हां, हम 1965 में हार गए थे...भारत पाकिस्तान की जंग को लेकर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दुनिया के सामने कबूला सच

Pakistan
Wikimedia Commons/ANI
अभिनय आकाश । Sep 17 2026 12:12PM

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर अपने विरोधाभासी बयानों को लेकर घिर गए हैं। साल 2006 में उन्होंने संसद में पाकिस्तानी सेना की नाकामियों का जिक्र किया था, जबकि अब वे इसे पाकिस्तान का गौरवशाली अध्याय बता रहे हैं। अपने बयानों में आए इस बड़े बदलाव के कारण सोशल मीडिया पर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक बार फिर अपने ही पुराने बयान के सामने खड़े नजर आ रहे हैं। करीब 20 साल पुराने उनके एक बयान और अब दिए गए नए बयान को अगर आमने-सामने रख दें तो सवाल उठना लाजमी है। आखिर ख्वाजा आसिफ की बात पर भरोसा किया जाए तो किस बात पर किया जाए? एक तरफ साल 2006 का बयान है जिसमें ख्वाजा आसिफ पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर 1965 की जंग और पाकिस्तान की सैन्य नाकामियों का जिक्र करते हुए नजर आते हैं। दूसरी तरफ 2026 का उनका नया बयान है जिसमें वो 1965 की लड़ाई को पाकिस्तान के लिए गौरव का ध्याय बताते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी विरोधाभास को लेकर सोशल मीडिया पर ख्वाजा आसिफ घिर गये हैं।

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दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में ख्वाजा आसिफ 2025 के भारत पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। वो कह रहे हैं कि भारत ने पाकिस्तान को ललकारा था और पाकिस्तान की तरफ [संगीत] से जो जवाब दिया गया उसे पूरी दुनिया ने देखा। उसके बाद कार्यक्रम के होस्ट ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अय्यूब खान और 1965 की जंग  का जिक्र किया। जवाब में ख्वाजा आसिफ अय्यूब खान के दौर को पाकिस्तान के इतिहास का सुनहरा अध्याय बताते हैं। वो कहते हैं कि पाकिस्तान ने एक बड़े हमले का मुकाबला किया और यहां तक दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि पाकिस्तान ने दुश्मन के इलाके में जाकर लड़ाई लड़ी। यानी कि इस बयान में ख्वाजा आसिफ का जोर पाकिस्तान की सैन्य उपलब्धि और 1965 की जंग को गौरव के रूप में पेश करने पर है। 

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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में ख्वाजा आसिफ खुद पाकिस्तान की सेना और उसके युद्ध रिकॉर्ड पर सवाल उठा रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने 1948, 1965, 1971 और कारगिल जैसी लड़ाईयों का जिक्र किया। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर इन युद्धों का निष्पक्ष जांच की जाए तो देश के प्रतिनिधियों को शर्म महसूस होगी। इसी भाषण में ख्वाजा आसिफ ने 1965 की जंग के संदर्भ में पाकिस्तान के सरेंडर की बात कही थी। वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 1965 की जंग में पाकिस्तान की सेना ने कश्मीर में जाने से इंकार किया था और फिर कबायली लड़ाके वहां गए। जानकारी देते चलें कि 1965 की जंग का इतिहास इतना सीधा नहीं है कि उसे सिर्फ भारत की जीत या पाकिस्तान की जीत के दो शब्दों में समेट कर रख दिया जाए। अमेरिकी विदेश विभाग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक 1965 का युद्ध कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ। दूसरा बड़ा युद्ध था। पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर में सैन्य कारवाई की कोशिश के बाद संघर्ष बढ़ा और भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के दूसरे हिस्सों पर भी सैन्य कारवाई की।

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पाकिस्तान के युद्ध इतिहास में 1965 और 1971 को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। 1965 में युद्ध विराम और ताशकंद समझौते के साथ लड़ाई खत्म हुई। 1971 में पाकिस्तान का विभाजन हुआ और इसी इतिहास को लेकर जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान बदलते हुए नजर आए तो सवाल सिर्फ सोशल मीडिया का नहीं रह जाता।

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