MS Dhoni Mentorship: झारखंड क्रिकेट का नया दौर, दलीप ट्रॉफी जीत से बढ़ी उम्मीदें

Mahendra Singh Dhoni
प्रतिरूप फोटो
X @BCCI
Ankit Jaiswal । Sep 11 2026 9:42PM

पूर्वी क्षेत्र की दलीप ट्रॉफी जीत ने झारखंड के उभरते क्रिकेट ढांचे की मजबूती को सिद्ध किया है। एमएस धोनी के मार्गदर्शन और ईशान किशन के शानदार प्रदर्शन ने राज्य के युवा खिलाड़ियों में नया आत्मविश्वास भरा है। यह सफलता झारखंड क्रिकेट के बुनियादी ढांचे में हो रहे सकारात्मक बदलावों को दर्शाती है।

घरेलू क्रिकेट से काफी पहले दूरी बना चुके धोनी अब भी रांची में युवा खिलाड़ियों के बीच नजर आते हैं और अपने अनुभव से उन्हें खेल की बारीकियां समझाते हैं। पूर्वी क्षेत्र की दलीप ट्रॉफी जीत ने झारखंड के उभरते क्रिकेट ढांचे की ताकत को भी सामने ला दिया है।

झारखंड क्रिकेट के लिए पूर्वी क्षेत्र की दलीप ट्रॉफी जीत सिर्फ एक खिताब नहीं है, बल्कि राज्य से निकल रही नई क्रिकेट प्रतिभाओं की बढ़ती ताकत का संकेत भी है। पूर्वी क्षेत्र ने गुरुवार को 2012 के बाद पहली बार दलीप ट्रॉफी अपने नाम की। इस सफलता में झारखंड के कई युवा खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई और उनके प्रदर्शन के पीछे महेंद्र सिंह धोनी की सलाह और अनुभव भी चर्चा में आया है।

कप्तान ईशान किशन ने फाइनल में दोनों पारियों को मिलाकर 350 से ज्यादा रन बनाए और टीम की जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उनके अलावा शिखर मोहन, कुमार कुशाग्र, मोहम्मद क़ुनैन कुरैशी और अनुकूल रॉय ने भी अभियान के दौरान महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि यह पूरी तरह पूर्वी क्षेत्र की सामूहिक सफलता थी। बंगाल से मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, अभिमन्यु ईश्वरन, सुदीप घरामी और शाहबाज अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ियों ने टीम को मजबूती दी। बिहार के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने भी सेमीफाइनल में टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक लगाकर सुर्खियां बटोरीं।

गौरतलब है कि झारखंड क्रिकेट से जुड़े लोगों के मुताबिक धोनी अब भी राज्य की क्रिकेट व्यवस्था पर करीबी नजर रखते हैं। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ के सचिव और पूर्व भारतीय खिलाड़ी सौरभ तिवारी ने बताया कि जब भी धोनी रांची में होते हैं और उनके पास समय होता है, वह खुद क्रिकेट मैदान पहुंचते हैं। ट्रेनिंग कैंप के दौरान वह युवा और अनुभवी खिलाड़ियों से बातचीत करते हैं और उन्हें अपनी बातें समझाते हैं।

सौरभ तिवारी के अनुसार, धोनी कई बार यह भी बताते हैं कि किन खिलाड़ियों पर नजर रखनी चाहिए। खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान वह सिर्फ तकनीक की बात नहीं करते, बल्कि उन्हें खेल को पढ़ने और परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लेने की सलाह देते हैं। शीर्ष स्तर पर सफलता के लिए यह मानसिक समझ काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बता दें कि झारखंड के पूर्व खिलाड़ी ईशांक जग्गी, जो अब राज्य की 23 वर्ष से कम आयु की टीम के कोच हैं, भी धोनी के प्रभाव को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके मुताबिक धोनी झारखंड से भारतीय टीम तक पहुंचने वाले पहले बड़े खिलाड़ी थे, जिन्होंने राज्य के युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि छोटे क्रिकेट केंद्र से आने वाले खिलाड़ी भी देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच सकते हैं।

जग्गी ने कहा कि रांची में रहने के दौरान धोनी मैदान पहुंचते हैं और खिलाड़ी तथा प्रशिक्षक उनसे अलग-अलग परिस्थितियों पर सलाह लेते हैं। पुरुषों के साथ महिला टीम के खिलाड़ियों को भी उनके अनुभव का फायदा मिलता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, झारखंड की यह प्रगति सिर्फ दलीप ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। पिछले साल ईशान किशन की अगुवाई में टीम ने पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी भी जीती थी। राज्य के पूर्व खिलाड़ी अब प्रशिक्षण, चयन और प्रशासन से जुड़कर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

ऐसे में धोनी झारखंड क्रिकेट के लिए सिर्फ अतीत की बड़ी पहचान नहीं, बल्कि नई पीढ़ी और भारतीय क्रिकेट के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं। ईशान किशन, कुमार कुशाग्र, शिखर मोहन, अनुकूल रॉय और मोहम्मद क़ुनैन कुरैशी जैसे खिलाड़ियों का उभरना बताता है कि झारखंड का अगला क्रिकेट अध्याय काफी मजबूत होने की उम्मीद हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़