हाफिज सईद को जेल की सजा देना पाकिस्तान की नई नौटंकी

  •  डॉ. वेदप्रताप वैदिक
  •  नवंबर 21, 2020   17:24
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हाफिज सईद को जेल की सजा देना पाकिस्तान की नई नौटंकी
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भारत में आतंकवाद फैलाकर इन तथाकथित जिहादियों ने, पाकिस्तानी फौज और सरकार की जो सेवा की है, उसका पारितोषिक अब उन्हें जेल में मिलेगा। ज्यों ही पाकिस्तान भूरी से सफेद सूची में आया कि ये आतंकवादी रिहा हो जाएंगे।

पाकिस्तान की जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद को 10 साल की जेल की सजा हो गई है। वह पहले से ही लाहौर में 11 साल की जेल काट रहा है। अब ये दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। ये सजाएं पाकिस्तान की ही अदालतों ने दी हैं। क्यों दी हैं ? क्योंकि पेरिस के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कोष संगठन ने पाकिस्तान का हुक्का-पानी बंद कर रखा है। उसने पाकिस्तान का नाम अपनी भूरी सूची में डाल रखा है, क्योंकि उसने सईद जैसे आतंकवादियों को अभी तक छुट्टा छोड़ रखा था। हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर अमेरिका ने लगभग 75 करोड़ रु. का इनाम 2008 में घोषित किया था लेकिन वह 10-11 साल तक पाकिस्तान में खुला घूमता रहा। किसी सरकार की हिम्मत नहीं हुई कि वह उसे गिरफ्तार करती।

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दुनिया के मालदार मुल्कों के आगे पाकिस्तान के नेता भीख का कटोरा फैलाते रहे लेकिन मुफ्त के 75 करोड़ रु. लेना उन्होंने ठीक नहीं समझा। क्यों नहीं समझा ? इसीलिए कि हाफिज सईद तो उन्हीं का खड़ा किया गया पुतला था। जब मेरे-जैसा घनघोर राष्ट्रवादी भारतीय पत्रकार उसके घर में बे-रोक-टोक जा सकता था तो पाकिस्तान की पुलिस क्यों नहीं जा सकती थी ? अमेरिका ने जो 75 करोड़ रु. का पुरस्कार रखा था, वह भी किसी ढोंग से कम नहीं था। यदि वह ओसामा बिन लादेन को उसके गुप्त ठिकाने में घुसकर मार सकता था तो सईद को पकड़ना उसके लिए कौन-सी बड़ी बात थी ? लेकिन सईद तो भारत में आतंक फैला रहा था। अमेरिका को उससे कोई सीधा खतरा नहीं था। अब जबकि खुद पाकिस्तान की सरकार का हुक्का-पानी खतरे में पड़ा तो देखिए, उसने आनन-फानन सईद को अंदर कर दिया। सईद की यह गिरफ्तारी भी दुनिया को एक ढोंग ही मालूम पड़ रही है। सईद और उसके साथी जेल में जरूर रहेंगे लेकिन इमरान-सरकार के दामाद की तरह रहेंगे। अब उनके खाने-पीने, दवा-दारू और आने-जाने का खर्चा भी पाकिस्तान सरकार ही उठाएगी। उन्हें राजनीतिक कैदियों की सारी सुविधाएं मिलेंगी। आंदोलनकारी कैदी के रूप में मैं खुद कई बार जेल काट चुका हूं। जेल-जीवन के आनंद का क्या कहना ? 

