• यदि आप स्वरोजगार करते हैं तो टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी अवश्य लीजिए, मृत्युपरांत आपके नॉमिनी को मिलेगी बीमित राशि

विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी परिवार के हर कमाने वाले सदस्य को कमाई शुरू होने के साथ ही एक टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लेना चाहिए। क्योंकि कम उम्र में प्रीमियम कम रहता है और पूरी पॉलिसी अवधि के लिए इसमें कोई बदलाव नहीं होता है।

यदि आप भी हैं स्वरोजगारी व्यक्ति (सेल्फ एंप्लॉयड पर्सन) हैं, तो आपके लिए भी बहुत जरूरी है सावधि बीमा (टर्म इंश्योरेंस)। क्योंकि ईश्वर न करे, लेकिन यदि आपके साथ  कुछ अनहोनी हो गई तो टर्म इंश्योरेंस आपके बाद भी आपके परिवार को वित्तीय सुरक्षा देगा। इसलिए अब और विलम्ब नहीं कीजिए और शीघ्र ही एक टर्म इंश्योरेंस प्लान पालिसी ले लीजिए। क्योंकि टर्म प्लान पॉलिसी धारक की मृत्यु के बाद उसके नामिती यानी नॉमिनी को पूरा पैसा एकमुश्त मिलता है।

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जानकारों के मुताबिक, सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस प्लान पालिसी में आपको बहुत ही कम प्रीमियम में काफी ऊंची कीमत का कवर मिलता है। इसलिए जब भी आप टर्म इंश्योरेंस कवर लेने की योजना बनाएं तो यह अवश्य देखें कि यह आपकी सालाना आमदनी का कम से कम 10 गुना अवश्य होना चाहिए। आपको मालूम है कि दुनियाभर की तरह अपने देश में भी कोरोना वायरस कोविड 19 का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। बीते सितंबर तक इससे मरने वालों का आंकड़ा लगभग 1 लाख पर पहुंच गया है। 

ऐसे में यदि आप अपने और अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प व उपाय है। वैसे तो सावधि बीमा (टर्म इंश्योरेंस) सभी के लिए अपरिहार्य है, लेकिन यदि आप खुद का व्यवसाय (बिजनेस) करते हैं तो आपके लिए सावधि बीमा (टर्म इंश्योरेंस) और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।

दरअसल, सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस प्लान में आपको बहुत ही कम प्रीमियम में काफी ऊंची कीमत का बीमा कवर मिलता है। लिहाजा, इस तरह की पॉलिसी पूरी तरह सुरक्षा के मद्देनजर ली जाती हैं। यहां पर आपको यह स्पष्ट कर देना जरूरी समझता हूं कि किसी भी प्रकार की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी में परिपक्वता (मैच्योरिटी) पर पैसों से जुड़ा कोई फायदा नहीं होता है। लेकिन इतना अवश्य है कि पॉलिसीधारक की असमय मृत्यु होने पर नामिनी को इंश्योर्ड रकम मिल जाती है, जो बड़ी बात है। यह रकम ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान से कई गुना ज्यादा होती है।

# स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति के लिए क्यों ज्यादा जरूरी है सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस

यदि आप खुद का कारोबार (बिजनेस) करते हैं तो आप पर घर के साथ की भी समस्त जिम्मेदारी रहती है। फिलवक्त कोरोना संकट काल में कई लोगों को व्यापार में घाटा व नुकसान दोनों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते लोगों पर कर्ज (लोन) भी हो गया है। ऐसे में यदि आपको कुछ होता है तो इसका पूरा बोझ आपके परिवार पर आ जाएगा। अलबत्ता, यदि आपने सावधि बीमा (टर्म इंश्योरेंस) ले रखा है तो आपके परिवार को संभावित आर्थिक परेशानी का सामना कतई नहीं करना पड़ेगा।

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# आखिरकार कितना होना चाहिए बीमित राशि यानी इंश्योरेंस अमाउंट?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस कवर आपकी सालाना आमदनी का कम से कम 10 गुना होना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये है तो आपकी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी 50 लाख की होनी चाहिए। इसके अलावा, यदि आपके ऊपर कर्ज (लोन) है तो इसे भी ध्यान में रखना चाहिए।

