SEBI ने FPI के लिए डिजिटल PoA को दी मंजूरी, कस्टोडियन सेवा होगी अधिक आसान

Sebi Allows digital power of attorney
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पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के पंजीकरण को सुगम बनाने के उद्देश्य से डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित पावर ऑफ अटॉर्नी देने की व्यवस्था शुरू की है। इस संशोधित व्यवस्था के तहत एफपीआई अपने कस्टोडियन के पक्ष में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार डिजिटल हस्ताक्षर वाला दस्तावेज जारी कर सकेंगे। सेबी के अनुसार यह कदम एफपीआई पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की मुहिम का हिस्सा है और यह नियम 20 अगस्त, 2026 से प्रभावी होगा।

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाते हुए उन्हें अपने ‘संरक्षक’ को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) देने की अनुमति दे दी है। सेबी ने बृहस्पतिवार को कहा कि संशोधित नियमों के तहत एफपीआई अपने कस्टोडियन या संरक्षक के पक्ष में पीओए जारी कर सकता है। इसमें एफपीआई का पता दर्ज होना चाहिए और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये दस्तावेज पर दस्तखत किए जा सकते हैं।

पीओए वह दस्तावेज है जिसके जरिये एफपीआई अपने ‘कस्टोडियन’ को उसकी ओर से काम करने के लिए अधिकृत करता है। एफपीआई के लिए ‘कस्टोडियन’ एक ऐसी वित्तीय संस्था होती है, जो निवेशकों की प्रतिभूतियों और परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने तथा उनका प्रबंधन करने का काम करती है। नियामक ने कहा कि यह कदम एफपीआई पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के उसके लगातार जारी प्रयासों का हिस्सा है।

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इसके तहत सेबी पहले भी एफपीआई पंजीकरण, पैन, बैंक और डीमैट खातों के लिए साझा आवेदन फॉर्म (सीएएफ), पंजीकरण दस्तावेजों पर भारतीय डिजिटल हस्ताक्षर की अनुमति और सीएएफ पोर्टल में डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा जैसे कदम उठा चुका है। सेबी के मुताबिक, इस परिपत्र के प्रावधान 20 अगस्त, 2026 से प्रभावी होंगे।

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