RBI के लिस्टिंग नियमों के बीच Noel Tata का दांव, Tata Sons के पुनर्गठन पर विचार का प्रस्ताव

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अभिनय आकाश । Sep 22 2026 2:15PM

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस को पब्लिक लिस्टिंग से बचाने के लिए इसके पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कंपनी को कई हिस्सों में बांटने का सुझाव है ताकि वह अनलिस्टेड बनी रहे। यह प्रस्ताव आरबीआई द्वारा टाटा संस की रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज होने के बाद सामने आया है।

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' के रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद इस प्राइवेट कंपनी को पब्लिक लिस्टिंग से बचाना है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा ने टाटा संस को कई अलग-अलग कंपनियों में बांटने का प्रस्ताव दिया है। ऐसा करने से कंपनी उन रेगुलेटरी सीमाओं (regulatory thresholds) के दायरे में बनी रह सकती है, जिनकी वजह से अभी उसे पब्लिक होने की ज़रूरत पड़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि यह प्रस्ताव 17 सितंबर को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में रखा गया था। यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि बोर्ड इस प्रस्ताव पर विचार करेगा या नहीं। टाटा संस में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि होल्डिंग कंपनी को अनलिस्टेड ही रहना चाहिए। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा टाटा संस की रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्ज़ी को खारिज किए जाने के बाद, टाटा ट्रस्ट्स दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहा है।

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प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल है?


ET की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) के कई रूप हो सकते हैं, जैसे डीमर्जर (कारोबार को अलग करना), एसेट्स को सब्सिडियरी कंपनियों में ट्रांसफर करना, मर्जर (विलय) या कोई बड़ी व्यवस्था योजना (scheme of arrangement)। टाटा संस के बड़े आकार और उसके विविध बिजनेस पोर्टफोलियो को देखते हुए, इस तरह की रीस्ट्रक्चरिंग में रेगुलेटरी, कमर्शियल और टैक्स से जुड़ी जटिलताएं आ सकती हैं। टाटा संस कई प्रमुख ग्रुप कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है, जिनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कैपिटल, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अग्रटास शामिल हैं। यह प्रस्ताव तब आया है जब टाटा संस को 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी' के तौर पर क्लासिफ़ाई किए जाने के बाद एक रेगुलेटरी ज़रूरत को पूरा करना पड़ रहा है। कंपनी ने अपना कर्ज़ चुकाने के बाद अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश की थी, लेकिन RBI ने उस एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर दिया।

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लिस्टिंग बनाम रीस्ट्रक्चरिंग


यह प्रस्ताव टाटा संस के अंदर उसके भविष्य के स्ट्रक्चर को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच आया है। 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में, बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच सालों के लिए टाटा संस का चेयरमैन फिर से नियुक्त करने के पक्ष में वोट किया। रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने इस दोबारा नियुक्ति और लिस्टिंग की दिशा में बढ़ने, दोनों का विरोध किया। ET की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, RBI के फ़ैसले के बाद होल्डिंग कंपनी ने संभावित पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है और मार्केट में एंट्री के लिए फरवरी 2027 को एक संभावित इंटरनल टारगेट के तौर पर देखा जा रहा है।

SP ग्रुप का बाहर निकलना अभी भी एक मुद्दा बना हुआ है


रीस्ट्रक्चरिंग का असर शापूरजी पल्लोंजी ग्रुप पर भी पड़ सकता है, जिसके पास टाटा संस की लगभग 18.37% हिस्सेदारी है और जो इसकी लिस्टिंग का समर्थन करता रहा है। SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉर्पोरेशन और साइरस इन्वेस्टमेंट्स के ज़रिए है और इसे लोन के बदले गिरवी रखा गया है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप ने जुलाई में ₹21,500 करोड़ की रीफाइनेंसिंग पूरी की थी और 18 महीनों के अंदर लिस्टिंग या शेयर बेचकर टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर पैसे जुटाने की योजना के संकेत दिए थे।

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