इधर ट्रंप का परमाणु बम सूंघने वाला विमान उड़ा, उधर ईरान में डोभाल का बड़ा मिशन हुआ शुरू!

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अभिनय आकाश । Jan 30 2026 11:03AM

आज उनकी सार्वजनिक तस्वीर सामने आ गई। यानी खामनेई बंकर से बाहर आ गए। इसी के साथ अमेरिका का दूसरा करियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान के और नजदीक पहुंच गया। और इन सारे अपडेट्स के बीच डोभाल के दूत यानी भारत के डिप्टी एनएसए पवन कपूर ने तेहरान में उस शख्सियत के साथ बड़ी मीटिंग की है जिसे ईरान के सर्वोच्च नेता आया अली खामई का रणनीतिक दिमाग कहा जाता है।

तेहरान में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबल के दूत की एंट्री है। मित्रों युद्ध के इस माहौल के बीच डोभाल के दूत की तेहरान पहुंचने की तस्वीरें सारी दुनिया में वायरल हो रही है। यानी जिस वक्त दुनिया सोच रही है अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध कब शुरू होगा? रोजाना दी जा रही नई-नई धमकियों के बीच क्या युद्ध तय है या फिर समझौते की भी कोई गुंजाइश बची है? उस वक्त भारत के इस दाव ने सारी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका ने तेहरान की तरफ अपने परमाणु बम सूंघने वाले विमान को रवाना कर दिया। जिसके बाद ईरान ने परमाणु बम हासिल करने की आशंका जाहिर की जा रही है। कल तक ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के बंकर में छिपे होने की खबर सामने आ रही थी। लेकिन आज उनकी सार्वजनिक तस्वीर सामने आ गई। यानी खामनेई बंकर से बाहर आ गए। इसी के साथ अमेरिका का दूसरा करियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान के और नजदीक पहुंच गया। और इन सारे अपडेट्स के बीच डोभाल के दूत यानी भारत के डिप्टी एनएसए पवन कपूर ने तेहरान में उस शख्सियत के साथ बड़ी मीटिंग की है जिसे ईरान के सर्वोच्च नेता आया अली खामई का रणनीतिक दिमाग कहा जाता है। 

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जिस वक्त मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।  कुछ दिन पहले यूएन में ईरान के पक्ष में वोटिंग करने वाला भारत अगर इजराइल का पक्का दोस्त है तो इस तनाव भरे माहौल में युद्ध छिड़ने से ठीक पहले तेहरान के साथ यह बड़ी मीटिंग के बेहद अहम मायने हैं। अमेरिका के ऑफ एयरफोर्स बेस से WC135R कास्टेंट फिनिक्स विमान ने उड़ान भरी। इस विमान को न्यूक स्नाइपर यानी कि परमाणु बम को सूंघने वाला विमान कहा जाता है। और यह अमेरिकी विमान यूरोप होते हुए मिडिल ईस्ट की तरफ जा रहा है। जिस ऑफ एयरफोर्स बेस से इस विमान ने उड़ान भरी वो अमेरिका का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक सैन्य अड्डों में से एक है। जहां कुछ खास तैयारियां की जाती हैं। अमेरिका के नेब्रास्का राज्य में स्थित इस एयरबेस में अमेरिकी सामरिक कमान का मुख्यालय है जो अमेरिका के परमाणु हथियारों को संभालता है। न्यूक्लियर डिटरेंस यानी परमाणु हथियारों के जरिए दुश्मन को हमला करने से रोकने की योजना भी यही बनती है। 

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अमेरिका पर होने वाले मिसाइल हमले से सुरक्षा और साइबर और स्पेस ऑपरेशन की रूख रूपरेखा भी यहीं पर तैयार की जाती है। यानी आप कह सकते हैं जिस एयरबेस से अमेरिका के परमाणु बम सूंघने वाले विमान ने उड़ान भरी वहीं पर अमेरिका का न्यूक्लियर दिमाग भी बैठता है। अमेरिका का WC135R कास्टेंट फिनिक्स विमान जब यहां से उड़ता है तो आमतौर पर यह कोई सामान्य ट्रेनिंग मिशन नहीं होता है बल्कि दुनिया के किसी हिस्से में परमाणु गड़बड़ी के संकेत होते हैं और फिलहाल यह विमान यूरोप होते हुए मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहा है। यानी अमेरिका को पूरा शक है मिडिल ईस्ट में कोई परमाणु घटना हो रही है और इस उड़ान को दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट्स सीधे ईरान के परमाणु बम से जोड़कर देख रहे हैं। अमेरिका का यह विमान उस वक्त ही अपना एयरबेस छोड़ता है जब अमेरिका को किसी देश पर न्यूक्लियर टेस्ट का शक हो। या फिर युद्ध जैसे हालात में किसी देश ने अमेरिका को न्यूक्लियर हथियारों की धमकी दी हो।

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