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भारत में आतंकवाद फैलाकर इन तथाकथित जिहादियों ने, पाकिस्तानी फौज और सरकार की जो सेवा की है, उसका पारितोषिक अब उन्हें जेल में मिलेगा। ज्यों ही पाकिस्तान भूरी से सफेद सूची में आया कि ये आतंकवादी रिहा हो जाएंगे। पाकिस्तानी आतंकवादियों के कारण पाकिस्तान सारी दुनिया में ‘नापाकिस्तान’ बन गया है और भारत और अफगानिस्तान से ज्यादा निर्दोष मुसलमान पाकिस्तान में मारे गए हैं। पाकिस्तान यदि जिन्ना के सपनों को साकार करना चाहता है और शांतिसंपन्न राष्ट्र बनना चाहता है तो उसे इन गिरफ्तारियों की नौटंकी से आगे निकल कर आतंकवाद की नीति का ही परित्याग करना चाहिए।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक







सारे पूर्वानुमानों को धता बताते हुए तेज़ी से आगे बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था

  •  प्रहलाद सबनानी
  •  दिसंबर 1, 2020   13:02
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सारे पूर्वानुमानों को धता बताते हुए तेज़ी से आगे बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था
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जुलाई-सितम्बर 2020 की अवधि में सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है जबकि अप्रैल-जून 2020 की अवधि में यह 23.5 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि दर थी। बहुत ही तेज़ गति से इस ऋणात्मक वृद्धि दर को कम किया गया है।

देश में कोरोना महामारी के चलते दिनांक 27 नवम्बर 2020 को वर्ष 2020-21 की द्वितीय तिमाही में, सकल घरेलू उत्पाद में, वृद्धि सम्बंधी आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। विभिन्न वित्तीय एवं शोध संस्थानों के पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ते हुए भारत में सकल घरेलू उत्पाद में तेज़ गति से वृद्धि दर्ज की गई है। जहां अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में प्रथम तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में ऋणात्मक वृद्धि दर में भारी कमी करते हुए बहुत तेज़ सुधार दृष्टिगोचर हुआ है तो वहीं विशेष रूप से कृषि क्षेत्र, विनिर्माण क्षेत्र एवं बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य जनोपयोगी सेवाओं में तो सकारात्मक वृद्धि दृष्टिगोचर हुई है। इन आंकड़ों को देखकर तो अब यह कहा ही जा सकता है कि भारत में विकास दर V आकार की होने जा रही है और इसकी पूरी सम्भावना है कि आगे आने वाले समय में भी यह प्रवाह जारी रहेगा। आईये, अब हम अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के विकास के सम्बंध में वर्ष 2020-21 की द्वितीय तिमाही में दर्ज किए गए कुछ आंकड़ों पर ग़ौर करते हैं।

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जुलाई-सितम्बर 2020 की अवधि में सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है जबकि अप्रैल-जून 2020 की अवधि में यह 23.5 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि दर थी। बहुत ही तेज़ गति से इस ऋणात्मक वृद्धि दर को कम किया गया है। कृषि क्षेत्र पर कोरोना महामारी का असर लगभग नहीं के बराबर रहा है क्योंकि कृषि क्षेत्र में द्वितीय तिमाही में भी 3.4 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई है, जो कि प्रथम तिमाही में दर्ज की गई विकास दर के बराबर है। इसी प्रकार, विनिर्माण क्षेत्र में भी विकास दर द्वितीय तिमाही में 0.6 प्रतिशत सकारात्मक रही है जो कि प्रथम तिमाही में ऋणात्मक 39.3 प्रतिशत थी। बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य जनोपयोगी सेवाओं में द्वितीय तिमाही में 4.4 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है जबकि प्रथम तिमाही में वृद्धि दर ऋणात्मक 7 प्रतिशत की रही थी। उक्त तीन क्षेत्रों, जिनमें सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, के अलावा अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी द्वितीय तिमाही में बहुत अधिक सुधार देखने में आया है। ढांचागत निर्माण के क्षेत्र में प्रथम तिमाही में ऋणात्मक 50.3 प्रतिशत की वृद्धि दर रही थी जो द्वितीय तिमाही में घटकर ऋणात्मक 8.6 प्रतिशत की रही है, खनन के क्षेत्र में भी ऋणात्मक वृद्धि दर 23.3 प्रतिशत से घटकर ऋणात्मक 9.1 प्रतिशत की हो गई है, उद्योग के क्षेत्र में ऋणात्मक वृद्धि दर 38.1 प्रतिशत से घटकर ऋणात्मक 2.1 प्रतिशत हो गई है, व्यापार, होटल, यातायात, संचार आदि से सम्बंधित सेवाओं के क्षेत्र में वृद्धि दर ऋणात्मक 47 प्रतिशत से घटकर ऋणात्मक 15.6 प्रतिशत हो गई है। कुल मिलाकर सेवा क्षेत्र में भी वृद्धि दर ऋणात्मक 20.6 प्रतिशत से घटकर ऋणात्मक 11.4 प्रतिशत हो गई है। इस प्रकार कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र के साथ साथ अब सेवा क्षेत्र में भी तेज़ी से सुधार दृष्टिगोचर हो रहा है।

