यह रहा इनकम टैक्स रिटर्न भरने का सबसे आसान तरीका

यह रहा इनकम टैक्स रिटर्न भरने का सबसे आसान तरीका

जब भी आप आइटीआर फाइल करते हैं, तो आपके बैंक की स्टेटमेंट की अहमियत बढ़ जाती है। पिछले 1 साल तक मतलब 1 अप्रैल से लेकर बीते 31 मार्च तक आपके बैंक एकाउंट्स में क्या ट्रांजैक्शन हुई है।

भारतवर्ष अभी भी उन देशों में शामिल है, जो काफी कम संख्या-अनुपात में आइटीआर, अर्थात इनकम टैक्स फाइल करते हैं।

सरकार की ओर से लगातार प्रयास किया जाता है कि अधिक से अधिक संख्या में लोग इनकम टैक्स समय पर दें, ताकि देश के विकास का कार्य नियमित और सुचारू ढंग से चलाया जा सके। तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद कई लोग तो जानबूझकर पैसे बचाने के मकसद से आईटीआर फाइल नहीं करते हैं, जो कि पूरी तरह गैरकानूनी और गलत है।

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हालांकि एक तथ्य यह भी है कि कई लोग जानकारी ना होने के कारण और काल्पनिक उलझनों के कारण आइटीआर भरने के प्रोसेस को पेचीदा मानते हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं, जो इनकम टैक्स भरना कठिन समझते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है।

आइए देखते हैं कि किस प्रकार आसानी से आईटीआर फाइल किया जा सकता है, वह भी घर बैठे बैठे सिंगल क्लिक पर...

रजिस्ट्रेशन प्रोसेस

सबसे पहले आपको इनकम टैक्स की ऑफिसियल वेबसाइट ईफाइलिंग डॉट जीओवी डॉट इन (www.incometaxindiaefiling.gov.in) पर जाना है। यहां पर अगर आप पहले से रजिस्टर्ड नहीं हैं, तो आपको रजिस्टर योरसेल्फ पर क्लिक करके सबसे पहले खुद को रजिस्टर्ड करना है। इसमें आप की बेसिक जानकारियों के अलावा आप के आधार कार्ड, पैन कार्ड की डिटेल पास में होनी चाहिए और आपका मोबाइल नंबर एक्टिव होना चाहिए, ताकि ओटीपी के माध्यम से आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

अगर आपने रजिस्टर्ड कर लिया है तो फिर आपको लॉगइन करना होगा। लॉगइन करते ही आपके सामने इनकम टैक्स ईफाइलिंग का डैशबोर्ड आ जाएगा।

अगर आप सैलरीड हैं तो माय अकाउंट में व्यू फॉर्म 26as (View Form 26AS Tax Credit) को क्लिक करें। अगर आपने पहले से फॉर्म भरा हुआ है तो यह बटन क्लिक करने के बाद आपके सामने, टैक्स क्रेडिट जो भी आपके एंपलॉयर द्वारा भरा गया है, उसकी जानकारी एसेसमेंट ईयर चूज करके आप देख सकते हैं। ध्यान रखें कई बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको मिसमैच का नोटिस भेजता है, तो वह इसलिए ही होता है कि आप ठीक ढंग से इनकम टैक्स नहीं भरते हैं। खासकर 26as फॉर्म सावधानी से चेक नहीं करते हैं, तो इस फॉर्म को अवश्य ही उचित ढंग से चेक करें, ताकि टैक्स भरते समय यह वेरीफाई रहे।

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बैंक स्टेटमेंट को सावधानी से रीड करें 

जब भी आप आइटीआर फाइल करते हैं, तो आपके बैंक की स्टेटमेंट की अहमियत बढ़ जाती है। पिछले 1 साल तक मतलब 1 अप्रैल से लेकर बीते 31 मार्च तक आपके बैंक एकाउंट्स में क्या ट्रांजैक्शन हुई है। कहां से और किस मद में पैसा आया है, और किस मद में वह पैसा खर्च हुआ है, इसका कैलकुलेशन बैलेंस शीट कहलाता है। अगर बैंक ने आपको इंटरेस्ट दिया है, तो वह भी आप ध्यान में रखें। जब आपके एक या अधिक बैंक स्टेटमेंट्स का हिसाब आपके पास होता है, तो समझ लीजिये कि आप का काम काफी सरल हो जाता है। साथ ही बैंक की सेविंग्स और फिक्स डिपाजिट इत्यादि की जानकारी भी आइटीआर भरते समय आपके पास होनी चाहिए।

