मिसाइल पर किसके नाम का पोस्टर लगाकर मार रहा ईरान, युद्ध में नया संदेश

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अभिनय आकाश । Mar 24 2026 6:56PM

मिसाइल पर पोस्टर चिपकाया जा रहा है और इस पोस्टर पर लिखा है यह जंग अवैध है अमानवीय है और थैंक यू प्रधानमंत्री। दरअसल बता दें कि यह शब्द किसी आम आदमी के नहीं है बल्कि ये शब्द हैं पेड्रोल शांत के। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। स्पेन के प्रधानमंत्री जिन्होंने खुलकर इस जंग का विरोध कर दिया है और कहा है कि यह युद्ध अवैध है।

जंग सिर्फ मैदान में नहीं लड़ी जाती। कभी-कभी शब्द भी मिसाइल बन जाते हैं। मिडिल ईस्ट में विस्फोटक जंग के बीच अब एक नई तरह की जंग शुरू हो चुकी है। और इस जंग का नाम है नैरेटिव की जंग। और इस बार ईरान ने ऐसा दांव चल दिया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अब ईरान की तरफ खींच लिया है। दरअसल ईरान और इजराइल के बीच चल रही भीषण टक्कर के बीच अब इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआरजीसी का एक संदेश का है। मिसाइल पर पोस्टर चिपकाया जा रहा है और इस पोस्टर पर लिखा है यह जंग अवैध है अमानवीय है और थैंक यू प्रधानमंत्री। दरअसल बता दें कि यह शब्द किसी आम आदमी के नहीं है बल्कि ये शब्द हैं पेड्रोल शांत के। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। स्पेन के प्रधानमंत्री जिन्होंने खुलकर इस जंग का विरोध कर दिया है और कहा है कि यह युद्ध अवैध है। 

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ईरान ने उनके इसी बयान को उठाया और उसे मिसाइल पर चिपका कर इजराइल की तरफ दाग दिया। लोहा लोहे को काटता है। यह कहावत तो बिल्कुल सही सुनी होगी आपने। लेकिन यहां ईरान ने शब्दों से ऐसा तीखा वार किया है कि अब ट्रंप समेत नेतन्या के होश उड़ गए हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर ईरान ने ऐसा क्यों किया? तो आप बता दें कि दरअसल यह सिर्फ हमला नहीं था बल्कि यह ईरान की एक मैसेजिंग स्ट्रेटजी थी। ईरान दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि अब ईरान वो अकेला नहीं है। दुनिया के बड़े नेता भी इस जंग के खिलाफ हो चुके हैं। और यही वजह है कि पेड के बयान को अब ईरान हथियार बनाकर इस्तेमाल कर रहा है। अब दूसरी तरफ अगर नजर डालते हैं तो डोनाल्ड ट्रंप जो शुरुआत में आक्रामक तेवर दिखाते हुए नजर आए। धमकियां, अल्टीमेटम, तबाही की चेतावनी उन्होंने दी। लेकिन अब उनके सुर भी बदलते हुए नजर आ रहे हैं। 

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कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने खुद आदेश दिया था कि ईरान के पावर प्लांट एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कम से कम 5 दिन तक कोई भी हमला ना किया जाए। अब सवाल उठता है क्यों? तो दरअसल इसके पीछे आधिकारिक वजह है और बातचीत की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन असली कहानी कुछ और भी हो सकती है क्योंकि एक तरफ दुनिया के कई देश ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन इस जंग में कूदने से पीछे हट रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ अब स्ट्रेट ऑफ ऑलमोस्ट पर संकट और गहराया गया है। इस समय अपने चरम पर है। तेल सप्लाई खतरे में है। एनर्जी क्राइसिस का डर इस समय पूरी दुनिया को सता रहा है।  सबसे बड़ा खतरा तो और डर इस बात का है कि अगर ईरान के एनर्जी ठिकानों पर हमला होता है तो ईरान पूरे मिडिल ईस्ट की इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। यानी अगर आग से खेलोगे तो जलोगे क्योंकि ईरान ने साफ चेतावनी दे दी है कि अगर उसके ऊपर हमला हुआ तो जवाब और भी बड़ा होगा और यही वो मोड़ है जहां से पूरा खेल पलटता हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिका है जो दबाव बनाना चाह रहा है लेकिन कदम अपने संभाल कर रख रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ अब ईरान खड़ा है जो सिर्फ जवाब नहीं दे रहा बल्कि नैरेटिव, कूटनीति और सैन्य तीनों मोर्चों पर खेल रहा है।

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