Fatty Liver को जड़ से मिटाएगा ये Super Drink, किचन की 3 चीजों से करें Liver Detox

Turmeric and lemon Remedy
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फैटी लिवर की समस्या कम करने के लिए हल्दी, काली मिर्च और नींबू का सेवन एक प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय है। यह मिश्रण लिवर को डिटॉक्स कर जमे हुए फैट को घटाता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी और मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है।

खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण बीमारियां काफी बढ़ती जा रही है। आज के समय में फैटी लिवर की समस्या आम बन गई है। अगर आपके शरीर में इंफ्लेमेशन लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहता है, तो इस कारण से इंसुलिन सेंसिटिविटी, मेटाबॉलिज्म और लिवर हेल्थ पर भरोसा होता है। इसके कारण व्यक्ति को कमजोरी, फैटी लिवर, मोटापा और हार्मोनल इंबैलेंस जैसी दिक्कतें होती हैं। इसलिए अपने लिवर हेल्थ का ध्यान देना काफी जरुरी है। अगर आप सही खानपान पर ध्यान देते हैं, ऐसा करने से लिवर हेल्थ में सुधार आता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। कई आयुर्वेदिक हर्ब्स लिवर फंक्शन और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में काफी मदद करते हैं। हल्दी, काली मिर्च और नींबू इन्हीं में से एक हैं। इसको अपनी डाइट में कैसे शामिल करें, आइए आपको बताते हैं। 

फैटी लिवर को कम करने के लिए करें हल्दी, काली मिर्च और नींबू का इस्तेमाल

- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि, हल्दी लिवर को डिटॉक्स करती हैं, इंफ्लेमेशन और लिवर में जमे हुए फैट को कम करती है।

 - यह ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को भी सुधारती है और फैटी लिवर में बेहद फायदेमंद होती है।

 - हल्दी, फैटी लिवर, पीसीओएस, मेटाबॉलिक इंबैलेंस और इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद करता है। 

- वैसे तो हल्की का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जाता है, लेकिन आप हल्दी को थोड़े से घी में मिलाकर खाना फायदेमंद रहने वाला है।

- नींबू, लिवर एंजाइम्स के सीक्रेशन को बढ़ाता है, फैट डाइजेशन और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है।

 - ये फैटी लिवर, अपच और मील्स के बाद होने वाले भारीपन को कम करने में मदद करता है।

 - गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना अच्छा रहेगा। इसके अतिरिक्त, सूप, सलाद और दालों में नींबू निचोड़कर खाना फायदेमंद रहने वाला है।

- काली मिर्च पाचन को बेहतर बनाने का कम करती है। इससे शरीर में जमा टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है। 

- इस उपाय से फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस में बेहतर तरीके से काम करता है। इसके अलावा, आप काली मिर्च को कूटकर खाने में डालें। जिन लोगों को एसिडिटी है, उन्हें इसके अधिक इस्तेमाल से बचना जरुरी है। 

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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