देश के विभिन्न शोध संस्थानों में प्रथम तिमाही की 23.6 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि दर की तुलना में द्वितीय तिमाही में 9 से 13 प्रतिशत के बीच ऋणात्मक वृद्धि दर रहने का अनुमान लगाया गया था। परंतु, इन सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था ने द्वितीय तिमाही में कहीं अधिक तेज़ गति से वृद्धि दर को अर्जित किया है। यह सब देश में हाल ही के समय में केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक क्षेत्र में लिए गए कई निर्णयों के कारण सम्भव हो पाया है।

आगे आने वाली तृतीय तिमाही के लिए अब पूरी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि इस दौरान सकल घरेलू उत्पाद में सकारात्मक वृद्धि दर हासिल कर ली जाएगी क्योंकि अक्टोबर एवं नवम्बर माह के दौरान विभिन्न आर्थिक पैमानों पर कुछ सकारात्मक परिणाम देखने में आए हैं। अक्टूबर 2020 में ऊर्जा के उपयोग में 13.38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ऊर्जा के उपयोग में अक्टूबर 2019 की तुलना में अक्टूबर 2020 में वृद्धि होना, दर्शाता है कि देश में उत्पादन गतिविधियों में और अधिक तेज़ी आई है। इसी प्रकार, विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन गतिविधियों में वृद्धि एवं कमी दर्शाने वाला इंडेक्स (पीएमआई) भी अक्टूबर 2019 के 50.6 की तुलना में अक्टूबर 2020 में बढ़कर 58.9 हो गया है। अक्टूबर 2020 में पीएमआई के स्तर में हुई वृद्धि पिछले 13 वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि दर है। इस इंडेक्स का 50 के अंक से अधिक होना दर्शाता है कि उत्पादन गतिविधियों में वृद्धि दृष्टिगोचर हो रही है एवं यदि यह इंडेक्स 50 के अंक से नीचे रहता है तो इसका आश्य होता है कि उत्पादन गतिविधियों में कमीं हो रही है।

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देश में उत्पाद को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए ई-वे बिल जारी किया जाता है। आज ई-वे बिल जारी किए जाने का स्तर भी कोविड-19 के पूर्व के स्तर पर पहुंच गया है। अर्थात, जितने ई-वे बिल प्रतिदिन औसतन जनवरी एवं फ़रवरी 2020 में जारी किए जा रहे थे लगभग इसी स्तर पर आज भी जारी किए जाने लगे है। हाल ही में जारी किए गए खुदरा महंगाई की दर के आंकड़ों में भी थोड़ी तेज़ी दिखाई दी है। इसका आशय यह है कि देश में उत्पादों की मांग में वृद्धि हो रही है।

अक्टूबर 2020 में वस्तु एवं सेवा कर की उगाही में बहुत अच्छी वृद्धि दर्ज हुई है। यह माह सितम्बर 2020 में हुई 95,480 करोड़ रुपए की उगाही से बढ़कर अक्टूबर 2020 में 105,155 करोड़ रुपए हो गई है। यह माह अप्रैल 2020 में घटकर 32,172 करोड़ रुपए हो गई थी एवं माह मई 2020 में बढ़कर 62,151 करोड़ रुपए तथा माह अगस्त 2020 में 86,449 करोड़ रुपए की रही थी। अब माह नवम्बर 2020 में वस्तु एवं सेवा कर की उगाही और आगे बढ़कर 110,000 करोड़ रुपए के आसपास रहने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है।

