SpaceX का Starship पहली बार कक्षा में पहुंचा, इंजन की खराबी से उड़ान जल्दी रोकी

अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स ने अपने सबसे बड़े रॉकेट स्टारशिप को पहली बार पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक भेजा और स्टारलिंक उपग्रह भी स्थापित किए। हालांकि शुरुआती चरण में एक इंजन बंद होने के कारण सुरक्षा को देखते हुए दस घंटे की उड़ान को करीब तीन घंटे में ही समाप्त कर दिया गया। प्रशांत महासागर में उतरते समय यान पलट गया और उसमें आग लग गई।
अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स ने सोमवार को अपने विशाल स्टारशिप रॉकेट को पहली बार अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाया और अब तक के सबसे उन्नत स्टारलिंक उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में स्थापित किया, लेकिन सुरक्षा कारणों से उड़ान को निर्धारित समय से पहले समाप्त कर दिया। अंतरिक्ष यान ने प्रशांत महासागर के ऊपर पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया और टेक्सास से उड़ान भरने के करीब तीन घंटे बाद हवाई के उत्तर में समुद्र में उतर गया। कंपनी ने 10 घंटे की उड़ान का लक्ष्य रखा था, जिसमें यान को पृथ्वी के चारों ओर छह पूरे चक्कर लगाने थे।
इसका उद्देश्य नासा के आर्टेमिस चंद्रमा कार्यक्रम के लिए स्टारशिप की तैयारी साबित करना था। समुद्र में उतरते ही स्टारशिप पलट गया और उसमें आग लग गई, जिससे मिशन का नाटकीय अंत हुआ। कंपनी के संस्थापक एलन मस्क का स्टारशिप कक्षा तक पहुंचने में लगभग विफल हो गया था, क्योंकि उसका एक इंजन समय से पहले बंद हो गया।
हालांकि, बाकी सभी प्रणालियां अच्छी तरह काम कर रही थीं और खराब इंजन की अब जरूरत नहीं थी। ऐसे में उड़ान नियंत्रकों ने तनावपूर्ण कुछ मिनटों के बाद मिशन को योजना के अनुसार आगे बढ़ाने का फैसला किया। मिशन नियंत्रण ने घोषणा की, ‘‘स्टारशिप कक्षा में पहुंच गया है’’, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
नासा के प्रशासक जेयर्ड आइजैकमैन ने स्पेसएक्स को कक्षा में पहुंचने और ‘‘हर कदम को सुरक्षित, जिम्मेदार और खास तौर पर प्रेरणादायक तरीके से पूरा करने’’ के लिए बधाई दी। मस्क का यह महत्वाकांक्षी रॉकेट अब तक बनाया गया सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह स्टारलिंक के 26 नवीनतम उपग्रहों को लेकर गया था, जो पहले से इंटरनेट सेवा दे रहे करीब 11,000 पुराने उपग्रहों के समूह में शामिल हो गए।
ये उपग्रह एक-एक करके अंतरिक्ष यान से बाहर निकले, जिसे स्टारबेस प्रक्षेपण स्थल पर मौजूद स्पेसएक्स के समर्थकों ने उत्साह के साथ देखा। इसके कुछ ही समय बाद उड़ान को समय से पहले समाप्त करने का फैसला लिया गया। स्पेसएक्स ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय ‘‘अत्यधिक सावधानी बरतते हुए’’ लिया गया, क्योंकि उड़ान के शुरुआती चरण में एक इंजन में समस्या आई थी।
इस बार स्पेसएक्स का उद्देश्य 275 किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी का चक्कर लगाना था। यान को करीब 10 घंटे में छह बार पृथ्वी की परिक्रमा करनी थी और अंत में चिली के पास प्रशांत महासागर में उतरना था। स्टारशिप 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ते हुए निर्धारित कक्षा में पहुंच गया, लेकिन उड़ान नियंत्रकों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसे कई घंटे पहले ही वापस लाने का फैसला किया।
यान ने केवल दो चक्कर ही पूरे किए। स्पेसएक्स स्टारशिप को कक्षीय उड़ानों के लिए प्रमाणित कराने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। यह चंद्रमा और मंगल की यात्राओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नासा का आर्टेमिस-3 मिशन अगले साल गर्मियों में शुरू हो सकता है। इसमें पृथ्वी की कक्षा में तीन अलग-अलग प्रक्षेपणों के जरिये अंतरिक्ष यानों को आपस में जोड़ने (डॉकिंग) की प्रक्रिया की जाएगी। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों से भरे ओरायन कैप्सूल और चंद्रमा पर उतरने वाले दो प्रतिस्पर्धी यान शामिल होंगे।
मस्क ने मूल रूप से स्टारशिप को मंगल ग्रह के लिए विकसित किया था और उनका इरादा लाल ग्रह पर पहले बसने वालों को ले जाने के लिए बड़ी संख्या में ऐसे यान भेजने का था। फिलहाल वह चंद्रमा पर ध्यान केंद्रित करने और बड़ी संख्या में उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने के लिए स्टारशिप का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। आने वाले कुछ वर्षों में कंपनी के अपेक्षाकृत छोटे फाल्कन-9 रॉकेट को चरणबद्ध तरीके से हटाने की भी योजना है।
फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर में दूसरा स्टारशिप प्रक्षेपण स्थल लगभग पूरा हो चुका है, जबकि तीसरा प्रक्षेपण स्थल लुइसियाना में बनाने की योजना है।
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