Chenab नदी पर भारत का Mega Project, Sawalkote Dam से क्यों बढ़ी Pakistan की टेंशन? जानें सब कुछ

Sawalkote Dam project
प्रतिरूप फोटो
AI Generated
Neha Mehta । Feb 8 2026 3:53PM

जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट के सवलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है, जो सिंधु जल संधि पर तनाव के बीच एक बड़ा कदम है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि पाकिस्तान पर भारत के रणनीतिक दबदबे को भी मज़बूत करेगी।

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है, जिसका नाम है सवलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (Sawalkote Hydroelectric Project)। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 5,129 करोड़ रुपये है।

खास बात यह है कि 'सिंधु जल संधि' (Indus Water Treaty) को लेकर चल रहे तनाव के बीच, मोदी सरकार की तरफ से हरी झंडी पाने वाला यह पहला बड़ा नया प्रोजेक्ट है। यहाँ जानिए इस मेगा प्रोजेक्ट और जम्मू-कश्मीर की अन्य बिजली परियोजनाओं से जुड़ी मुख्य बातें:

सवलकोट प्रोजेक्ट: क्या है खास?

कितनी बिजली बनेगी: यह कुल 1,856 मेगावाट (MW) का प्रोजेक्ट है। इसे दो चरणों में बनाया जाएगा (पहले चरण में 1,406 MW और दूसरे में 450 MW)।

लोकेशन: यह चिनाब नदी पर बगलिहार प्रोजेक्ट के ऊपर और सलाल प्रोजेक्ट के नीचे की तरफ स्थित है।

काम की रफ़्तार: NHPC ने 5 फरवरी को कंपनियों को इसे बनाने के लिए आमंत्रित (Bids) किया है। सरकार इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। अनुमान है कि इसे बनने में करीब 9 साल लगेंगे।

पाकिस्तान की बढ़ती बेचैनी क्यों?

चिनाब नदी पाकिस्तान के लिए 'लाइफलाइन' की तरह है। पाकिस्तान की 90% खेती इसी बेसिन पर टिकी है।

पानी पर कंट्रोल: पाकल दुल जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए भारत न सिर्फ बिजली बनाएगा, बल्कि पानी के बहाव के समय (Timing) को भी कंट्रोल कर सकेगा। पाकिस्तान को डर है कि भारत अपनी मर्जी से पानी रोक या छोड़ सकता है।

संधि का साइडलाइन होना: पुलवामा और पहलगाम हमलों के बाद से भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) से जुड़ी बैठकों में जाना बंद कर दिया है। भारत अब अपनी नदियों के पानी का पूरा इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ रहा है।

नदी का रास्ता मोड़ना: क्वार और रतले जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए जब भारत ने नदी का रास्ता सुरंगों की तरफ मोड़ा, तो पाकिस्तान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया।

भारत का यह कदम साफ संदेश देता है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक हितों (Strategic Interests) के लिए अब और इंतज़ार नहीं करेगा। जम्मू-कश्मीर में बन रहे ये बांध न केवल वहां बिजली की कमी दूर करेंगे, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भारत का पलड़ा भी भारी करेंगे।

All the updates here:

अन्य न्यूज़