अक्टूबर एवं नवम्बर माह में वाहनों की बिक्री में भी बढ़त दर्ज की गयी है। ग्राहकों के बीच खरीदारी धारणा में सुधार और मांग बढ़ने से देश की दो प्रमुख कार कम्पनियों मारुति सुजुकी और हुंदै मोटर्स की बिक्री में इस दौरान दहाई अंक की वृद्धि दर्ज की गयी है। होंडा कार्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और महिंद्रा एंड महिंद्रा की घरेलू बिक्री में भी अक्टूबर में बढ़त रही है। दोपहिया वाहन श्रेणी में देश की सबसे बड़ी कंपनी हीरो मोटोकॉर्प के लिए मासिक बिक्री के लिहाज से अक्टूबर सबसे अच्छा महीना रहा। टाटा मोटर्स का भी कहना है कि अब उनकी कंपनी के छोटे व्यावसायिक वाहनों की बिक्री कोरोना वायरस महामारी से पहले के स्तर पर पहुंचने लगी है। महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये देश भर में लगाये गये लॉकडाउन का सबसे बुरा असर स्वरोजगार तथा कम-मध्यम आय वाले वर्ग के ऊपर हुआ था। छोटे व्यावसायिक वाहनों की बिक्री से इस वर्ग के आर्थिक हालात में भी सुधार हुआ है।

उपभोक्ता सामानों जिसमें तमाम इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद, होम फर्निशिंग और फर्नीचर आदि शामिल हैं, की बिक्री भी नये रिकॉर्ड बना रही है। यही नहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तमाम डिस्काउंट्स के चलते अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। सभी कम्पनियों के मोबाइल फोन भी खूब बिक रहे हैं। लैपटॉप की बिक्री में तो लगातार तेजी दिख रही है क्योंकि ऑनलाइन क्लासेज और वर्क फ्रॉम होम न्यू नॉर्मल हो गये हैं। यही नहीं अक्टूबर 2020 महीने में यूपीआई के जरिये 200 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया जोकि अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है और अर्थव्यवस्था में तेजी का सूचक भी है।

बुआई की दृष्टि से कृषि क्षेत्र में विस्तार हुआ है, जिसके चलते इस वर्ष ख़रीफ़ सीज़न की पैदावार में बहुत अच्छे स्तर पर वृद्धि देखने को मिलेगी। इस वर्ष, वर्षा भी सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक रही है, जिसके कारण, ख़रीफ़ सीज़न के बाद रबी सीज़न में भी अधिक पैदावार होने की सम्भावना बलवती हो गई है। अतः अब ग्रामीण क्षेत्रों से उत्पादों की मांग में स्पष्टत: वृद्धि दिखाई दे रही है। देश में उपभोक्ता वस्तुओं यथा, वाहनों, रेफ़्रीजेटरों, एयर कंडीशनरों, आदि की मांग भी ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक देखने में आ रही है, जिसके चलते वाहनों की बिक्री अक्टूबर एवं नवम्बर 2020 माह में, पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान की तुलना में, अधिक रही है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी दिनांक 20 नवम्बर 2020 को 57,530 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है जो 22 नवम्बर 2019 को 44,860 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर था। इस प्रकार पिछले एक वर्ष के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 12,670 करोड़ अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई है, जो 28.24 प्रतिशत की आकर्षक वृद्धि दर है। इसी प्रकार, अप्रैल से नवम्बर 2020 के दौरान देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भी बहुत अच्छी वृद्धि दृष्टिगोचर हुई है। इस प्रकार, विदेशी निवेशकों का भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास झलक रहा है।

-प्रहलाद सबनानी

सेवानिवृत्त उप-महाप्रबंधक

भारतीय स्टेट बैंक







साक्षात्कारः किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा- इस बार आर पार की लड़ाई है

