राजनीति के कीचड़ में कूद कर श्रीधरन जी अपना कद क्यों छोटा कर रहे हैं?

राजनीति के कीचड़ में कूद कर श्रीधरन जी अपना कद क्यों छोटा कर रहे हैं?

श्रीधरनजी से मेरा सवाल यह है कि राजनीति के कीचड़ में कूद कर क्या वे देश का ज्यादा भला कर सकेंगे? उन्होंने जिन प्रदेशों में मेट्रो और रेल बनाई और नाम कमाया, उनमें क्या उस समय भाजपा की सरकारें थीं ? उनके लिए तो सभी पार्टियां बराबर हैं।

मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को देश में कौन नहीं जानता ? जितने भी पढ़े-लिखे और समझदार लोग हैं, उन्हें पता है कि दिल्ली, कोलकाता और कोंकण में मेट्रो और रेल लाइन का चमत्कार कर दिखाने वाले सज्जन का नाम क्या है। दिल्ली की मेट्रो ऐसी है, जैसी कि दुनिया की कोई भी मेट्रो है। मैंने अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान आदि की मेट्रो-रेलों में कई बार यात्राएं की हैं। बस, जापानी मेट्रो की तेज गति को छोड़ दें तो भारत की मेट्रो शायद दुनिया की सबसे बढ़िया मेट्रो मानी जाएगी। इसका श्रेय उसके चीफ इंजीनियर श्री श्रीधरन को है। अब वे भाजपा में आ गये हैं। राजनीति में उनका यह प्रवेश उनकी मर्जी से हो रहा है। उन पर किसी का कोई दबाव नहीं है।

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उन्होंने जब तक सरकारी नौकरी की, तब तक उनका जीवन इतना स्वच्छ रहा है कि उन्हें किसी आरोप से बचने के लिए किसी सत्तारुढ़ पार्टी की शरण में जाने की जरूरत भी नहीं है। फिर भी 88 साल की आयु में वे भाजपा में क्यों शामिल हुए ? उनका कहना है कि वे केरल में रहते हैं और वहां की कम्युनिस्ट सरकार ठीक से काम नहीं कर रही है। मई-जून में होने वाले प्रांतीय चुनाव में वह हारेगी। वे चुनाव भी लड़ेंगे। श्रीधरनजी से मेरा सवाल यह है कि राजनीति के कीचड़ में कूद कर क्या वे देश का ज्यादा भला कर सकेंगे? उन्होंने जिन प्रदेशों में मेट्रो और रेल बनाई और नाम कमाया, उनमें क्या उस समय भाजपा की सरकारें थीं ? उनके लिए तो सभी पार्टियां बराबर हैं। वे अपने आपको किसी एक पार्टी की जंजीर में क्या जकड़ रहे हैं ? वे तो सबके लिए समान रूप से सम्मानीय हैं। उनका सम्मान देश के किसी भी नेता से कम नहीं है। 

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देश और दुनिया के कई बड़े से बड़े नेताओं को हमने कुर्सी छोड़ते ही इतिहास के कूड़ेदान में पड़े पाया है। श्रीधरनजी जैसे लोग यदि उनकी श्रेणी में शुमार होने लगें तो हमें अफसोस ही होगा। इससे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा को यह कौन-सा ताजा बुखार चढ़ा है ? सर्वश्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, सुमित्रा महाजन जैसे निष्कलंक और दिग्गज भाजपा नेताओं को तो आपने घर बिठा दिया है, क्योंकि वे 75 साल से ज्यादा के हैं तो मैं पूछता हूं कि भाई-लोग, आप गणित भूल गए क्या ? क्या 88 का आंकड़ा 75 से कम होता है ? श्रीधरनजी के कंधे पर सवार भाजपा को केरल में वोट तो ज्यादा जरूर मिलेंगे लेकिन उनका कद छोटा हो जाएगा। एक राष्ट्रीय धरोहर, पार्टी-पूंजी बन जाएगी।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक