शीत युद्ध के समय आई थ्योरी का पुतिन यूक्रेन युद्ध में करेंगे इस्तेमाल? जानें क्या है Nuclear Deterrent Force जिसे अलर्ट पर रखा गया

शीत युद्ध के समय आई थ्योरी का पुतिन यूक्रेन युद्ध में करेंगे इस्तेमाल? जानें क्या है Nuclear Deterrent Force जिसे अलर्ट पर रखा गया

परमाणु निरोध एक विचारधारा है जो शीत युद्ध से पहले की है जिसका उपयोग किसी भी परमाणु आक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है। रूसी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि यदि यूएस और अन्य नाटो सहयोगी यदि वे यूक्रेनी सेना की सहायता करने का प्रयास करते हैं, तो रूस परमाणु हथियारों से जवाब देने के लिए तैयार होगा।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने रक्षा प्रमुखों को देश के परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रखने का आदेश दिया। पुतिन ने कहा कि नाटो के प्रमुख सदस्य देशों द्वारा “आक्रामक बयानबाजी” की प्रतिक्रिया में उन्होंने यह निर्णय लिया। पुतिन के इस ऐलान के बाद यूक्रेन पर रूस द्वारा किये गए हमले पर पूर्वी और पश्चिमी देशों में और इजाफा कर दिया।  एक तरफ जहां पुतिन की एटमी धमकी को लेकर संयुक्त राष्ट्र भी सख्त नजर आया। यूएन की तरफ से कहा गया कि न्यूक्लियर वॉर की धमकी देना शर्मनाक है। 

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पुतिन के इस आदेश के पीछे की वजह?

24 फरवरी की अहले सुबह से ही रूस ने यूक्रेन पर चढ़ाई शुरू कर दी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस कदम से पश्चिमी देश उनके विरोध में आ गए। अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशों की तरफ से रूस पर कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए। पश्चचिमी देशों की तरफ से रूस के खिलाफ लगातार बयान भी सामने आ रहे हैं और मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया। एक तरफ जहां भारत, चीन और यूएई ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग से किनारा किया तो वहीं इस प्रस्ताव पर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नार्वे, आयरलैंड, अल्बानिया, गबोन, मैक्सिको, ब्राजील, घाना और केन्या जैसे देशों ने अपनी मुहर लगाई। पुतिन ने परमाणु अस्त्रों को ‘अलर्ट’ पर रखने के लिए न केवल नाटो के सदस्य देशों के बयानों का हवाला दिया बल्कि रूस और अपने (पुतिन) विरुद्ध पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। 

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क्या है परमाणु निवारक बल

परमाणु निरोध एक विचारधारा है जो शीत युद्ध से पहले की है जिसका उपयोग किसी भी परमाणु आक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है। जैसा कि अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ ने परमाणु हथियारों के निर्माण की होड़ के दौरान अमेरिका ने परमाणु निरोध की रणनीति अपनाई, जिसका अर्थ है कि यदि सोवियत संघ या किसी भी देश ने हमला करने का प्रयास किया, तो अमेरिका तेजी से जवाब देगा और इससे भी बड़ा हमला करेगा। पुतिन उसी रणनीति का उपयोग कर रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि यदि यूएस और अन्य नाटो सहयोगी रूसी अर्थव्यवस्था के खिलाफ भारी प्रतिबंध लगाना जारी रखते हैं, या यदि वे यूक्रेनी सेना की सहायता करने का प्रयास करते हैं, तो रूस परमाणु हथियारों से जवाब देने के लिए तैयार होगा।