मायावती पर प्रधानमंत्री मोदी के कारण अखिलेश का यूटर्न

By अजय कुमार | Publish Date: May 14 2019 12:23PM
मायावती पर प्रधानमंत्री मोदी के कारण अखिलेश का यूटर्न
Image Source: Google

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी भारतीय जनता पार्टी विपक्ष पर इसी बात का तंज कसते हैं कि मोदी नहीं तो कौन? और विपक्ष इसी बात पर हर बार पिछड़ता नजर आ रहा था, लेकिन अब पांच चरण पूरे होने के बाद मायावती ने खुले तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। और उनका साथ अखिलेश यादव ने भी दे दिया है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जबर्दस्त 'यूटर्न' लेकर अब यूपी से ही नया पीएम आयेगा की जगह कहने लगे हैं कि बसपा सुप्रीमों मायावती को प्रधानमंत्री बनता देख मुझे खुशी होगी। पांच चरणों के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद की पंसद के लिए अखिलेश की जुबान पर अगर खुलकर बसपा सुप्रीमों मायावती का नाम आता है तो यह अप्रत्याशित नहीं, उनकी सियासी मजबूरी है। इसी तरह की मजबूरी अखिलेश 2017 के विधान सभा चुनाव में भी (जब कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन हुआ था) दिखा चुके थे, तब उन्होंने कहा था कि वह तो सीएम के लिए हैं जब पीएम का चुनाव होगा तो राहुल गांधी ही इसके हकदार होंगे, लेकिन दो बरस के भीतर ही अखिलेश की पीएम की पसंद मायावती बन गई हैं।
भाजपा को जिताए

दरअसल, माया को पीएम बनता देखने की अखिलेश की कथित खुशी के पीछे की वजह भी मोदी ही हैं। मोदी ने गत दिनों प्रतापगढ़ की एक रैली में बसपा सुप्रीमों मायावती को सचेत किया था कि वह कांग्रेस से मिला हुआ है। प्रतापगढ़ की जनसभा में मोदी जी ने मायावती जी के लिए एक राजनैतिक फिलर छोड़ते हुए कहा था कि मायावती जी, अखिलेश से होशियार रहें, क्योंकि वह कांग्रेस से मिला हुआ है। दरअसल, मोदी एनडीएक को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने पर भविष्य के गठबंबधन के दोस्तों संभावनाओं पर काम कर रहे थे, जिसमें उन्हें मायावती की जरूरत पड़ सकती है।
 
बहरहाल, मोदी का यह बयान सटीक निशाने पर लगा। मोदी ने कहा तो कहा, असल में बसपा सुप्रीमों को इस बात का भली प्रकार से अहसास था कि अखिलेश यादव कांगे्रस के प्रति नरमी का रूख लेकर चल रहे थे। कांग्रेस के प्रति अखिलेश के तेवर मायावती से गठबंधन के बाद तब सख्त हुए जब बसपा सुप्रीमों ने कांग्रेस−भाजपा को एक ही श्रेणी में खड़ा किया। उन्होंने अपने ऊपर बैठाई गई जांच के लिए भाजपा के साथ कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद अम्बेडकरनगर की एक जनसभा में बसपा प्रमुख मायावती ने अम्बेडकर नगर में जल्द उप−चुनाव की संभावना व्यक्त करते हुए संकेत दिए थे कि अगर सब कुछ अच्छा रहा तो वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगी और प्रधानमंत्री भी बन सकती हैं। अब अखिलेश के लिए कुछ कहने को बचा नहीं था, इसीलिए उन्होंने मायावती के बयान के दो दिन बाद ही माया के पीएम वाले बयान की खबर पर मुहर लगा दी है और उन्होंने कहा है कि मैं भी उन्हें प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहता हूं।
मुम्बई के अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए अखिलेश ने कहा, 'गठबंधन होने के बाद मुझे उनके बारे में जानने का काफी मौका मिला है,मैंने उनमें काफी अच्छाइयां भी देखी हैं। वह काफी अनुशासित हैं और मुझसे अनुभवी भी हैं।' सपा प्रमुख ने कहा, 'उनके और हमारे बीच में एक जेनरेशन गैप है, उन्हें प्रधानमंत्री बनता देख मुझे खुशी होगी, इसके लिए मैं पूरी मेहनत करने के लिए भी तैयार हूं। वहीं, वह भी मुझे उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री देखने के लिए तैयार हैं।'  
 
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी भारतीय जनता पार्टी विपक्ष पर इसी बात का तंज कसते हैं कि मोदी नहीं तो कौन? और विपक्ष इसी बात पर हर बार पिछड़ता नजर आ रहा था, लेकिन अब पांच चरण पूरे होने के बाद मायावती ने खुले तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। और उनका साथ अखिलेश यादव ने भी दे दिया है।


बता दें कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां 80 लोकसभा सीटें हैं. सपा−बसपा मिलकर इन सीटों पर लड़ रहे हैं और उनके साथ रालोद भी है। चुनाव से पहले आए ओपिनियन पोल के अनुसार सपा−बसपा को इन चुनाव में बड़ा फायदा हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो दोनों पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ सकती हैं.गौर करने वाली बात ये भी है कि विपक्ष में कई ऐसे चेहरे हैं जो प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे चेहरे हैं जिनपर कई विपक्षी दल सहमत हो पाते हैं.
 
मायावती की दावेदारी इनमें प्रबल इसलिए भी मजबूत होती है क्योंकि वह अनुभवी नेता होने के साथ−साथ दलित भी हैं, ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि इसी वजह से कोई मुखर तौर पर उनका विरोध नहीं करेगा और जब परिस्थितियां बनेंगी तो उनका समर्थन करने के लिए हर कोई तैयार हो सकता है।
 
अजय कुमार
 

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप   



Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.

Related Story

Related Video