अनिवासी भारतीय एफसीएनआर जमा के जरिये भारत ला सकते हैं 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा: विशेषज्ञ

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विशेषज्ञों का अनुमान है कि अनिवासी भारतीय (एनआरआई) एफसीएनआर पहल के तहत भारत में 80 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की रणनीति के तहत बैंक वर्तमान में इन जमाओं पर आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सके।

अनिवासी भारतीय (एनआरआई) मौजूदा विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) पहल के तहत भारत में 70 से 80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। सिंगापुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने जानकारी दी है कि इस योजना के तहत बैंक एक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) की सिंगापुर शाखा द्वारा आयोजित एक वैश्विक वेबिनार में विस्तार से चर्चा की गई।

एफसीएनआर योजना एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) को अपनी विदेशी कमाई को सुरक्षित रूप से भारतीय बैंकों में जमा करने और उस पर अच्छा प्रतिफल प्राप्त करने का अवसर देती है। यह पारंपरिक सावधि जमा की तरह ही काम करता है, लेकिन इसकी खास बात यह है कि निवेश की गई राशि भारतीय रुपये में परिवर्तित होने के बजाय विदेशी मुद्रा में ही बनी रहती है। इससे निवेशकों को मुद्रा विनिमय की दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करने और रुपये को मजबूती देने की रणनीति के तहत बैंकों को एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति दी है। आईसीएआई की सिंगापुर शाखा के चेयरमैन संजय गट्टानी के अनुसार, यह पहल 30 सितंबर 2026 तक के लिए खुली है और इसके माध्यम से अब तक लगभग 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं।

संजय गट्टानी ने बताया कि इस प्रकार के विदेशी निवेश से भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी और साथ ही प्रवासी भारतीयों को देश के विकास में सीधे योगदान देने का अवसर भी मिलेगा। 15 जुलाई को आयोजित इस वेबिनार में दुनियाभर से करीब 1,800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, मान्यता प्राप्त निवेशक, कारोबारी नेता और वित्त क्षेत्र के पेशेवर शामिल थे।

इस कार्यक्रम में एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी और भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। उन्होंने निवेशकों को एफसीएनआर ढांचे, निवेश प्रक्रिया, नियामक आवश्यकताओं और कराधान से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। आईसीएआई सिंगापुर शाखा के वाइस चेयरमैन कुशल जाजू ने बताया कि संवाद सत्र के दौरान निवेशकों की शंकाओं का समाधान किया गया, जिससे उन्हें निवेश के व्यावहारिक पहलुओं को समझने में आसानी हुई।

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