अमेरिका ने पहले फंडिंग रोकी, फिर नाता तोड़ा, जानें कैसे होती है WHO की फंडिंग, कौन देश देता है कितना पैसा?

अमेरिका ने पहले फंडिंग रोकी, फिर नाता तोड़ा, जानें कैसे होती है WHO की फंडिंग, कौन देश देता है कितना पैसा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन में चार तरह की फंडिंग मिलती है। जिसमें मूल्यांकन योगदान, निर्दिष्ट स्वैच्छिक योगदान, कोर स्वैच्छिक योगदान और पीआईपी योगदान शामिल है।

कोरोना के खिलाफ जंग में देशवासियों की एकजुटता को लेकर पीएम मोदी लगातार उसे सराह रहे हैं तो सुपर पावर अमेरिका कोरोना वायरस रोकने में नाकामी पर विश्व स्वास्थ्य संगठन पर अपना गुस्सा निकाल रहा है। कोरोना से अपने एक लाख से ज्यागा नागरिकों को खो चुके अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) से अपना नाता तोड़ लिया है। डब्ल्यूएचओ की फंडिग रोकने के बाद अब अमेरिका ने संगठन के चीन के कब्जे में होने के आरोप लगाते हुए अपने संबंध भी तोड़ लिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि वो डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली मदद को किसी और संस्था में लगाएंगे। आज के इस रिपोर्ट में हम बताएंगे की कौन है डब्ल्यूएचओ और क्या है इसके अहम काम। साथ ही बताएंगे की कहां से आता है डब्ल्यूएचओ के पास पैसा और ये खर्च कहां होता है।

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WHO कौन है और इसके अहम काम क्या हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन या डब्ल्यूएचओ की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी। डब्ल्यूएचओ की स्थापना के समय इसके संविधान पर 61 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। वर्तमान में इसके 194 सदस्य देश हैं। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनीवा शहर में है और अभी टेड्रोस एडहानॉम डब्ल्यूएचओ के प्रमुख हैं। यह एक वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी है यानी इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हें सुलझाने में मदद करना है।

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दुनिया में स्वास्थ्य संबंधी रुझानों की निगरानी और आकलन करना भी इसकी जिम्मेदारी है। अपनी स्थापना के बाद से डब्ल्यूएचओ ने स्मॉल पॉक्स बीमारी को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई है और फिलहाल डब्ल्यूएचओ एड्स, इबोला और टीबी जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम पर काम कर रहा है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन को कौन देश कितना रुपया देता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन में चार तरह की फंडिंग मिलती है। जिसमें मूल्यांकन योगदान, निर्दिष्ट स्वैच्छिक योगदान, कोर स्वैच्छिक योगदान और पीआईपी योगदान शामिल है।

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डब्ल्यूएचओ का वर्तमान फंडिंग पैटर्न के अनुसार साल 2019 की चौथी तिमाही के अनुसार, डब्ल्यूएचओ की फंडिंग में कुल योगदान 5.62 बिलियन डॉलर (करीब 432 अरब 17 करोड़ रुपये)के आसपास था, जिसमें मूल्यांकन योगदान 956 मिलियन डॉलर (73 अरब 50 करोड़ रुपये) का था, स्वैच्छिक योगदान 4.38 बिलियन डॉलर(336 अरब 76 करोड़ रुपये), कोर स्वैच्छिक योगदान 160 मिलियन डॉलर (12 अरब 30 करोड़ रुपये) औरा पीआईपी योगदान 178 मिलियन डॉलर (13 अरब 68 करोड़ रुपये) था।

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डब्ल्यूएचओ को सार्वाधिक योगदान देने वाले देश

अमेरिका- 890

चीन- 441

जापान- 315

जर्मनी- 224

ब्रिटेन- 168

फ्रांस- 163

इटली- 121

ब्राजील- 108

(राशि करोड़ रुपये में)

(मूल्यांकन योगदान 31 मार्च 2020 तक)

विश्व स्वास्थ्य संगठन को फंड

वर्ष 2017 में अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ को तीन हजार करोड़ रूपए दिए।

ये डब्ल्यूएचओ को उस वर्ष मिलने वाली कुल रकम का 17 फीसदी है।

वर्ष 2010 से 2017 के बीच अमेरिका ने 811 करोड़ से 864 करोड़ दिए।