जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरान

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अभिनय आकाश । Apr 23 2026 5:32PM

बता दें कि आज की जंग सिर्फ जमीन या फिर आसमान में नहीं बल्कि समंदर की गहराइयों में जीती जाती है। जहां दुश्मन आपको देख नहीं सकता। लेकिन आप उसे खत्म कर सकते हैं। उसे तबाह कर सकते हैं। मिडिल ईस्ट में एक तरफ बढ़ता तनाव है और वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की जो सनक है उस पर भी कोई भरोसा नहीं है और हिंद महासागर में चाइना की बढ़ती हलचल और इसी बीच भारत ने जर्मनी में एक ऐसा दांव खेला है जिसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक हलचल मचा दी है और इस पूरे मिशन के केंद्र में है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनका जर्मनी दौरा।

समंदर में जब भारत की नौसेना अपनी ताकत दिखाती है तो दुश्मन के पर खच्चे उड़ जाते हैं और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी में एक ऐसी जगह अब कदम रखा है। जिसने 5310 किमी दूर पाकिस्तान की धरती को हिलाकर रख दिया है। भारत के तहलके ने शहबाज मुनीर की सांसों को इस वक्त भुला दिया है। बता दें कि आज की जंग सिर्फ जमीन या फिर आसमान में नहीं बल्कि समंदर की गहराइयों में जीती जाती है। जहां दुश्मन आपको देख नहीं सकता। लेकिन आप उसे खत्म कर सकते हैं। उसे तबाह कर सकते हैं। मिडिल ईस्ट में एक तरफ बढ़ता तनाव है और वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की जो सनक है उस पर भी कोई भरोसा नहीं है और हिंद महासागर में चाइना की बढ़ती हलचल और इसी बीच भारत ने जर्मनी में एक ऐसा दांव खेला है जिसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक हलचल मचा दी है और इस पूरे मिशन के केंद्र में है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनका जर्मनी दौरा। 

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बता दें कि यह सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है बल्कि यह भारत की समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देने की रणनीति है। उन्होंने वर्लिन में भारतीय समुदाय को यहां पर संबोधित भी किया और भारत जर्मनी के 75 साल पुराने रिश्तों को और भी ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया। जर्मनी आज यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां भारत में इस वक्त सक्रिय भी हैं। समंदर के नीचे भारत की ताकत को कई गुना ज्यादा बढ़ाना। भारत और जर्मनी के बीच बता दें कि करीब $90 करोड़ यानी कि $ बिलियन डॉलर की पनडुपी डील पर चर्चा चल रही है। जिसे प्रोजेक्ट 75i कहा जाता है। इस डील के तहत आधुनिक पनडुपियां मिलेगी। जर्मनी से टेक्नोलॉजी इंडिया ट्रांसफर होगी और भारत में ही इनका निर्माण किया जाएगा। यानी कि स्वदेशी होंगी ये पनडुपियां। यानी भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश ही नहीं रहा बल्कि खुद ताकत बनाने वाला देश बनेगा। इस दौरे के सबसे बड़ी झलक तब सामने आई जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी की एक बेहद खतरनाक पनडुपी का निरीक्षण किया। यह पनडुपी है। 

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बता दें कि टाइप 212 सबमरीन यह सबमरीन कितनी खतरनाक है। सबसे पहले पानी के अंदर यह बिना आवाज के चलती है। दूसरी बात दुश्मन के सेंसर से यह बचती है। तीसरी गहराई में लंबे समय तक यह टिके रह सकती है। साइलेंट अंडर वाटर मूवमेंट का मतलब यह होता है कि यह जो पनडुपी है, यह पानी के अंदर इतनी शांति से चलती है कि दुश्मन को इसकी मौजूदगी का अंदाजा तक नहीं होता। चाहे फिर वो कुछ भी कर ले। स्टेल्थ डिजाइन का मतलब यह होता है कि इसका ढांचा और तकनीक ऐसी है कि यह रडार और सोनार से लगभग छुपी रह सकती है और उनकी पकड़ में नहीं आती। डीप सी एंडोरेंस का मतलब यह होता है कि यह लंबे समय तक गहराई में रहकर अपना मिशन पूरा कर सकती है। बिना बार-बार ऊपर आए सतह पर आए। 

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