TCS का दावा: अमेरिका में आईटी कंपनियों को देश के आधार पर नहीं बनाया जा रहा निशाना

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में प्रौद्योगिकी कंपनियों पर हालिया पाबंदियां रोजगार संवेदनशीलता से जुड़ी हैं, न कि उनके मूल देश से। कंपनी के सीईओ के. कृतिवासन के अनुसार ग्रीन कार्ड कार्यक्रम निलंबन का उनके कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मानना है कि अमेरिका की ओर से प्रौद्योगिकी कंपनियों को उनके देश के आधार पर निशाना बनाए जाने के आसार नहीं हैं। पिछले सप्ताह ग्रीन कार्ड आवेदन कार्यक्रम को निलंबित करने जैसे कदम स्थानीय स्तर पर रोजगार को लेकर संवेदनशीलता के कारण उठाए गए हैं। टीसीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि कंपनियां अमेरिका के प्रौद्योगिकी तंत्र में गहराई से जुड़ी हुई हैं और महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।
कृतिवासन ने यहां कंपनी के कॉरपोरेट मुख्यालय में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि सरकारें वास्तव में कंपनियों के देश के आधार पर इस मुद्दे को देखेंगी। मेरा मानना है कि सरकारें रोजगार के नजरिये से विचार कर रही हैं।’’ उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को लेकर संवेदनशीलता के कारण सरकारें टीसीएस समेत आठ कंपनियों के खिलाफ पिछले सप्ताह की गई कार्रवाई जैसे कदम उठा रही होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले सप्ताह के फैसले का टीसीएस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
सीईओ ने कहा कि टीसीएस अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार कर्मचारियों को अमेरिका भेजती रही है। कंपनी ने पिछले साल केवल करीब 10 ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि एच-1बी वीजा के लिए कुल आवेदन भी 300 से कम थे।
एच-1बी वीजा के कई आवेदन उन लोगों के थे, जो पहले से ही अमेरिका में रह रहे हैं। इससे उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत से किसी नए कर्मचारी को अमेरिका नहीं भेजा गया था। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव और कंपनी के नजरिये के बारे में पूछे जाने पर कृतिवासन ने कहा कि टीसीएस अमेरिका में दीर्घकालिक रणनीति के साथ काम कर रही है।
अमेरिका राजस्व के लिहाज से उसका सबसे बड़ा बाजार है और चुनाव के नतीजों से उसकी रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में टीसीएस कारोबार करती है, वहां की गतिविधियों में पूरी तरह शामिल होने के प्रयास के तहत कंपनी स्थानीय लोगों को नौकरी देने पर ध्यान देती है। अमेरिका में कंपनी के 30,000 से अधिक कर्मचारियों में आधे से ज्यादा स्थानीय लोग हैं।
अमेरिका में अगले पांच साल में 15,000 और लोगों को रोजगार देने की पहले की गई घोषणा के बारे में पूछे जाने पर टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनी कौशल संबंधी जरूरतें पूरी करने वाले विविध पृष्ठभूमि के लोगों को नियुक्त करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विभिन्न क्षेत्रों में काम करने और वहां की विविधता से लाभ उठाने का गहरा अनुभव है।’’ सुब्रमण्यम ने यह भी माना कि इनमें भारतीय मूल के लोग हो सकते हैं, जिनमें अमेरिका में जन्मे या पहले वहां जाकर बसे लोग भी शामिल हैं।
अमेरिका द्वारा टीसीएस समेत आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े एक प्रमुख कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा कि आव्रजन और कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही ‘‘दो अलग-अलग मुद्दे’’ हैं और इन्हें एक ही नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों को पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें कार्य वीजा की कड़ी जांच और एच-1बी वीजा आवेदकों के लिए बढ़ती लागत शामिल हैं।
अमेरिका में हालिया घटनाक्रम से 300 अरब डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग के सबसे बड़े बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसका असर उन प्रौद्योगिकी कंपनियों पर पड़ सकता है, जो कुशल पेशेवरों की सीमापार आवाजाही पर निर्भर हैं।
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