# हर कोई अपनी परिस्थिति को देखते हुए चुनें अपना सही टर्म प्लान

सावधि बीमा पॉलिसी यानी टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय आपको अपनी उम्र और अवधि के तथ्यों को ध्यान में अवश्य रखना चाहिए। साथ ही, महंगाई को आपके परिवार की लाइफस्टाइल को बाधित करने से बचाने के लिए, आप ऊंचा इंश्योरेंस कवर भी ले सकते हैं। यह हमेशा याद रखें, कि यदि अपने महंगाई को अधिक महत्व नहीं दिया तो ये आपके परिवार को आगे परेशानी में डाल सकती है। इसके अतिरिक्त, सम अश्योर्ड का आकलन करते समय आप अपनी आमदनी के स्रोत, वर्तमान कर्ज और देनदारियां, परिवार के आश्रित सदस्य की संख्या, उनकी मौजूदा लाइफस्टाइल को बनाए रखने में आने वाले खर्च के अलावा अन्य वित्तीय लक्ष्यों, जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा, उनके शादी-ब्याह आदि को भी ध्यान में अवश्य रखना चाहिए। यदि ऐसा करने में आप सफल होते हैं तो आपको एक जिम्मेदार अभिभावक समझा जा सकता है। आपकी नजीर भी दूसरों को दी जा सकती है।

# एमडब्ल्यूपी एक्ट के साथ लेंगे सावधि जीवन बीमा तो पत्नी का भविष्य रहेगा सुरक्षित

यदि आप सामान्य रूप से सावधि बीमा करवाते हैं तो आपकी मृत्यु के बाद यह भी हो सकता है कि बीमा का पैसा किसी रिश्तेदार को या फिर पति ने जहां से लोन या उधार लिया हो, उसे मिल जाए। इससे आपकी सोच आपके बाद खटाई में पड़ सकती है। ऐसे में इन स्थितियों से बचने के लिए बीमाधारक को 'मैरिड वुमंस प्रॉपर्टी एक्ट, 1874 (एमडब्ल्यूपी एक्ट) के तहत ही सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस प्लान लेना चाहिए।

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दरअसल, एमडब्ल्यूपी एक्ट के तहत ली गई टर्म पॉलिसी को एक ट्रस्ट माना जाता है। लिहाजा, पॉलिसी की लाभ राशि पर केवल ट्रस्टियों का ही अधिकार होता है। ऐसे में डेथ क्लेम होने की स्थिति में पॉलिसी से प्राप्त पैसा ट्रस्ट को मिलता है, जिसे ट्रस्टी ही क्लेम कर सकता है। इसे कोई क्रेडिटर या रिश्तेदार भी क्लेम नहीं कर सकता है। यह ट्रस्ट आपकी पत्नी और बच्चों के लिए ही क्लेम राशि को सुरक्षित रखता है।

# जानिए कि किन किन लोगों को खरीदना चाहिए सावधि बीमा पॉलिसी यानी टर्म इंश्योरेंस प्लान?

विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी परिवार के हर कमाने वाले सदस्य को कमाई शुरू होने के साथ ही एक टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लेना चाहिए। क्योंकि कम उम्र में प्रीमियम कम रहता है और पूरी पॉलिसी अवधि के लिए इसमें कोई बदलाव नहीं होता है। लिहाजा, कम प्रीमियम का लाभ उठाने के लिए इसे कम उम्र में ही खरीद लेना चाहिए। हां, अगर आप कम उम्र में सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस नहीं ले पाए हैं तो आप इसे अभी भी खरीद सकते हैं।

# सोचिए, कब खरीदें सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस?

सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी को आप जितनी जल्दी ले लेंगे, उतना ही फायदे में रहेंगे। और आप जितना देर करेंगे, प्रीमियम की राशि बढ़ती जाएगी। इसलिए यदि  आपको सस्ता प्रीमियम चाहिए तो शीघ्रता पूर्वक टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लें। हां, यह याद रखें कि।आम तौर पर सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी 10, 15, 20, 25 और 30 साल के लिए ही ली जाती हैं। ऐसे में अब आप और विलम्ब नहीं करें।

# समझिए, सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस क्या है? यह कब फायदा देती है।

बीमा प्रोफेशनल के मुताबिक, सावधि बीमा यानी टर्म इंश्योरेंस प्लान एक तरह की जीवन बीमा पॉलिसी होती है जो सीमित अवधि के लिए निश्चित भुगतान दर पर बीमित व्यक्ति को कवरेज प्रदान करती है। कहने का तातपर्य यह कि यदि पॉलिसी की अवधि के दौरान ही बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु लाभ राशि नामांकित व्यक्ति को हस्तांतरित कर दी जाती है। स्पष्ट है कि। यह अनिश्चितता या फिर मृत्यु की स्थिति में बीमित व्यक्ति के परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। क्योंकि तब ऐसी वित्तीय सुरक्षा की आवश्यकता सभी व्यक्तियों को होती है। इसलिए निर्णय लेने में आप और अधिक विलम्ब मत कीजिए।

कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार