर आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की ओर देश की यात्रा को गति देने में मदद करेगी, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों की ओर से बहुत अधिक प्रयास करने होंगे।
सीतारमण ने कहा, 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करना संभव है, और मैं यह बात केवल आप सभी का उत्साह बढ़ाने के लिए नहीं कह रही हूं। यह वास्तव में संभव है। उन्होंने 2015 के बाद से स्टार्टअप के तेजी से हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
सीतारमण ने कहा, हमारे यहां नकारात्मक बातें करने वालों की कमी नहीं है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें भारत के विफल होने पर परोक्ष रूप से खुशी मिलती है। हम कतई ऐसा बर्दाश्त नहीं कर सकते।
हमें ऐसे लोगों को सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि तकनीकी हस्तक्षेपों ने उत्पादकों को बाजारों से जोड़ने और उत्पादकता में सुधार लाने में मदद की है। उन्होंने फसल की कटाई में तेजी लाने और अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने में तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण दिया।
साथ ही उन्होंने उन भूखंडों के सटीक मानचित्रण के लिए ड्रोन के उपयोग का जिक्र किया, जिनका पहले केवल हाथों से सर्वेक्षण किया जाता था। उन्होंने कहा, प्रौद्योगिकी के इस तेज प्रसार के साथ स्टार्टअप में होने वाले नवाचारों को हर क्षेत्र में पहुंचना होगा। सीतारमण ने उर्वरक वितरण में चोरी रोकने के लिए पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनों के उपयोग का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि प्रायोगिक परीक्षण के दौर से गुजर रही यह पीओएस प्रणाली किसान, भूमि और बोई गई फसल का विवरण दर्ज करती है। यह किसानों को मिट्टी, सिंचाई और फसल की स्थिति के आधार पर उर्वरक की आवश्यक मात्रा की जानकारी भी उपलब्ध कराती है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि उर्वरक खरीदने का विकल्प किसानों के पास ही रहेगा, जबकि यह तकनीक केवल उन्हें यह बताएगी कि उनकी फसल के लिए कितनी मात्रा पर्याप्त हो सकती है।
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