धमकी देते रह गए ट्रंप, कुवैत में घुस गया ईरान, चल गई गोलियां

बूबियन आइलैंड को कुवैत का सबसे बड़ा आइलैंड माना जाता है। यह फारस की खाड़ी के नॉर्थ वेस्ट में मौजूद है। कुवैत के लिए बेहद अहम यह आइलैंड इलाके में अमेरिका का टेंपरेरी बेस भी माना जाता है।
मिडिल ईस्ट में जंग फिर शुरू हो गई है। यूएई के बाद अब कुवैत का नंबर लग गया है। खबर तो यह है कि ईरान की फोर्स कुवैत में घुस गई हैं। जमीन पर ऑपरेशन अंजाम देने की कोशिश हुई। यह इल्जाम किसी और ने नहीं बल्कि खुद कुवैत ने लगाया है। कुवैत सरकार का कहना है कि ईरान ने उनके एक आइलैंड पर सेंध मारने की कोशिश की। इस दौरान ईरानी फोर्स और कुवैत की आर्मी के बीच गोलीबारी की भी खबर है। कुवैत का कहना है कि आईआरजीसी से जुड़े लड़ाके हमारे यहां आकर कुवैत के कंट्रोल वाले बूबियन आइलैंड पर ग्राउंड ऑपरेशन करने की कोशिश कर रहे हैं। यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है जब ईरान और कुवैत के बीच झड़पों की खबर आ रही थी। 40 रोजा जंग में कुवैत पर ईरान ने 1500 से ज्यादा हमले अंजाम दिए थे। वहीं ईरान ने इस घटना पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इतना ही नहीं कुवैत में ईरान का ग्राउंड ऑपरेशन सफल रहा या नहीं इसे लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
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बूबियन आइलैंड को कुवैत का सबसे बड़ा आइलैंड माना जाता है। यह फारस की खाड़ी के नॉर्थ वेस्ट में मौजूद है। कुवैत के लिए बेहद अहम यह आइलैंड इलाके में अमेरिका का टेंपरेरी बेस भी माना जाता है। कहा जा रहा है कि ईरान यूएई, कुवैत और बहरीन के पीछे पड़ गया है। इस बार ईरान के निशाने पर यूएई, कुवैत और बहरीन है। तीनों ही देशों को अमेरिका और इजरायल का करीबी माना जाता है। तेहरान टाइम्स के मुताबिक यूएई जंग में ईरान का प्रॉक्सी बन गया है। उसे सबक सिखाने की जरूरत आ पड़ी है। पिछली बार जंग के 37 दिनों के दौरान ईरान ने यूएई पर 2000 से ज्यादा हमले अंजाम दिए थे। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट शौकत भारती कहते हैं कि बस यही जंग तय करेगी कि ईरान बचता है या फिर मिडिल ईस्ट में अमेरिका मौजूद रहता है और इसराइल का वजूद रहता है। इस बीच ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर के सलाहकार का भी एक बयान आया है कि ट्रंप विजेता के तौर पर चीन नहीं जा रहे हैं क्योंकि ईरान ने 40 रोजा जंग में अमेरिका को इतने जख्म दिए हैं कि वह यह नहीं कह सकता कि वह जीत गया है और चीन के सामने तो बिल्कुल भी नहीं कह सकता। यही वजह है कि दुनिया अलर्ट मोड़ पर चली गई है। कुवैत और बहरीन साथ ही यूएई ने भी अपनी तैयारी अंजाम दे रखी है ईरान के खिलाफ। कहा तो यह भी जा रहा है कि कुवैत और बहरीन साथ में यूएई में इजरायल से बड़े पैमाने पर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम पहुंचे हैं। यही वजह है कि पिछले दिनों ईरान ने यूएई पर हमले अंजाम दिए थे। हालांकि ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल एक बार फिर गहराने लगे हैं।
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ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिरोध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां परमाणु युद्ध की धमकियां हवा में तैरने लगी है। हालिया घटनाक्रम में ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उस पर दोबारा सैन्य हमला किया गया तो वह अपने यूरेनियम संवर्धन की दर को बढ़ाकर 90% कर देगा। संकट की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए कूटनीतिक प्रस्तावों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने इन प्रस्तावों को ईरान ने अपनी संप्रभुता के खिलाफ माना है। जिसके जवाब में ईरान की ओर से आए तीखे बयानों ने वाशिंगटन को नाराज कर दिया। दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने जो अपनी मैक्सिमम प्रेशर की नीति के लिए जाने जाते हैं। इस प्रतिक्रिया से खासे असंतुष्ट दिखे और इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानों की एक नई जंग छिड़ गई है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने इस तनाव को एक खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर घोषणा की है कि अगर ईरान की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है या फिर उस पर हमला किया जाता है तो ईरान यूरेनियम संवर्धन को 90% तक ले जाएगा। तकनीकी रूप से यूरेनियम का 90% तक समृद्ध होना वेपंस ग्रेट माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि ईरान उस सीमा को लांगने की तैयारी में है जहां से परमाणु बम बनाना सिर्फ कुछ ही कदमों की दूरी पर रह जाता है।
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ईरान का संवर्धन स्तर नागरिक उद्देश्यों और चिकित्सा अनुसंधान तक सीमित होने का दावा किया जाता रहा है। लेकिन 90% की बात करना सीधे तौर पर परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की धमकी है। इब्राहिम रेजाई ने यह भी साफ कर दिया है कि यह केवल एक कोरी धमकी नहीं बल्कि उन्होंने दावा किया है कि इस विकल्प पर ईरानी संसद के कमीशन में विस्तृत समीक्षा की जाएगी। यह कदम दर्शाता है कि ईरान के अंदर एक बड़ा राजनीतिक वर्ग अब परमाणु अप्रसार समझौते से पीछे हटने और सैन्य परमाणु क्षमता विकसित करने के पक्ष में लामबंद हो रहा है। नेजाई का बयान इस बात का संकेत है कि ईरान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु प्रति विरोध को अंतिम हथियार के रूप में देख रहा है। वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव और इजराइल की चिंता। ईरान की इस चेतावनी ने ना सिर्फ अमेरिका बल्कि इजराइल और खाली देशों की नींद भी उड़ा दी है।
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