अगर आपने यह सब कर लिया है, तो मुख्य डैशबोर्ड पर फाइलिंग आफ इनकम टैक्स रिटर्न (Filing of income tax return) बटन क्लिक कर देना है। इसे क्लिक करते ही आपको पैन कार्ड, एसेसमेंट ईयर, आईटीआर का फॉर्म नंबर (सामान्यतः ITR-1) आपको चूज करना है और फाइलिंग टाइप ओरिजिनल या रिवाइज सेलेक्ट करना है। सबमिशन मोड में आपको प्रिपेयर एंड सबमिट ऑनलाइन क्लिक करना है।

यहाँ कई सारी जानकारियां आपको ऑटोफिल मिलेंगी, किंतु आप उसे सुविधानुसार एडिट कर सकते हैं। अब अगर आप पहली बार आइटीआर भर रहे हैं, तो यह जान लें कि आप इसे कई हिस्सों में भर सकते हैं। ITR-1 के फॉर्म में आपको ड्राफ्ट नामक एक बटन दिखेगी, जो आपको किसी भी जानकारी को भरते समय क्लिक करना है, इससे आपकी जानकारी फाइनल सबमिशन तक ऑनलाइन सुरक्षित रहेगी।

अब अगले पेज पर आपके सामने कई सारी डिटेल्स आ जाती हैं, जिसमें जनरल इनफार्मेशन, कंप्यूटेशन आफ इनकम एंड टैक्स डिटेल, टैक्सेस पेड एंड वेरीफिकेशन इत्यादि जानकारियां आपको बेहद सावधानी से भरनी पड़ती हैं। इसमें किसी भी प्रकार से आपको घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आप धैर्य से अपनी जानकारियों को सेव करते जाते हैं तो बड़ी आसानी से आप इनकम टैक्स फाइल कर सकते हैं।

तमाम जानकारियां आपको आसानी से मिलती चली जाएंगी बशर्ते आप पहली बार आईटीआर फाइल करते समय थोड़े धैर्य का परिचय दें। अगर आप इसे 1 दिन में नहीं भर पाते हैं और कोई चीज समझ में नहीं आती है गूगल का सहारा लेने में हिचकिचाएं नहीं। किसी अन्य जानकार से भी इसकी सर्विस ले सकते हैं। कुछ और बातें भी हैं जो आपको ध्यान में रखने की जरूरत है। आइए देखते हैं...

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सही फॉर्म चुनना जरूरी 

कई लोग इनकम टैक्स भरते समय गलत फॉर्म चुन बैठते हैं। यह उनके लिए ठीक नहीं होता है। आपने भी अगर ऐसा किया है, तो आपका आईटीआर रिजेक्ट हो सकता है और सेक्शन 135 के अंतर्गत आपको रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के लिए निर्देशित किया जा सकता है। इसीलिए सही जानकारियां दें और सावधानी से, बगैर किसी जल्दबाजी के फॉर्म भरें।

बढ़ा चढ़ा कर बातें बताने से बचें

जी हां! इनकम टैक्स रिटर्न कोई 1 साल या 1 बार की प्रक्रिया नहीं है, इसीलिए सही जानकारी देने में आपको हिचकिचाना नहीं चाहिए। जानबूझकर आपको किसी जानकारी को छुपाना नहीं चाहिए या फिर अतिरिक्त, बढ़ा चढ़ाकर जानकारियां नहीं देना चाहिए। यह आपको इनकम टैक्स की नोटिस से बचाता है।

कर मुक्त आमदनी की ठीक जानकारियां दें 

आईटीआर भरते समय आपको एग्रीकल्चर से प्राप्त आमदनी, दूसरे लाभांश, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इत्यादि पर मिलने वाली छूट के लिए अलग-अलग सेक्शन होते हैं, जिन्हें आपको सावधानी से भरना होता है। इसमें किसी गलत-झूठ के लिए अप्लाई करने से बचें, अन्यथा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। थोड़ा पैसा बचाने के लिए बड़ी मुसीबत को आमंत्रण देना ठीक नहीं।

इसके साथ साथ टैक्स रिफंड क्लेम करने से पहले अपने 6a इस फॉर्म को सावधानी से चेक करें इसे आप किसी भी गलती से बचेंगे।

टैक्स रिटर्न वेरीफिकेशन

टैक्स रिटर्न भरने के बाद यह सबसे जरूरी प्रोसेस है और इसके लिए आपको ई फाइलिंग पोर्टल से ई वेरीफाई करना होता है। आपका आधार नंबर इसमें आपकी मदद करता है और आइटीआर वी फॉर्म में सिग्नेचर करके इसे सीपीसी बेंगलुरु भेज कर वेरिफाई किया जा सकता है।

इसके अलावा ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि आपको तमाम जानकारियों को ठीक ढंग से और सही-सही भरना चाहिए। अपना मोबाइल नंबर, आधार नंबर सही-सही आपको डालना चाहिए और इसी से आप किसी भी समय और कोई भी जानकारी प्राप्त करते हैं। 

- मिथिलेश कुमार सिंह