  •  डॉ. रमेश ठाकुर
  •  नवंबर 30, 2020   09:25
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साक्षात्कारः किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा- इस बार आर पार की लड़ाई है
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''नरेंद्र मोदी को एक बात नहीं भूलनी चाहिए। 2014 और 2019 में उनकी जीत में किसानों की भूमिका सबसे बड़ी रही। उसके बदले सरकार ने किसानों को सिर्फ कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं दिया। फसली समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की बात में भी बेमानी दिखी।''

देश की राजधानी बीते कुछ दिनों से किसानों से घिरी है। खेती-किसानी छोड़ अन्नदाता इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। आंदोलन केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि सुधार अधिनियम के खिलाफ हो रहा है जिसमें पंजाब सहित उत्तर भारत के लाखों किसान शामिल हैं। जनाक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार ने फिलहाल बातचीत का पासा फेंका है। किसानों के दिल्ली कूच करने और उनकी क्या हैं मांगे आदि को जानने के लिए डॉ रमेश ठाकुर ने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।

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प्रश्न- इस बार का मूवमेंट आर-पार की लड़ाई में दिखाई पड़ता है? 

उत्तर- जी बिल्कुल! अब आश्वासन का झुनझुना नहीं चाहिए हमें। मुकम्मल लिखित जवाब चाहिए। ये आंदोलन नहीं, बल्कि किसान क्रांति है। दिल्ली बॉर्डर पर हमारा काफिला पहुंचा तो पता चला कि हमें रोकने के लिए चारो ओर से पुलिस-आर्मी का पहरा बिछा दिया। लेकिन अबकी बार हम मरने से भी पीछे नहीं हटेंगे। सर्दी में हम पर वाटर कैनन से भिंगोया गया, आंसू गैस के गोले दागे गए, पानी की बौछारें छोड़ी गईं। किसानों पर लाठियां तक भांजी गई। शर्म आनी चाहिए केंद्र सरकार को हम किसान हैं, कोई आतंकवादी नहीं। हम अपना हक-हकूक मांग रहे हैं, आपसे दुआ या भीख नहीं? मोदी जी इतना समझ लेना इस बार हम खाली हाथ दिल्ली से नहीं लौटेंगे।

प्रश्न- मांगों के एजेंडे में नए कृषि सुधार अधिनियम ही हैं या कुछ और?

उत्तर- पहली बात तो ये है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों नए कृषि सुधार अधिनियम को हम लागू नहीं होने देंगे। क्योंकि इससे किसान निश्चित रूप से उजड़ जाएंगे, खेतीविहीन हो जाएंगे। सड़कों पर आ जाएंगे। दूसरी मांग है स्वामी नाथन आयोग की सिफ़ारिशें लागू करना। जिस पर सरकार ने विचार करने का पिछले साल हमें आश्वासन दिया था। उस समय मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने थोड़ा समय मांगा था। लेकिन अब मियाद खत्म हो गई है। सरकार अपने वादे से मुकर गई। इन्हीं मांगों को पूरा करने के लिए हमारा आंदोलन हो रहा है।

प्रश्न- ये पांचवां बड़ा आंदोलन है, पूर्व की तरह सरकार ने फिर बातचीत का पांसा फेंका है? 

उत्तर- अब हम झांसे में नहीं आने वाले। किसानों ने पटकथा आर-पार की लिख दी है। सरकार के पास इस बार आखिरी मौका है। इस बार अगर सरकार ने पलटी मारी, तो देख लेना अन्नदाता किस तरह से सबक सिखाएंगे। नरेंद्र मोदी को एक बात नहीं भूलनी चाहिए। 2014 और 2019 में उनकी जीत में किसानों की भूमिका सबसे बड़ी रही। उसके बदले सरकार ने किसानों को सिर्फ कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं दिया। फसली समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की बात में भी बेमानी दिखी। दिल्ली का तख्ता पलटने में किसान अब देरी नहीं करेगा। किसानों का गुस्सा अब अपनी चरम सीमा को पार कर चुका है। हमें आश्वासन का झुनझुना नहीं चाहिए। अन्नदाताओं को अपनी किसानी का मेहनताना चाहिए।

प्रश्न- आंदोलन को खालिस्तान से जोड़ा जा रहा है?

