‘गे प्रतिबंध’ को लेकर सिंगापुर डीजे ने ‘टेडएक्स टॉक’ से अपना नाम वापस लिया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जुलाई 4, 2019   18:03
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‘गे प्रतिबंध’ को लेकर सिंगापुर डीजे ने ‘टेडएक्स टॉक’ से अपना नाम वापस लिया
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सिंगापुर के एक समलैंगिक डीजे ने एक शिक्षण संस्थान में ‘टेडएक्स टॉक’ से अपना नाम वापस ले लिया है क्योंकि उनसे अपने भाषण में लैंगिकता से संबंधित खंड में बदलाव के लिये कहा गया था। उन्होंने कहा कि वह अपने ‘‘संघर्षों और बलिदानों’’ को नहीं छिपायेंगे। सिंगापुर में समलैंगिकता को लेकर अब भी रूढ़ीवादी विचार हैं।

सिंगापुर। सिंगापुर के एक समलैंगिक डीजे ने एक शिक्षण संस्थान में ‘टेडएक्स टॉक’ से अपना नाम वापस ले लिया है क्योंकि उनसे अपने भाषण में लैंगिकता से संबंधित खंड में बदलाव के लिये कहा गया था। उन्होंने कहा कि वह अपने ‘‘संघर्षों और बलिदानों’’ को नहीं छिपायेंगे। सिंगापुर में समलैंगिकता को लेकर अब भी रूढ़ीवादी विचार हैं। वहां समान लिंग के लोगों के बीच यौन संबंध औपनिवेशिक काल के कानून के तहत तकनीकी रूप से अवैध हैं। यह अलग बात है कि इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

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जोशुआ सिमॉन स्थानीय रेडियो स्टेशन में जाने माने डीजे हैं और शनिवार को वह सिंगापुर पॉलीटेक्निक में 16 से 19 साल के छात्रों को संबोधित करने वाले थे। ‘टेड’ से नि:शुल्क लाइसेंस के तहत ‘टेडएक्स’ कार्यक्रम का अपने स्तर पर आयोजित किया जाता है। ‘टेड’ एक गैरलाभकारी संस्थान है जो प्रभावी शख्सियतों के वक्तव्यों को प्रदर्शित करता है। अपनी एक फेसबुक पोस्ट में 29 वर्षीय सिमॉन ने कहा कि गे होने की वजह से उन्हें अपने भाषण में बदलाव करने के लिये कहा गया था। इसमें वह किस्सा भी शामिल था कि उनके पिता को इस बारे में कब पता चला। उन्होंने लिखा कि मेरे संघर्षों और बलिदानों को छिपाना उनके लिये शर्म की बात है। मैंने स्कूल से कहा कि मैं अब यह टॉक (कार्यक्रम) नहीं करूंगा। मैंने अपनी स्क्रिप्ट में कोई बदलाव नहीं करना पसंद किया।

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यह पहली बार नहीं है जब ‘टेडएक्स टॉक’ को समलैंगिकता से संबंधित संवेदनशील विषय को आधार बनाकर रद्द किया गया हो। पिछले साल भी एक गे कार्यकर्ता को प्रतिष्ठित कैथोलिक स्कूल में भाषण देने से रोक दिया गया। सिंगापुर पॉलीटेक्निक ने इस बात की पुष्टि की कि कार्यक्रम आयोजकों ने सिमॉन को अपने भाषण में बदलाव का सुझाव दिया था जो उनकी लैंगिकता से संबंधित था क्योंकि उनका मानना था कि यह ‘‘लक्षित दर्शकों के लिये अनुचित’’ हो सकता है। प्रवक्ता ने कहा कि दुर्भाग्य है कि इसके (बदलाव करने के) बजाय उन्होंने कार्यक्रम में नहीं बोलने का फैसला किया है। सिमॉन ने कहा कि संस्थान ने उन्हें कहा था कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय के नियमों का पालन करना होगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की सूचना नहीं थी और प्रवक्ताओं के चयन पर चर्चा में मंत्रालय शामिल नहीं था।







26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद संगठन के तीन और नेताओं को 15-15 साल की सजा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   19:10
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26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद संगठन के तीन और नेताओं को 15-15 साल की सजा
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जेयूडी के वरिष्ठ नेता जफर इकबाल को अब कुल मिलाकर 41 साल जेल में बिताने होंगे। पंजाब पुलिस के आतंकवाद-रोधी विभाग ने सईद समेत जेयूडी नेताओं के खिलाफ विभिन्न शहरों में लगभग 41 मामले दर्ज किये थे। निचली अदालतें अब तक 27 मामलों में फैसला सुना चुकी है।

लाहौर। पाकिस्तान की एक अदालत ने आतंकवाद को वित्तीय मदद मुहैया कराने के दो मामलों में मुंबई आतंकी हमले के सरगना हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) के तीन और आतंकवादियों को 15-15 साल कारावास की सजा सुनाई है। लाहौर की आतंकवाद रोधी-अदालत (एटीसी) के न्यायाधीश एजाज अहमद बुट्टार ने बृहस्पतिवार को अब्दुल सलाम बिन मोहम्मद, जफर इकबाल तथा मोहम्मद अशरफ को सजा सुनाई। जेयूडी प्रमुख सईद के बहनोई प्रोफेसर हाफिज अब्दुल रहमान मक्की को दोनों मामलों में छह-छह महीने की सजा सुनाई गई है। संदिग्धों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया।

मीडिया को सुनवाई की रिपोर्टिंग करने की अनुमति नहीं थी। इससे एक दिन पहले अदालत ने आतंकवाद को वित्तीय मदद मुहैया कराने के मामले में सईद के प्रवक्ता याहया मुजाहिद को 15 और साल के कारावास की सजा सुनाई थी। एटीसी ने पिछले महीने आतकंवाद के वित्तपोषण के दो मामलों में मुजाहिद को 32 साल की सजा सुनाई थी।

जेयूडी के वरिष्ठ नेता जफर इकबाल को अब कुल मिलाकर 41 साल जेल में बिताने होंगे। पंजाब पुलिस के आतंकवाद-रोधी विभाग ने सईद समेत जेयूडी नेताओं के खिलाफ विभिन्न शहरों में लगभग 41 मामले दर्ज किये थे। निचली अदालतें अब तक 27 मामलों में फैसला सुना चुकी है। एटीसी ने आतंकवाद को वित्तीय मदद पहुंचाने के मामलों में सईद को आतंकवाद-रोधी अधिनियम की धारा 11-एन के तहत कुल मिलकर 21 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। 70 वर्षीय सईद जुलाई 2019 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। इस तरह की खबरें हैं कि उसे जेल में ‘‘वीआईपी प्रोटोकॉल’’ दी गई है।







महामारी के कारण पाकिस्तान के हालात और खराब, इमरान खान ने की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ये अनुरोध

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   19:03
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महामारी के कारण पाकिस्तान के हालात और खराब, इमरान खान ने की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ये अनुरोध
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पाकिस्तान ने महामारी समाप्त होने तक कुछ देशों की कर्ज अदायगी टालने की जरूरत बताई है।डॉन अखबार की खबर के अनुसार बृहस्पतिवार को कोविड-19 पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में तत्काल कार्रवाई के लिहाज से दस सूत्रीएजेंडा को प्रस्तुत करते हुए खान ने उन कदमों पर जोर दिया जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे समय में उठाने चाहिए।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध किया है कि कोरोना वायरस महामारी के खत्म होने तक कम आय वाले और सर्वाधिक प्रभावित देशों के लिए ऋण अदायगी को निलंबित कर दिया जाए तथा अल्प विकसित देशों की देनदारी को निरस्त कर दिया जाए। शुक्रवार को एक खबर में यह जानकारी दी गयी। नकदी के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियां महामारी के कारण और बढ़ गयी हैं तथा इमरान खान की सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) समेत वैश्विक निकायों से आर्थिक मदद की व्यवस्था कर रही है ताकि संकट से उबरा जा सके।

