कभी नहीं मर सकता डिएगो माराडोना ! 1986 विश्व कप में रहे थे जीत के नायक

कभी नहीं मर सकता डिएगो माराडोना ! 1986 विश्व कप में रहे थे जीत के नायक

30 अक्टूबर, 1960 में जन्में डिएगो माराडोना के पास अर्जेंटीना का कप्तानी थी और उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम को चैंपियन बनाया। इस विश्व कप में कुछ ऐसा भी हुआ जो फुटबॉल के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया।

दुनिया के महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार डिएगो माराडोना का निधन हो गया। वह 60 साल के थे। बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने की वजह से उन्होंने समय से पहले ही दुनिया को अलविदा कहा। पिछले लंबे समय से वह कोकीन की लत और मोटापे से जुड़ी कई परेशानियों से जूझ रहे थे। अर्जेंटीना में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी गई है।

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विश्वकप में जीत के हीरो रहे माराडोना

1982 में खेले गए फीफा विश्व कप में डिएगो मारागोना चर्चा का केंद्र बिंदु रहे लेकिन उन्होंने हंगरी के खिलाफ खेले गए मुकाबले में ही महज 2 गोल दागे थे। 1978 का विश्व कप जीतने वाली अर्जेंटीना 1982 में दूसरे राउंड में बाहर हो गई। हालांकि, उन्होंने अपना हौसला कमजोर नहीं होने दिया और 1986 में टीम की दमदार वापसी हुई।

30 अक्टूबर, 1960 में जन्में डिएगो माराडोना के पास अर्जेंटीना का कप्तानी थी और उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम को चैंपियन बनाया। इस विश्व कप में कुछ ऐसा भी हुआ जो फुटबॉल के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। 

60 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले माराडोना विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेल रहे थे। इस मुकाबले में माराडोना ने 2 गोल किए थे। इनमें से एक गोल 'गोल ऑफ द सेंचुरी' चुना गया। इतना ही नहीं इस गोल को हैंड ऑफ गॉड का भी नाम दिया गया था और इसी गोल की बदौलत अर्जेंटीना एक बार फिर से विश्व चैंपियन बनी थी। 

इंग्लैंड फुटबॉल टीम का कहना था कि माराडोना ने जो गोल किया है, वह उनके हाथ से लगकर गया है लेकिन रेफरी ने फैसला गोल का ही दिया था। इसी गोल के बाद मुकाबला पलट गया और इंग्लैंड विश्व कप से बाहर हो गई। इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज करने के बाद अर्जेंटीना ने सेमीफाइनल मुकाबला भी जीता और फिर खिताब भी अपने नाम कर लिया। इस विश्व कप में डिएगो माराडोना जीत के नायक बनकर उभरे।

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हालांकि, मैच के बाद माराडोना का बयान भी सामने आया था। उस समय उन्होंने कहा था कि यह गोल मेरे सिर और भगवान के हाथ से छूकर हुआ और इसी बयान के बाद इस गोल को 'हैंड ऑफ गॉड' का नाम दिया गया। बता दें कि माराडोना के इसी गोल की बदौलत इंग्लैंड के खिलाफ अर्जेंटीना ने 2-1 से जीत दर्ज की और उनके इस गोल को गोल ऑफ द सेंचुरी भी चुना गया था।

जब लगी थी नशे की लत

4 विश्व कप में अर्जेंटीना का प्रतिनिधित्व करने वाले माराडोना को नशे की लत लग थी। जिसकी वजह से उन्हें प्रतिबंधित भी किया जा चुका है। बता दें कि खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले माराडोना जब लोकप्रिय हो रहे थे और कॅरियर शबाब पर था उसी वक्त उन्हें नशे की लत लग चुकी थी। 1982 के दशक में उन्होंने कोकीन लेना शुरू कर दिया था और वह करीब दो दशक तक ड्रग्स लेते रहे थे। 

साल 1991 में माराडोना को उनके नेपाली क्लब ने ड्रग्स टेस्ट में पॉजिटिव पाया था जिसके बाद उन्हें 15 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। ऐसा माना जाता है कि ड्रग्स की वजह से माराडोना का फुटबॉल कॅरियर समाप्त हो गया और फिर उन्होंने साल 1997 में अपने 37वें जन्मदिन पर खेल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था। 

2008 में बने थे अर्जेंटीना के कोच

माराडोना फुटबॉल को अलविदा कह सकते हैं लेकिन फुटबॉल उन्हें जाने नहीं दे सकता था। ऐसे में उन्हें 2008 में अर्जेंटीना का कोच बनाया गया था और फिर उन्होंने 2010 में इस पद से इस्तीफा दे दिया था। कहा जाता है कि माराडोना ने अर्जेंटीना के बेहतरीन खिलाड़ियों में शुमार लियोनल मेस्सी को भी प्रशिक्षित किया। माराडोना के निधन से जो फुटबॉलजगत को क्षति पहुंची है उससे हर कोई आहत है। मेस्सी ने माराडोना के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि जिसका नाम डिएगो माराडोना है, वह कभी मर नहीं सकता क्योंकि डिएगो नाम अमर है।

मेस्सी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि अर्जेंटीना के सभी लोगों और फुटबॉल के लिए बहुत ही दुखद: दिन। वह हमें छोड़कर चले गए लेकिन वह ज्यादा दूर नहीं जा सकते क्योंकि डिएगो अमर हैं। मैं उस महान इंसान के साथ बिताए गए सभी अच्छे पलों को याद करते हुए उनके परिजनों के साथ अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। रेस्ट इन पीस।

- अनुराग गुप्ता