उत्तर- खालिस्तान आतंकी हैं जो गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। ये अन्नदाता हैं जो आपका पेट भरते हैं। शर्म आनी चाहिए उन लोगों को जो इनके दामन पर दाग लगाते हैं। पूरा मूवमेंट अहिंसक तरीके से हो रहा है। आंदोलित किसानों को हिदासतें दी गई हैं कि वह किसी भी सुरक्षाकर्मी से न उलझें। देखिए, वातानुकूलित कमरों में बैठकर किसानों की असल समस्याओं को नहीं समझ सकते। समझने के लिए खेतों में उतरना होगा। लेकिन ऐसा सफ़ेदपोश कर नहीं सकते, उससे उनके सफेद कपड़े मैले हो जाएंगे। आजादी के बाद से किसान इस वक्त सबसे बड़ी समस्याओं से गुजर रहे हैं। मंडियों में धान की ब्रिकी नहीं हो रही। किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। शासन-प्रशासन सभी आँखें मूंदे हैं।

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प्रश्न- सूचना ऐसी भी है कि मौजूद किसान आंदोलन में कुछ स्वार्थी तत्व भी शामिल हैं?

उत्तर- ये दुष्प्रचार मात्र है। आंदोलन में जितने भी संगठन शामिल हैं सभी खाटी के किसान हैं। मेरे पिता जी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों के हितों के लिए कितना संघर्ष किया। अन्नदाताओं की लड़ाई लड़ते-लड़ते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। देश के किसान उनकी कुर्बानी को कभी नहीं भूल पाएंगे। हमारे भीतर भी उनका ही खून है। इसलिए आखिरी दम तक हम भारत के किसानों हितों के लिए निस्वार्थ लड़ते रहेंगे।

प्रश्न- उम्मीद है आपको, केंद्र सरकार इस बार मांगें मान लेगी? 

उत्तर- हर हाल में मानना पड़ेगा। वरना ख़ामियाज़ा भुगतने की लिए तैयार रहें। तख्त ताज उखाड़ फेंक देंगे। किसानों ने अपनी मांगे मनवाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया हुआ है। इसके बाद समूचे भारत में किसान क्रांति आ जाएगी। दूध, सब्जी-राशन के अलावा ग्रामीण अंचल की सभी सामग्रियों की सप्लाई बंद कर देंगे। ऐसा करने के बाद देश में जो अराजकता फैलेगी, उसकी जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ केंद्र सरकार होगी। दिल्ली इस बार हम आर-पार की लड़ाई लड़ने पहुंचे हैं। खाली हाथ नहीं जाएंगे। हमें पता है आंदोलन को खत्म करने के लिए कोशिशें हो रही हैं। लेकिन हम डटे हैं, दिल्ली छोड़कर नहीं जाएंगे।

-फोन पर किसान नेता राकेश टिकैत ने जैसा डॉ. रमेश ठाकुर से कहा।







तीनों सशस्त्र बलों के लिए बेहद शक्तिशाली हथियार बनी ब्रह्मोस मिसाइल

  •  योगेश कुमार गोयल
  •  नवंबर 30, 2020   08:25
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तीनों सशस्त्र बलों के लिए बेहद शक्तिशाली हथियार बनी ब्रह्मोस मिसाइल
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ब्रह्मोस मिसाइल को पनडुब्बियों, विमानों और जमीन से अर्थात् तीनों ही स्थानों से सफलतापूर्वक लांच किया जा सकता है, जो भारतीय वायुसेना को समुद्र अथवा जमीन के किसी भी लक्ष्य पर हर मौसम में सटीक हमला करने के लिए सक्षम बनाती है।