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डॉन अखबार की खबर के अनुसार बृहस्पतिवार को कोविड-19 पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में तत्काल कार्रवाई के लिहाज से दस सूत्री एजेंडा को प्रस्तुत करते हुए खान ने उन कदमों पर जोर दिया जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे समय में उठाने चाहिए। अखबार के मुताबिक उनकी सूची में पहली चीज कम आय वाले और सर्वाधिक प्रभावित देशों के लिए कर्ज अदायगी महामारी के खत्म होने तक निलंबित करने के लिए अनुरोध करना होगा। दूसरी प्राथमिकता अल्प विकसित देशों के लिए कर्ज माफी की मांग होगी जो अपना ऋण अदा नहीं कर सकते। बृहस्पतिवार को शुरू हुए महासभा के दो दिवसीय डिजिटल सत्र में करीब 100 वैश्विक नेता और कई मंत्री भाग ले रहे हैं।







अमेरिका ने भारत को नौ करोड़ डॉलर के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   18:52
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अमेरिका ने भारत को नौ करोड़ डॉलर के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी
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अमेरिका ने भारत को नौ करोड़ डॉलर के सैन्य उपकरणों और सेवाओं की बिक्री को मंजूरी दी है। डीएससीए ने अमेरिकी कांग्रेस को एक प्रमुख बिक्री अधिसूचना जारी कर कहा कि हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति एवं आर्थिक प्रगति के लिए भारत एक महत्वपूर्ण शक्ति बना हुआ है।

वाशिंगटन। अमेरिका ने अपने सी-130जे सुपर हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमान के बेड़े की मदद के रूप में भारत को नौ करोड़ डॉलर के सैन्य उपकरणों और सेवाओं की बिक्री की मंजूरी दे दी है। रक्षा विभाग की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों को मजबूती प्रदान करने तथा एक ‘प्रमुख रक्षा साझेदार’ की सुरक्षा को दुरुस्त करने में मदद करके अमेरिका की विदेश नीति एवं राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन करेगी। डीएससीए ने अमेरिकी कांग्रेस को एक प्रमुख बिक्री अधिसूचना जारी कर कहा कि हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति एवं आर्थिक प्रगति के लिए भारत एक महत्वपूर्ण शक्ति बना हुआ है।

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भारत ने जो अनुरोध किये हैं, उनमें विमानों में खप सकने वाले कलपुर्जे और मरम्मत तथा वापसी वाले पुर्जे, कारट्रिज एक्चुएटिड उपकरण या प्रोपेलेंट एक्चुऐटिड उपकरण (सीएडी या पीएडी), अग्निशमन कारट्रिज, आधुनिक रडार चेतावनी रिसीवर शिपसेट और जीपीएस आदि शामिल हैं। इनकी कुल कीमत नौ करोड़ डॉलर है। पेंटागन ने कहा कि प्रस्तावित बिक्री सुनिश्चित करेगी कि पहले खरीदे जा चुके विमान भारतीय वायु सेना, सेना और नौसेना की परिवहन जरूरतों, स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता तथा क्षेत्रीय आपदा राहत के लिए प्रभावी तरीके से काम कर सकें। उसने कहा कि उपकरणों और सेवाओं की यह बिक्री वायु सेना को सी-130जे परिवहन विमानों के संदर्भ में मिशन के लिहाज से तैयार रहने की स्थिति में रखेगी। भारत को इस अतिरिक्त सहायता को प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं आएगी। पेंटागन के अनुसार इन उपकरणों की प्रस्तवित बिक्री क्षेत्र में मूलभूत सैन्य संतुलन को नहीं बदलेगी। प्रमुख अनुबंधकर्ता लॉकहीड-मार्टिन कंपनी (जॉर्जिया) होगी। अमेरिका ने 2016 में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत को ‘प्रमुख रक्षा साझेदार’ घोषित किया था।