चीन की अमेरिका से अपील, कहा- CPC को न करे बदनाम और अलगाववादी ताकतों का समर्थन बंद करे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 22, 2021   14:48
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चीन की अमेरिका से अपील, कहा- CPC को न करे बदनाम और अलगाववादी ताकतों का समर्थन बंद करे

चीन ने कहा कि अमेरिका सीपीसी को बदनाम नहीं करे और ‘अलगाववादी ताकतों’ का समर्थन बंद करे।अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 11 फरवरी को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से करीब दो घंटे से अधिक बात की थी और कहा था कि चीन के मानवाधिकार उल्लंघन का नतीजा ठीक नहीं होगा।

बीजिंग।चीन ने सोमवार को अमेरिका से सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) और उसकी एक दलीय राजनीतिक प्रणाली को ‘‘बदनाम’’ नहीं करने और ताइवान, तिब्बत, हांगकांग एवं शिनजियांग में ‘‘अलगाववादी ताकतों’’ का समर्थन नहीं करने की अपील की। चीन-अमेरिका संबंध के विषय पर आयोजित वार्षिक ‘लैंटिंग फोरम’ में विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बाइडन प्रशासन को अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन कठोर नीतियों पर विचार करना चाहिए जिसे उन्होंने चीन के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाने के लिए उठाया था। वांग ने कहा, ‘‘हमारी मंशा अमेरिका को चुनौती देने या उसे हटाने की नहीं है। हम शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए तैयार हैं और अमेरिका के साथ साझा विकास चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह हम आशा करते हैं कि अमेरिका चीन के बुनियादी हितों, राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और विकास के अधिकार का सम्मान करेगा। हम अमेरिका से सीपीसी और चीन की राजनीतिक प्रणाली को बदनाम नहीं करने, उसके खिलाफ गलत शब्दों से बचने का अनुरोध करते हैं।’’

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विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘साथ ही हम चाहते हैं कि अमेरिका ‘ताइवान की आजादी’ की मांग करने वाले अलगाववादी ताकतों का समर्थन नहीं करे तथा हांगकांग, शिनजियांग एवं तिब्बत से संबंधित चीन के आंतरिक मामलों में उसकी संप्रभुता एवं सुरक्षा को कमतर करना बंद करे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि अमेरिका जल्द से जल्द उसकी नीतियों को ठीक करेगा। वह चीनी मालों पर बिना वजह लगाये गये कर, चीनी कंपनियों, अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों पर लगाये गये एकतरफा प्रतिबंधों को हटाएगा और चीन पर बेवजह दबाव बनाना बंद करेगा।’’ चीन और अमेरिका के संबंध वर्तमान में ठीक नहीं चल रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोरोना वायरस महामारी के उद्भव, दक्षिण चीन सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधि और मानवाधिकार समेत कई मुद्दों को लेकर टकराव चल रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 11 फरवरी को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से करीब दो घंटे से अधिक बात की थी और कहा था कि चीन के मानवाधिकार उल्लंघन का नतीजा ठीक नहीं होगा। विदेश मंत्री ने कहा कि संवेदनशील मुद्दों के प्रभावी समाधान के लिए उन्हें हर क्षेत्र में व्यापक बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘चीन वार्ता के लिए हमेशा से तैयार है।

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समस्याओं के समाधान के लिए वार्ता करने और अमेरिका की ओर से भी सार्थक बातचीत के लिए तैयार हैं।’’ वांग ने कहा, ‘‘ हम जानते हैं कि अमेरिका का नया प्रशासन अपनी विदेश नीति की समीक्षा और आकलन कर रहा है, इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका के नीति निर्माता समय के साथ तालमेल बनाएंगे, दुनिया के रुख को देखेंगे, पक्षपातपूर्ण रवैया को छोड़ेंगे, गैर जरूरी संदेह नहीं करेंगे और चीन-अमेरिका संबंधों में बेहतर प्रगति सुनिश्चित करने के लिए चीन को लेकर पुरानी नीति पर लौटेंगे।’’ राष्ट्रपति बाइडन ने भी चीन के साथ फिर से रिश्ते सुधारने और अमेरिकी कूटनीति में नरमी लाने पर जोर दिया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह चीन को लेकर अमेरिका की नीतियों में कोई बदलाव करेंगे या नहीं।





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पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सड़क किनारे हुए बम धमाके में पांच लोगों की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   13:17
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पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सड़क किनारे हुए बम धमाके में पांच लोगों की मौत

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान में फिर फटा शक्तिशाली बम फटने से पांच लोगों की मौत हो गई। धमाका टंडोरी इलाके के सिबी कस्बे से 30 किलोमीटर दूर एक स्थान पर हुआ। सिबी के उपायुक्त सैयद जाहिद शाह ने कहा कि धमाके में पांच मजदूरों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए। इनमें सुरक्षा कर्मी भी शामिल है।