भारत पिछले करीब तीन माह के दौरान एंटी रेडिएशन मिसाइल ‘रूद्रम-1’, परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मिसाइल ‘शौर्य’ सहित कई मिसाइलों का सफल परीक्षण कर चुका है। दरअसल भारत अपने दुष्ट पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देने की क्षमता विकसित करने के लिए इन दोनों देशों के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच अपनी ताकत बढ़ाने में जोर-शोर से जुटा है और यही कारण है कि पिछले तीन महीनों से एक के बाद एक भारत द्वारा लगातार क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइलों के सफल परीक्षण किए जा रहे हैं। भारत की इन सामरिक तैयारियों को इसी से समझा जा सकता है कि जितने मिसाइल परीक्षण विगत दो-तीन माह के अंदर किए जा चुके हैं, उतने तो इससे पहले पूरे वर्षभर में भी नहीं होते थे। भारत और रूस के संयुक्त प्रयासों से बनाई गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ के भी अलग-अलग संस्करणों के परीक्षण किए गए हैं तथा पहले से बनी इन शक्तिशाली मिसाइलों को अब और ज्यादा शक्तिशाली बनाते हुए भारत पूरी दुनिया को अपनी स्वदेशी ताकत का अहसास कराने का सफल प्रयास कर रहा है। ब्रह्मोस अपनी श्रेणी में दुनिया की सबसे तेज परिचालन प्रणाली है और डीआरडीओ द्वारा इस मिसाइल प्रणाली की सीमा को अब मौजूदा 290 किलोमीटर से बढ़ाकर करीब 450 किलोमीटर कर दिया गया है। ब्रह्मोस मिसाइल के नौसेना संस्करण का 18 अक्तूबर को अरब सागर में सफल परीक्षण किया गया था। परीक्षण के दौरान ब्रह्मोस ने 400 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद लक्ष्य पर अचूक प्रहार करने की अपनी क्षमता को बखूबी प्रदर्शित किया था।

24 नवम्बर को अंडमान निकोबार में सतह से सतह पर अचूक निशाना लगाने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ के ‘लैंड अटैक वर्जन’ का सफल परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान एक अन्य द्वीप पर मौजूद लक्ष्य को ब्रह्मोस द्वारा सफलतापूर्वक नष्ट किया गया। इस परीक्षण की खास बात यह रही कि अब ब्रह्मोस मिसाइल के इस संस्करण की मारक क्षमता 290 से बढ़कर 400 किलोमीटर हो गई है, जिसकी रफ्तार ध्वनि की गति से तीन गुना ज्यादा है। भारत द्वारा चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच ब्रह्मोस के इस नए संस्करण को परीक्षण से पहले ही चीन के साथ लगती सीमा पर तैनात किया जा चुका है। सैन्य सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना और नौसेना अगले कुछ दिनों में ब्रह्मोस के कुछ और नए संस्करणों का भी अलग-अलग परीक्षण करेंगी। ब्रह्मोस अब न केवल भारत के तीनों सशस्त्र बलों के लिए एक बेहद शक्तिशाली हथियार बन गई है बल्कि गर्व का विषय यह है कि अभी तक जहां भारत अमेरिका, फ्रांस, रूस इत्यादि दूसरे देशों से मिसाइलें व अन्य सैन्य साजोसामान खरीदता रहा है, वहीं भारत अपनी इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को दूसरे देशों को निर्यात करने की दिशा में अब तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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ब्रह्मोस मिसाइल को पनडुब्बियों, विमानों और जमीन से अर्थात् तीनों ही स्थानों से सफलतापूर्वक लांच किया जा सकता है, जो भारतीय वायुसेना को समुद्र अथवा जमीन के किसी भी लक्ष्य पर हर मौसम में सटीक हमला करने के लिए सक्षम बनाती है। बेहद ताकतवर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भारतीय वायुसेना के 40 से भी अधिक सुखोई लड़ाकू विमानों पर लगाई जा चुकी हैं, जिससे सुखोई लड़ाकू विमान पहले से कई गुना ज्यादा खतरनाक हो गए हैं। हाल ही में सुखोई-30 लड़ाकू विमान ने एक ऑपरेशन के तहत पंजाब के हलवारा एयरबेस से उड़ान भरते हुुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल से बंगाल की खाड़ी में अपने टारगेट को निशाना बनाया था। उल्लेखनीय है कि सुखोई विमान की दूर तक पहुंच के कारण ही इस विमान को ‘हिंद महासागर क्षेत्र का शासक’ भी कहा जाता है और ब्रह्मोस से लैस सुखोई तो अब दुश्मनों के लिए बेहद घातक हो गए हैं।

