India-China Bilateral Meeting | पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच दिल्ली में महा-वार्ता! बॉर्डर, सुरक्षा से व्यापार तक... जानिए क्या है बैठक का मुख्य एजेंडा

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ANI
रेनू तिवारी । Sep 12 2026 10:21AM

PM मोदी और शी की मुलाकात को चीन किस नज़रिए से देखता है, इस पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि कज़ान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा जब दोनों नेता मिलेंगे।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँच रहे हैं। पिछले लगभग सात वर्षों में चीनी राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है। शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी खिंचाव आ गया था। ऐसे में यह दौरा और द्विपक्षीय बातचीत भारत-चीन संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

PM मोदी और शी की मुलाकात को चीन किस नज़रिए से देखता है, इस पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि कज़ान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा जब दोनों नेता मिलेंगे। उन्होंने कहा, "चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने, रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक नज़रिए से द्विपक्षीय संबंधों को संभालने, बातचीत बढ़ाने, सहयोग को मज़बूत करने, मतभेदों को सही ढंग से सुलझाने और अच्छे पड़ोसी व एक-दूसरे की सफलता में मददगार साझेदार के तौर पर काम करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा।"इसे भी पढ़ें: समझिए आखिर जब नई दिल्ली में मोदी से जिनपिंग मिलेंगे तो दुनिया में क्या कूटनीतिक संदेश जाएगा?

इस बार जिनपिंग का दौरा क्यों अहम है?
जिनपिंग का यह दौरा इसलिए अहम है क्योंकि यह 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए गतिरोध के बाद लंबे समय तक ठप रहे संबंधों को सामान्य बनाने की भारत और चीन की कोशिशों के बीच हो रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के महत्व पर ज़ोर देते हुए माओ ने कहा कि यह उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों के बीच एकजुटता और सहयोग के लिए एक अहम मंच है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात, ब्रिक्स तंत्र के विकास और व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने जैसे अहम मुद्दों पर अन्य नेताओं के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही, वे चीन की अहम पहल और प्रस्ताव भी रखेंगे, जिससे व्यापक ब्रिक्स सहयोग के उच्च-गुणवत्ता वाले विकास की राह तय होगी।

ईरान-अमेरिका संघर्ष और यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच हो रहे नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के महत्व पर बात करते हुए माओ ने कहा कि चीन सुरक्षा के लिए एक साझा, व्यापक, सहयोगात्मक और टिकाऊ दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

शी जिनपिंग ने पिछली बार भारत का दौरा कब किया था?
चीनी राष्ट्रपति ने पिछली बार 2019 में चेन्नई के पास मल्लापुरम में PM मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था। उससे पहले, उन्होंने 2016 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए गोवा का दौरा किया था और सितंबर 2014 में पहली बार भारत आए थे, जब उन्होंने PM मोदी के साथ व्यापक बातचीत की थी। 2014 का दौरा दोनों नेताओं के पहले कार्यकाल के दौरान हुआ था।इसे भी पढ़ें: Explained Story | दोस्त, दुश्मन और ट्रंप फैक्टर... भारत के लिए BRICS में संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती | BRICS Summit 2026

PM मोदी और शी जिनपिंग की बैठक: एजेंडा क्या है?
PM मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान एक अहम बैठक करेंगे। उम्मीद है कि दोनों नेता सीमा, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, वीज़ा और उड़ानों जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की बैठक से रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति का आकलन करने और सीमा विवाद पर आगे के कदमों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा। खबरों के मुताबिक, PM मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें सैन्य और कूटनीतिक बातचीत को मजबूत करना, चीनी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ाना और भारत के व्यापार घाटे को कम करना शामिल है।

इसके अलावा, भारतीय निर्यात बढ़ाने, मशीनरी और तकनीक की आपूर्ति आसान बनाने, चीनी निवेश के लिए भरोसेमंद नियम बनाने और दोनों देशों के बीच वीज़ा, उड़ान और यात्रा प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी चर्चा हो सकती है।

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