Pakistan में सेना बनाम सरकार, Mohsin Naqvi के बयान से शहबाज शरीफ कैबिनेट में हलचल

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की कार्यशैली पर तंज कसा। सेना प्रमुख आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले नक़वी के इस बयान से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इससे एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि पाकिस्तान में वास्तविक सत्ता किसके हाथ में है।
संसदीय लोकतंत्र में गृह मंत्री प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट में काम करते हैं और राजनीतिक रूप से सरकार के प्रमुख के अधीन होते हैं। लेकिन पाकिस्तान का लोकतंत्र शायद ही कभी कायदे-कानून के हिसाब से चला हो, खासकर तब जब रावलपिंडी की छाया इस्लामाबाद पर पड़ने लगती है। मंगलवार को इस्लामाबाद में हुए एक कार्यक्रम में जहाँ प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ भी मौजूद थे, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने एक चुने हुए नेता के एक महीने तक दफ़्तर से दूर रहने" पर तीखा तंज कसा। दिलचस्प बात यह है कि शरीफ़ ब्रिटेन और अमेरिका की दो हफ़्ते की यात्रा से लौटने के कुछ ही दिनों बाद इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, नकवी ने एक ऐसे चुने हुए प्रतिनिधि (जिनका नाम नहीं लिया गया) की तुलना एक दूसरे व्यक्ति से की, जो उनके अनुसार, बिना एक घंटे का ब्रेक लिए भी काम कर रहे थे।
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पाकिस्तान के असल शासक आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले नकवी की इन बातों ने काफी ध्यान खींचा है और लोगों को हैरान भी किया है। इससे पाकिस्तान पर नज़र रखने वालों के मन में वही पुराना सवाल उठ रहा है: असल में सरकार कौन चला रहा है? नकवी को आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है, जिनका पाकिस्तान के सिविल और सुरक्षा तंत्र पर 2022 से काफी असर बढ़ा है। भारत में नकवी को "ट्रॉफी चोर" के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने 2025 में एशिया कप की ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट टीम को नहीं सौंपी थी। नक़वी ने चुने हुए प्रतिनिधि का ज़िक्र करते हुए शहबाज़ का नाम नहीं लिया, और न ही बिना एक घंटे का ब्रेक लिए काम करने वाले व्यक्ति के बारे में बात करते हुए मुनीर का नाम लिया।
नक़वी की ये बातें पाकिस्तान के लिए एक बहुत ही मुश्किल समय में आई हैं। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के हज़ारों समर्थक उनकी रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर हैं, जबकि मिली-जुली सरकार बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ते विद्रोह से जूझ रही है। हालांकि जानकार लंबे समय से पाकिस्तान की सेना को देश की राजनीति का सबसे बड़ा फ़ैसला लेने वाला मानते रहे हैं, लेकिन मुनीर के दौर में सत्ता का पलड़ा सेना के पक्ष में और भी ज़्यादा झुक गया है। साथ ही, ऐसी चर्चा भी है कि इस्लामाबाद, PTI-शासित खैबर पख्तूनख्वा (जो पख्तूनों का इलाका है) में गवर्नर शासन लगाने पर विचार कर रहा है। 30 जुलाई को नकवी ने कहा था कि पाकिस्तान का मौजूदा गवर्नेंस सिस्टम "फेल" हो चुका है और देश की समस्याओं को हल करने में नाकाम है।
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वे अपना समय कहाँ बिता रहे हैं? नकवी का सवाल
नकवी की ये खास बातें मंगलवार को इस्लामाबाद में कश्मीर चौक अंडरपास के शिलान्यास समारोह में सामने आईं। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ भी शामिल हुए थे। पाकिस्तान की राजधानी अगस्त 2027 में होने वाले SCO समिट की तैयारी कर रही है और इस्लामाबाद को सुंदर और बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है। इस कार्यक्रम में, नकवी ने एक डेवलपमेंट प्रोग्राम को चुने हुए प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर लेक्चर में बदल दिया। ध्यान दें कि नकवी चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि उन्हें मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट ने अपने आदमी के तौर पर शरीफ़ की कैबिनेट में शामिल किया था। नकवी ने कहा कि हम सभी जनता के प्रति जवाबदेह हैं। उन्हें बस एक ही बात देखनी है कि क्या उनके चुने हुए प्रतिनिधि अपना हर मिनट उन्हें दे रहे हैं या नकारात्मक राजनीति में लगा रहे हैं।" इसके बाद उन्होंने एक ऐसा अंतर बताया जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई।
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