नाचते-नाचते ट्रंप भारत से टैरिफ हटाने पर लेने वाले हैं बड़ा फैसला! अमेरिकी वित्त मंत्री ने दिए संकेत

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अभिनय आकाश । Jan 24 2026 1:56PM

स्कॉट बेस ने संकेत दिया कि आने वाले वक्त में भारत पर लगाया गया 25% टेरिफ हटाया भी जा सकता है। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का एक रास्ता बन सकता है। यानी अगर हालात अनुकूल रहे और बातचीत आगे बढ़ी तो अमेरिका भारत को टेरिफ में राहत दे सकता है। यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल व्यापार और रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों कई मोर्चों पर घिरे हुए हैं और वक्त के साथ उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वजह है उनके फैसले। इस बीच अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसन ने भारत पर लगाए गए 25% टेरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत पर लगाया गया यह टेरिफ अमेरिका के लिए काफी सफल रहा है। बेसेंट के मुताबिक इस टेरिफ के बाद भारत की ओर से रूस से तेल की खरीद में भारी गिरावट आई है। फिलहाल यह टेरिफ लागू है। लेकिन अमेरिका इसे स्थाई नहीं मानता। स्कॉट बेस ने संकेत दिया कि आने वाले वक्त में भारत पर लगाया गया 25% टेरिफ हटाया भी जा सकता है। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का एक रास्ता बन सकता है। यानी अगर हालात अनुकूल रहे और बातचीत आगे बढ़ी तो अमेरिका भारत को टेरिफ में राहत दे सकता है। यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल व्यापार और रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।

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अमेरिका ने भारत से आने वाले कई सामानों पर फिलहाल कुल मिलाकर 50% तक का टेरिफ लगा रखा है। इसमें से करीब 25% सामान्य टेरिफ है जो भारत के लगभग 55% निर्यात पर लागू होता है। इसके अलावा अगस्त 2025 से एक अतिरिक्त 25% ऑयल से जुड़ा पेनल्टी टेरिफ लगाया गया जो रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाने के लिए है। रूस के तेल को लेकर अमेरिका G7 और यूरोपीय देशों ने एक प्राइस कैप सिस्टम भी लागू किया है। जनवरी 2026 तक यह कैप लगभग 47.7 प्रति बैरल है। जिसे 1 फरवरी 2026 से घटाकर 44.10 किया जाएगा।

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नियम यह है कि अगर रूसी तेल तय कीमत से ऊपर बेचा गया तो उस पर बीमा, शिपिंग और फाइनेंस जैसी सेवाएं नहीं दी जाएंगी। उधर अमेरिका का दावा है कि इस दबाव के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है।  वहीं भारत का कहना है कि अपनी ऊर्जा, जरूरतें, राष्ट्रीय हित और किफायती दामों के आधार पर तय करता है। भारत साफ कर चुका है कि वो किसी के दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाएगा। 

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