क्वेटा । पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में ट्रक के सड़क किनारे हुए बम धमाके की चपेट में आने से उसमें सवार पांच निर्माण मजदूरों की मौत हो गई और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार शाम हुए इस बम धमाके की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। धमाका टंडोरी इलाके के सिबी कस्बे से 30 किलोमीटर दूर एक स्थान पर हुआ। सिबी के उपायुक्त सैयद जाहिद शाह ने कहा कि धमाके में पांच मजदूरों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए। इनमें एक सुरक्षा कर्मी भी शामिल है।





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‘कोवैक्स’ कार्यक्रम के तहत श्रीलंका को मिला ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीका

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   12:23
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‘कोवैक्स’ कार्यक्रम के तहत श्रीलंका को मिला ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीका

‘कोवैक्स’ एक वैश्विक पहल है जिसके तहत आय के स्तर को नजरअंदाज कर सभी देशों को त्वरित और समान रूप से कोविड-19 का टीका देने का प्रयाय किया जा रहा है।

कोलंबो। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ‘कोवैक्स’ कार्यक्रम के तहत ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीके की 2,64,000 खुराकों की पहली खेप रविवार को श्रीलंका पहुंची। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ‘कोवैक्स’ एक वैश्विक पहल है जिसके तहत आय के स्तर को नजरअंदाज कर सभी देशों को त्वरित और समान रूप से कोविड-19 का टीका देने का प्रयाय किया जा रहा है।

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श्रीलंका की मंत्री डॉ सुदर्शिनी फर्नांडोपुले ने बताया कि कोरोना वायरस टीके की पहली खेप रविवार को श्रीलंका पहुंची। उन्होंने कहा, “कोवैक्स कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय को आज कोविड-19 टीके की 2,64,000 खुराकें मिलीं।” यूनिसेफ ने एस्ट्राजेनेका टीके की पहली खेप श्रीलंका तक पहुंचाई।





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म्यांमा की सैन्य सरकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए बढ़ रहा वैश्विक दबाव

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   11:28
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म्यांमा की सैन्य सरकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए बढ़ रहा वैश्विक दबाव

अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि वह म्यांमा की सैन्य सरकार पर और अधिक प्रतिबंध लगाए। कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि दमनकारी सरकार के संसाधनों और उसे मिलने वाले धन के स्रोत में कटौती कर दबाव बनाया जा सकता है।

बैंकाक। म्यांमा में एक फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के विरोध में बढ़ते जनाक्रोश पर की जा रही हिंसक कार्रवाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि वह म्यांमा की सैन्य सरकार पर और अधिक प्रतिबंध लगाए। इसके साथ ही कई देश इस बारे में भी विचार कर रहे हैं कि वैश्विक निंदा के आदी हो चुके म्यांमा के सैन्य अधिकारियों को किस प्रकार हटाया जाए। महामारी के कारण पहले से ही आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है ऐसे में उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना म्यांमा की सैन्य सरकार को अपदस्थ करने की चुनौती और बढ़ गई है। फिर भी, कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि दमनकारी सरकार के संसाधनों और उसे मिलने वाले धन के स्रोत में कटौती कर दबाव बनाया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजनयिक क्रिस्टीन एस. बर्गनर ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद से आग्रह किया था कि सैन्य सरकार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। बर्गनर ने कहा था, “सामूहिक कार्रवाई अनिवार्य है। हम म्यांमा की सेना को कितनी छूट दे सकते हैं?” 

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संयुक्त राष्ट्र द्वारा समन्वित कार्रवाई करना कठिन है क्योंकि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस और चीन इस पर वीटो कर सकते हैं। इसके साथ ही म्यांमा के पड़ोसी देश, उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार और निवेश के स्रोत वाले देश प्रतिबंधों के खिलाफ हैं। शांतिपूर्ण कार्रवाई के भी कुछ प्रयास किए गए हैं जिसके तहत अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने म्यांमा की सेना, उनके परिजनों और सैन्य सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि म्यामां सेंट्रल बैंक में रखी एक अरब डॉलर से अधिक की राशि को निकालने के म्यांमा की सेना के प्रयासों को अवरुद्ध कर दिया गया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी थॉमस एंड्रयूज ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट में कहा था कि सैन्य सरकार के ज्यादातर आर्थिक हितों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कुछ देशों ने म्यांमा को दी जाने वाली सहायता पर भी रोक लगा दी है और विश्व बैंक ने कहा है कि उसने भी वित्तपोषण रोक दिया है तथा सहायता कार्यक्रमों की समीक्षा की जा रही है।





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