कश्मीर में सुरक्षा बलों की नई नीति: तलाश करो, ठोक डालो, खूब ईनाम लो

By सुरेश डुग्गर | Publish Date: Dec 19 2018 12:38PM
कश्मीर में सुरक्षा बलों की नई नीति: तलाश करो, ठोक डालो, खूब ईनाम लो
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अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो सरकार ने ए डबल प्लस आतंकवादियों के मारने के लिए ईनाम राशि में अढ़ाई लाख की वृद्धि कर दी है। पहले इसके लिए 10 लाख रुपये मिलते थे और अब 12.50 लाख रुपये बतौर इनाम मिला करेंगे।

श्रीनगर। कश्मीर से आतंकियों के सफाए की खातिर सरकार और सुरक्षा बलों ने नई नीति लागू की है। आतंकियों को मारने की खातिर उन पर इनाम की राशि बढ़ा दी गई है। नतीजतन अब सुरक्षा बलों को इनाम कमाने की खातिर तलाश करो और ठोक डालो का टारगेट दे दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ नगण्य हो गई है और आतंकवाद कम घातक हो गया है। लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार कोई मौका आतंकियों को नहीं देना चाहती है। अतः उसने आतंकियों की मौतों पर प्रोत्साहनों को बढ़ाकर आतंकवादियों पर दबाव बनाए रखने का फैसला किया है।



 
अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो सरकार ने ए डबल प्लस आतंकवादियों के मारने के लिए ईनाम राशि में अढ़ाई लाख की वृद्धि कर दी है। पहले इसके लिए 10 लाख रुपये मिलते थे और अब 12.50 लाख रुपये बतौर इनाम मिला करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इसी तरह ए प्लस श्रेणी के आतंकवादी के लिए इनाम राशि 5 लाख रुपये से 7.50 लाख रुपये कर दी गई है। ए श्रेणी के आतंकवादियों के लिए राशि 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख कर दी गई है। बी-श्रेणी के आतंकवादियों के लिए यह 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये तक बढ़ गया है और सी-श्रेणी के लिए नकद प्रोत्साहन 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक बढ़ गया है।
 
ईनाम राशि जम्मू-कश्मीर पुलिस मुख्यालय द्वारा जिले के वरिष्ठ अधीक्षक पुलिस (एसएसपी) को जारी की जाती है जहां एक आतंकवादी की मौत होती है, आमतौर पर मौत के एक सप्ताह के भीतर। एसएसपी तब उस दल को पैसा वितरित करता है जिसने ऑपरेशन किया था। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि ए से ए और ए प्लस से ए डबल प्लस तक एक आतंकवादी को वर्गीकृत करना इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के अधिकार क्षेत्र में होता है।
 
ऐसा भी नहीं है कि ईनाम की राशि आसानी से अभियान दल को मिल जाती हो बल्कि पहले आतंकी की पहचान कई स्तरों पर सुनिश्चित की जाती है और फिर यह भी जांच की जाती है कि आतंकी को मारने के लिए तैनत सैंकड़ों जवानों में से आखिर किस टीम ने आतंकी को ढेर किया था और यह सुनिश्चित करने के लिए एक ऑडिट भी होता है कि पैसा सही लोगों को जा रहा है या नहीं। अधिकारियों के अनुसार ईनाम बढ़ाने का निर्णय पिछले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और भाजपा सरकार के शासनकाल के दौरान लिया गया था लेकिन उसे तब लागू नहीं किया गया था। जनवरी 2015 से, दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में 38 ईनामी आतंकवादी मारे गए हैं। इनमें से अधिकतर आतंकवादी सुरक्षा बलों द्वारा किए गए विद्रोह विरोधी अभियानों के दौरान अपने ठिकानों के अंदर मारे गए हैं।


 
 
इतना जरूर था कि मच्छेल फर्जी मुठभेड़ मामले के दौरान सुरक्षा बलों के लिए दिए गए ईनामों के बाद यह प्रोत्साहन आलोचनाओं का शिकार हुआ था। तब इसकी जबरदस्त आलोचना हुई थी कि अधिकारियों ने ईनाम की खातिर मासूम नागरिकों को मार डाला था जो सच भी साबित हुआ था। जानकारी के लिए 29 अप्रैल, 2010 की रात को तीन युवाओं, शेजाद अहमद (27), रियाज अहमद (20) और उत्तर कश्मीर के बारामुल्ला जिले के नदीहल गांव के मोहम्मद शफी लोन (19) मच्छिल सेक्टर के कालारोस गांव में कुपवाड़ा में सेना द्वारा नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर कथित फर्जी मुठभेड़ में मार दिए गए थे। युवाओं को पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) बशीर अहमद, उनके सहयोगी अब्दुल हमीद ने एक क्षेत्रीय सेना जवान अबास शाह द्वारा एलओसी पर जाने का लालच दिया था, जिन्होंने उन्हें पैसे और नौकरियों का वादा किया था। पूर्व एसपीओ और उनके दो सहयोगियों को कथित तौर पर तीन युवाओं को सौंपने के लिए सेना से प्रत्येक को 50,000 रुपये मिले। फिर वर्ष 2014 में सेना ने मच्छेल में तीन युवाओं की फर्जी हत्या के लिए पांच अधिकारियों को सजा सुनाई थी।
 
- सुरेश डुग्गर
 

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