मिसाइलें प्रमुख रूप से दो प्रकार की होती हैं, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल। क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों में अंतर यही है कि क्रूज मिसाइल बहुत छोटी होती हैं, जिन पर ले जाने वाले बम का वजन भी ज्यादा नहीं होता और अपने छोटे आकार के कारण उन्हें छोड़े जाने से पहले बहुत आसानी से छिपाया जा सकता है जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों का आकार काफी बड़ा होता है और वे काफी भारी वजन के बम ले जाने में सक्षम होती हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों को छिपाया नहीं जा सकता, इसलिए उन्हें छोड़े जाने से पहले दुश्मन द्वारा नष्ट किया जा सकता है। क्रूज मिसाइल वे मिसाइलें होती हैं, जो कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती हैं और रडार की आंख से भी आसानी से बच जाती हैं। बैलिस्टिक मिसाइल उर्ध्वाकार मार्ग से लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं जबकि क्रूज मिसाइल पृथ्वी के समानांतर अपना मार्ग चुनती हैं। छोड़े जाने के बाद बैलिस्टिक मिसाइल के लक्ष्य पर नियंत्रण नहीं रहता जबकि क्रूज मिसाइल का निशाना एकदम सटीक होता है। ब्रह्मोस मिसाइल मध्यम रेंज की रेमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बियों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों और जमीन से दागा जा सकता है। यह दस मीटर की ऊंचाई पर भी उड़ान भर सकती है और रडार के अलावा किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में भी सक्षम है, इसीलिए इसे मार गिराना लगभग असंभव माना जाता रहा है। इस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी तथा रूस की मस्कवा नदी को मिलाकर रखा गया है और इसका 12 जून 2001 को पहली बार सफल लांच किया गया था। यह मिसाइल दुनिया में किसी भी वायुसेना के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और डीआरडीओ अब रूस के सहयोग से इस मिसाइल की मारक दूरी और भी ज्यादा बढ़ाने के साथ ही इन्हें हाइपरसोनिक गति पर उड़ाने पर भी कार्य कर रहा है। दरअसल सुपरसोनिक मिसाइलों की गति ध्वनि की रफ्तार से तीन गुना अर्थात् तीन मैक तक होती है और इनके लिए रैमजेट इंजन का प्रयोग किया जाता है जबकि हाइपरसोनिक मिसाइलों की रफ्तार ध्वनि की गति से पांच गुना से भी ज्यादा होती है और इनके लिए स्क्रैमजेट यानी छह मैक स्तर के इंजन का प्रयोग किया जाता है। फिलहाल ब्रह्मोस के जो संस्करण उपलब्ध हैं, वे सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ही हैं, जो ध्वनि के वेग से करीब तीन गुना अधिक 2.8 मैक गति से अपने लक्ष्य पर जबरदस्त प्रहार करती हैं। यह दुनिया में अपनी तरह की ऐसी एकमात्र क्रूज मिसाइल है, जिसे सुपरसॉनिक स्पीड से दागा जा सकता है। दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने से मात्र बीस किलोमीटर पहले भी अपना रास्ता बदल सकने वाली तकनीक से लैस है और यह केवल दो सैकेंड में चौदह किलोमीटर तक की ऊंचाई हासिल कर सकती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसके दागे जाने के बाद दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता और यह पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकाने को नष्ट कर देती है।

-योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं)